कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में आयोजित महान स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानन्द जी के बलिदान शताब्दी समारोह में देश की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी का सान्निध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। यह हमारे लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का क्षण था।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में यह स्पष्ट किया कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने में गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
स्वामी श्रद्धानन्द जी का संपूर्ण जीवन सामाजिक समरसता, शुद्धि आंदोलन, राष्ट्रसेवा और वैदिक संस्कृति के संवर्धन की अनुपम मिसाल रहा है। उनका त्याग और बलिदान हम सभी को सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।
आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी संस्कारों का समन्वय ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष जी, मुख्यमंत्री श्री नायबसिंह सैनी जी सहित देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, खाप प्रधान और गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे।
इस पावन अवसर पर स्वामी श्रद्धानन्द जी की स्मृति में वर्षपर्यन्त आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला हेतु एक विशेष 'लोगो' का विमोचन सभी सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति में किया गया।
लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 151वीं जन्मजयंती - राष्ट्रीय एकता दिवस के पावन अवसर पर कोटि-कोटि वंदन!
आजादी के समय 562 रियासतों में बंटे हमारे भारत को एक सूत्र में पिरोना एक असंभव कार्य प्रतीत होता था, यदि सरदार साहब अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इन्हें एकजुट न करते तो आज हमारे भारत का स्वरूप कैसा होता, इसकी सहज कल्पना की जा सकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी ने सरदार साहब के इस ऐतिहासिक योगदान को वह मान-सम्मान दिया है, जिसके वह सच्चे अर्थों में अधिकारी थे। आज नर्मदा जिले के केवड़िया स्थित 'स्टैच्यु ऑफ यूनिटी' संपूर्ण राष्ट्र के लिए भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता का अनुपम प्रतीक बन चुका है।
आइए, राष्ट्रीय एकता दिवस के इस पावन पर्व पर राष्ट्र-प्रथम की भावना के साथ देश की एकता और अखंडता की रक्षा का दृढ़ संकल्प लें।
महर्षि दयानंद सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!
महर्षि दयानंद जी केवल एक महान संन्यासी और विचारक ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज को अज्ञानता, अंधविश्वास, कुरीतियों और पाखंड के अंधकार से निकालकर 'वेदों की ओर लौटो' का अमर संदेश दिया।
उन्होंने अपने कालजयी ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' के माध्यम से सत्य का निष्पक्ष प्रतिपादन किया और समाज में ज्ञान एवं विवेक की नयी चेतना जगाई।
महर्षि जी ने स्त्री-शिक्षा, छुआछूत के उन्मूलन, बाल विवाह के विरोध और सामाजिक समरसता के लिए जो क्रांतिकारी कदम उठाए, वह आज भी हमारे राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा हैं।
महर्षि जी का स्पष्ट संदेश था कि प्रकृति के नियमों के अनुकूल जीना, गौ-संवर्धन करना, यज्ञ-हवन द्वारा पर्यावरण को शुद्ध रखना और सात्विक आहार अपनाना ही मानव-मात्र के कल्याण का मार्ग है।
आइए, महर्षि दयानंद सरस्वती जी के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज से अज्ञानता और कुरीतियों को मिटाएं, स्वदेशी और नैतिक मूल्यों को अपनाएं और समृद्ध एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
गुजरात दौरे पर पधारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी का गांधीनगर स्थित लोकभवन में सहर्ष आत्मीय स्वागत किया तथा स्नेहपूर्ण विदायी दी!
आदरणीय प्रधानमंत्री जी के साथ बिताए गए पल सदैव अत्यंत ऊर्जा, उत्साह एवं मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री जी का अटूट परिश्रम, दूरदर्शी नेतृत्व और देश-सेवा के प्रति निष्ठा हम सभी के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत है। वर्ष 2047 तक 'विकसित और आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण का उनका संकल्प जन-जन में राष्ट्र प्रथम की भावना जगा रहा है।
हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत मंत्री श्री कृष्णलाल पंवार जी ने गांधीनगर स्थित लोकभवन में शुभेच्छा मुलाकात की।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास, पंचायती राज, प्राकृतिक कृषि, सामाजिक समरसता और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।
दिल्ली देहात स्थित घोगा गांव में आयोजित जीवन ज्योति यज्ञ में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला।
घोगा गांव निवासी श्री दीपक भारद्वाज जी द्वारा अपने माता-पिता के सम्मान में आयोजित यह कार्यक्रम अत्यंत प्रेरणादायी है। जो संतान अपने माता-पिता और बुजुर्गों का आदर करती है, वही जीवन में सच्चे अर्थों में प्रगति और नैतिक मूल्यों को प्राप्त करती है।
उत्तर भारत की प्रमुख सामाजिक संस्था पालम 360 खाप के प्रधान चौधरी सुरेंद्र सोलंकी जी के नेतृत्व में आयोजित यह पहल नयी पीढ़ी को व्यसनमुक्ति, सदाचार और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने का एक अद्भुत प्रयास है।
आधुनिकता के इस दौर में अपनी सनातन जड़ों से जुड़कर रहना, युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से दूर रखना और समाज में आपसी भाईचारे और समरसता को सुदृढ़ करना ही हमारे भावी भारत के निर्माण की असली कुंजी है।
मेरा युवा भारत द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वंदे मातरम् शिविर के ऊर्जावान युवा सहभागियों के साथ गांधीनगर स्थित लोकभवन में आत्मीय संवाद हुआ।
भारत विविधताओं से भरा देश है, किंतु हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा युगों-युगों से 'वसुधैव कुटुंबकम' के सूत्र में बंधी है। 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' और नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से हमारे युवाओं में राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक समझ को नयी दिशा मिल रही है।
वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को जातिवाद, भाषावाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर अधिकारों के साथ-साथ अपने नागरिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।
स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक कृषि और विशेषकर व्यसनमुक्ति के लिए युवाओं को आगे आना होगा। भावी पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना समाज का सामूहिक उत्तरदायित्व है।
इस शिविर में केरलम, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडिशा तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव के 150 युवा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। युवाओं के प्रश्नों और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान कर अत्यंत प्रसन्नता हुई।
गांधीनगर स्थित लोकभवन में दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू जी ने सौजन्य मुलाकात की।
इस अवसर पर श्री संधू जी को गुजरात में चल रहे राज्यव्यापी प्राकृतिक खेती मिशन और ग्राम कल्याण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी।
रासायनिक खाद से मुक्त, जहरमुक्त और जल-संरक्षण पर आधारित हमारी प्राकृतिक कृषि पद्धति की प्रगति की उन्होंने खूब सराहना की।
मुलाकात के दौरान देश और समाज के विकास से जुड़े विभिन्न लोक-कल्याणकारी विषयों पर महत्वपूर्ण और सार्थक चर्चा हुई।
दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू जी का गुजरात लोकभवन पधारने पर हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन!
अहमदाबाद के हाथीजण स्थित राधे उपवन में आयोजित गरिमामयी कार्यक्रम में समाजसेवी स्व. धरमशीभाई मोरड़िया जी के जीवन और सेवाकार्यों पर आधारित पुस्तक ‘माटी अने माणसाई' का विमोचन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री प्रफुलभाई पानशेरिया जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री परषोत्तम भाई रूपाला जी, श्री देवुसिंह चौहाण जी, सांसदगण, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
स्व. धरमशीभाई का जीवन भगवद्गीता और उपनिषदों में वर्णित 'त्यागपूर्वक उपभोग' का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने जीवनभर सादगी और निष्काम भाव से शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्वितीय जनसेवा की।
धन-संपत्ति में लिप्त रहने वाले तो बहुत होते हैं, लेकिन संपत्ति का सदुपयोग समाज-कल्याण में करने वाले जल-कमलवत विरले ही होते हैं। इंसान के सत्कर्म और सद्गुण ही उसकी वास्तविक पूंजी हैं, जो उसे अमर बनाते हैं।
बीरेन कोठारी जी द्वारा लिखित और मोरड़िया परिवार द्वारा प्रकाशित यह जीवनचरित्र समाज और भावी पीढ़ियों को उच्च नैतिक मूल्यों और सेवा-भाव से जीवन जीने का मार्ग दिखाएगा।
गुजरात विश्वकोश ट्रस्ट, अहमदाबाद की कलाविथिका आर्ट गैलरी में अहमदाबाद कल्चरल वीक के अंतर्गत आयोजित विशेष कला प्रदर्शनी ‘फ्रॉम द बाजार टू द कैनन' का शुभारंभ किया।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति और कला भी महत्वपूर्ण चेतना जगा सकती है। यह प्रदर्शनी इसी अद्भुत विचार को जीवंत करती है।
इस प्रदर्शनी में गुजरात की कला परंपरा की पांच पीढ़ियों के 33 प्रतिष्ठित कलाकारों की उत्कृष्ट कृतियों को प्रदर्शित किया गया है।
हमारी पारंपरिक कला और विरासत ही हमारी असली पहचान हैं। यह आयोजन नई पीढ़ी को हमारी कला-संस्कृति से जोड़ने का एक अत्यंत सराहनीय प्रयास है।
अहमदाबाद जिले के साणंद में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में प्राकृतिक कृषि उत्पादों और मूल्यवर्धित वस्तुओं के विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया तथा प्रगतिशील किसानों का उत्साहवर्धन किया।
यूरिया-डीएपी जैसे रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से हमारी उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है तथा कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। यह सिर्फ खेती का नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का संकट है।
यह सोचना बिल्कुल गलत है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन घटता है। देशी गाय के गोबर में मौजूद करोड़ों लाभकारी सूक्ष्मजीव भूमि को जीवंत बनाते हैं, जिससे न्यूनतम लागत पर उत्तम और पौष्टिक फसल प्राप्त होती है।
यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि अहमदाबाद जिले में जिला पंचायत द्वारा प्राकृतिक सब्जियों के लिए विशेष बाजार की व्यवस्था कर किसानों को आर्थिक संबल दिया जा रहा है।
आइए, हम सब मिलकर अपनी माटी और भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए रासायनिक खेती को त्यागें और देशी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि को अपनाएं!
साणंद तहसील के कुंवार गांव में अनुसूचित जाति परिवार के श्री मुकेशभाई धूळाभाई वाघेला जी के निवास स्थान पर परिजनों के साथ बैठकर सुबह का अल्पाहार ग्रहण किया।
मुकेशभाई एवं उनके परिवार के सदस्यों ने अत्यंत प्रेम, आदर और खुले दिल से मेरा स्वागत किया। परिवार द्वारा बड़े प्रेम से परोसे गए ताजे थेपलों और फलों का स्वाद सचमुच आत्मीयता से परिपूर्ण था।
गांव के नागरिकों के साथ हुई विशेष बैठक में भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जी के महान विचारों और आदर्शों को स्मरण किया। हम सबको मिलकर शिक्षित बनने, आपसी भाईचारे के साथ रहने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।
समाज में किसी भी प्रकार के ऊंच-नीच या जातिगत भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। अभिभावकों से विशेष आग्रह किया कि वह अपने बच्चों को उच्च और गुणवत्तायुक्त शिक्षा अवश्य दिलाएं, ताकि वह अपने परिवार और राष्ट्र का नाम रोशन कर सकें।
साणंद तहसील के विंछिया गांव में प्रगतिशील किसान श्री गजेन्द्रसिंह वाघला जी के कामधेनु प्राकृतिक फार्म का दौर किया। स्वयं गौ दुग्ध दोहन किया। श्री गजेन्द्रसिंह के खेत की उत्कृष्ट उपजाऊ मिट्टी और प्राकृतिक रूप से लहलहाती हरी-भरी फसलों को देखकर मन को अत्यंत प्रसन्नता हुई।
देशी गाय के मात्र 1 ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक सूक्ष्मजीव होते हैं, जो भूमि को उपजाऊ और जीवंत बनाते हैं। जीवामृत और घनजीवामृत का यह प्राकृतिक विज्ञान रासायनिक खातरों की जरूरत को पूरी तरह समाप्त कर देता है।
बाजार के महंगे और जहरीले रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से हमारी धरती बंजर हो रही है तथा लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हमें अपनी माटी और भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए कम खर्च वाली देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती को संकल्प के साथ अपनाना होगा।
साणंद तहसील के विंछिया गांव की सरकारी विद्यालय के साधारण कक्ष में रात्रि विश्राम किया। प्रातःकाल विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं ग्रामजनों के साथ योगाभ्यास किया।
प्राणायाम और विभिन्न योगासन करवाते हुए उनके लाभों के बारे में विस्तार से समझाया। योग और प्राणायाम से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार और एकाग्रता भी बढ़ती है।
बच्चों को प्रेरित किया कि वह अपने दैनिक जीवन में अनुशासन, कठोर परिश्रम और सकारात्मक सोच को अपनाएं, ताकि वह भविष्य में देश के एक आदर्श और सक्षम नागरिक बन सकें।
साणंद तहसील के विंछीया गांव में ग्रामवासियों के साथ सहज संवाद करने का सुखद अवसर मिला।
गांव में स्थानीय नागरिकों, युवाओं, बुजुर्गों एवं अनुसूचित जाति परिवारों के साथ सहजता और आत्मीयता से चर्चा की और उनकी दिनचर्या के बारे में जाना।
ग्रामीण भारत की असली ताकत यहां के लोगों के निष्छल प्रेम, आतिथ्य-भाव और सादगी में बसती है। जब हम जनता के बीच सीधे पहुंचकर उनके सुख-दुःख के सहभागी बनते हैं, तो लोकसेवा का वास्तविक अर्थ सार्थक होता है।














































