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कहानी -
कुछ लोग लौटकर नहीं आते -
“कहानी में प्रयुक्त सभी नाम, क़िरदार और घटनाएँ लेखक की कल्पना पर आधारित हैं।
यदि किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से समानता हो, तो उसे केवल संयोग समझा जाए।”
स्टेशन पर मैं हर रविवार आता था।
ना मुझे कहीं जाना होता था, ना किसी को लेने आना होता था। बस एक आदत सी बन गई थी। प्लेटफार्म नंबर 2 की आखिरी बेंच पर बैठना, चाय पीना और ट्रेनों को आते-जाते देखना।
वहाँ एक बूढ़ी अम्मा भी आती थीं। हर रविवार, ठीक 4 बजे वाली ट्रेन के टाइम पर। एक छोटी सी पोटली, हाथ में एक पुराना छाता, चाहे धूप हो या बारिश। वो आतीं, बेंच पर बैठतीं, ट्रेन के हर डिब्बे को ध्यान से देखतीं, और जब ट्रेन चली जाती, तो चुपचाप उठ कर चली जातीं।
क़रीब एक महीना तक मैंने देखा। फ़िर एक रविवार हिम्मत करके पूछ ही लिया, "अम्मा, आप किसका इंतजार करती हैं?"
उन्होंने मेरी तरफ देखा, मुस्कुराईं। बोलीं, "अपने बेटे का।"
"कब आएगा?"
"आना तो पिछले साल ही था। पर अभी तक आया नहीं।"
मैंने ज़्यादा नहीं पूछा। लगा शायद बेटा बाहर नौकरी करता होगा।
अगले रविवार फ़िर वही। इस बार मैंने चाय वाले से पूछा, "ये अम्मा हर बार आती हैं क्या?"
चाय वाला बोला, "भैया, पिछले 5 साल से। हर रविवार। इनका बेटा फौज में था। 5 साल पहले छुट्टी पर आ रहा था, इसी 4 बजे वाली ट्रेन से। पर ट्रेन का एक्सीडेंट हो गया था। लखनऊ के पास। बहुत लोग..."
मैं चुप हो गया।
अगले रविवार मैं जल्दी आ गया। अम्मा आईं। मैंने उनके लिए चाय मंगाई।
मैंने धीरे से कहा, "अम्मा, आप जानती हैं ना... वो ट्रेन..."
अम्मा ने मेरी बात काट दी। बोलीं, "जानती हूँ बेटा। सबने बताया कि वो नहीं रहा। फौज वालों ने उसकी टोपी और एक चिट्ठी भी दी थी। पर मैं नहीं मानती।"
"क्यों?"
"क्योंकि अग़र वो नहीं आएगा तो किसे पता चलेगा कि उसकी माँ ने उसके लिए क्या-क्या बनाया है? और अग़र मैं आना बंद कर दूंगी, तो उसे लगेगा कि माँ ने इंतजार करना छोड़ दिया। तो वो सच में नहीं आएगा।"
मेरी आँखें भर आईं। उस दिन ट्रेन आई, गई। अम्मा हर डिब्बे में झांकती रहीं। फ़िर पोटली से एक छोटा सा लड्डू निकाला और मुझे दिया, "ले बेटा, उसके लिए बनाए थे, तू खा ले।"
उसके बाद मैं हर रविवार अम्मा से पहले पहुंचने लगा। हम दोनों साथ बैठते। वो अपने बेटे की कहानियां सुनातीं, कैसे वो बचपन में ट्रेन की आवाज सुन कर भागता था, कैसे उसने कहा था - "माँ, जब भी आऊंगा, इसी 4 बजे वाली से आऊंगा, तू स्टेशन पर ही मिलना।"
एक रविवार अम्मा नहीं आईं।
मैंने सोचा तबीयत ख़राब होगी। अगले रविवार भी नहीं आईं।
मैंने चाय वाले से पूछा। उसने बताया, "अम्मा पिछले हफ्ते गुज़र गईं। बुखार था।"
मैं सुन्न हो गया।
उस रविवार 4 बजे वाली ट्रेन आई। मैंने देखा, प्लेटफार्म खाली था। अम्मा की बेंच खाली थी। ट्रेन चली गई।
तभी मुझे लगा, शायद कुछ लोग सच में लौटकर नहीं आते। पर कुछ लोग उनका इंतजार करना कभी बंद नहीं करते। और जब इंतजार करने वाले भी चले जाते हैं, तो वो जगह खाली हो जाती है, पर इंतजार वहीं रह जाता है।
अब मैं आज भी हर रविवार स्टेशन जाता हूँ। उसी बेंच पर बैठता हूँ। दो चाय मंगाता हूँ। एक अपने लिए, एक अम्मा के लिए।
क्योंकि किसी को तो वहां होना चाहिए, ताकि अग़र वो दोनों में से कोई भी लौटे, तो उसे लगे कि कोई इंतजार कर रहा था।
#अशोक_मसरूफ़
PIC Credit - Chatgpt
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Mujhe sapne dekhna
Pasand hai
Man pasand log
Waha Mila karte hai 🥀💖💖💖
#kamil🌹🌹
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🪔दीपों की रोशनी आपके जीवन से हर अंधेरे को दूर करे और सुख, शांति और समृद्धि लाए।🪔
आप सभी को सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🪔✨
#HappyDiwali2026
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एक आस, एक एहसास
मेरी सोच और बस तुम
एक सवाल, एक मजाल
तुम्हारा ख़्याल और बस तुम
एक रात, एक शाम
तुम्हारा नाम और बस तुम
एक दुआ, एक फरियाद
तुम्हारी याद और बस तुम 💞
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Kabhi duniya ki khair maangte hain, kabhi Aakhirat ki kamyabi… aur yeh dua dono khoobsurat tamannaon ko ek saath samet leti hai. 🤲❤️
Rabbana Atina Fid Dunya Hasanatan Wa Fil Aakhirati Hasanatan Wa Qina Azaaban Naar.
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#लफ़्ज़_दिल_से
#शुभ_दीपावली
कुछ हँसी के क़िस्से,
कुछ यादों का कारवाँ,
अपनों के संग रोशन रहे
ज़िंदगी का हर जहाँ!!
🪔🪔
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शिव करुणा के स्रोत हैं शिव से करियो प्रीत
शिव ही परम पुनीत है शिव साँचे मन मीत
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🫴🏻🕊️तुम जाओ कहीं,तुम्हें है इख़्तियार💔
हम जाएँ कहाँ,हमें तो है तुमसे प्यार❤️
वो चाहत,वो एहसास तेरा अब नहीं😔
दरमियाँ पहले-सी कोई बात नहीं🥀
तुम आज़ाद हो,मर्ज़ी तुम्हारी🕊️
मगर यादें रहेंगी हमारी💭
तुम्हें भूलना मेरे बस में नहीं,😢
तेरी यादें रूकेगी,मेरी साँसे थमने k b...d✍🏻💔
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फूलों से सीखा है मैंने—
हवाओं की बेरुखी सहना,
सूरज की तपीश में भी मुस्कुराना।
तूफ़ानों के थपेड़े को माथे पर लगाकर,
कोमलता और ख़ूबसूरती को बचाए रखना।
चाहे मन में अनगिनत ज़ख्म हों छिपे,
फिर भी जहाँ को अपनी महक से सराबोर करना।
कंटकों के बीच रहकर भी,
अपनी पहचान को अडिग और अमर रखना!
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तुम्हें देखने की चाहत आज भी उतनी ही है,
जितनी पहली मुलाकात में थी... ❤️
फर्क बस इतना है,
पहले तुम्हें देखकर मुस्कुराते थे,
अब तुम्हें सोचकर भी मुस्कुरा लेते हैं। 🥹✨
❤️🌹❤️🌹
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सब को सुनाई अपनी कहानी,
दर्दे दिल को बिखरना नहीं है।
जिस गली में न हो अपना कोई,
उस गली से मुझे गुजरना नहीं है।
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🪔🌙 शुभ धनतेरस की प्यारी रात आई है, चाँदनी संग लक्ष्मी जी की रोशनी लाई है!✨🪔
💰 माता लक्ष्मी और गणेश जी रखेंगे आपका ख्याल,मीठे सपनों में खो जाओ! 😴💫
🙏 इस #धनतेरस की रात आपके घर सुख-समृद्धि बरसे,हर दुख दूर हो और खुशियाँ मिलें! 🌸
🌟 अब सो जाओ आराम से,कल का दिन समृद्धि लाएगा🌙







































