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अभी तो हम शुरू हुए हैं , आने वाले समय में विपक्ष की चीखें निकल जाएगी
क्यूं @SupriyaShrinate आंटी
महिलाएं कह रही है यदि योगी सरकार जाती है तो बेड़ा गर्क हो जाएगा , पर वो जाने नहीं देंगे
अखिलेश पर नहीं है जनता को भरोसा
ईरान ने भारत से कहा था,
“आपने जो कर्ज पहले से ले रखा है, उसे बाद में चुका देना। लेकिन अब से जो पेट्रोल खरीदोगे, उसका भुगतान करना पड़ेगा। पैसे होंगे, तभी पेट्रोल मिलेगा। वरना पेट्रोल नहीं देंगे।”
पिछली सरकार के समय यह खबर अखबारों के पहले पन्ने पर छपी थी।
इसी तरह पाँच देशों ने भारत से कहा था कि अब उधार नहीं मिलेगा। इनमें कुवैत भी शामिल था। जो खाड़ी देश पाकिस्तान को उधार पर पेट्रोल देते थे, उन्होंने उस समय भारत से कहा था, “अब हम और उधार नहीं दे सकते। पैसे होंगे, तभी पेट्रोल मिलेगा।”
उस समय भारत पर इतना कर्ज चढ़ चुका था कि कई देशों से उधार लेकर कच्चा तेल खरीदना पड़ता था।
इसके अलावा, तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने तेल बॉन्ड जारी करके भी सरकार पर भारी वित्तीय बोझ डाल दिया था।
आज इन बातों को कोई याद नहीं करता, क्योंकि हम जल्दी भूल जाने वाले लोग हैं।
अब मुद्दे पर आते हैं।
तुर्की हो या भारत, रूस हो या यूक्रेन—किसी भी देश की जरूरतें केवल अपनी सीमाओं के भीतर पूरी नहीं होतीं। भारत रूस और खाड़ी देशों से कच्चा तेल खरीदता है। फिर उसे अपनी रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों में बदलता है और दुनिया के कई देशों को निर्यात करता है। 140 करोड़ की आबादी वाले अपने देश की घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ भारत तुर्की जैसे देशों को भी पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करता है, जो कई मुद्दों पर भारत के विरोध में खड़ा रहता है।
भारत यूक्रेन को भी पेट्रोलियम उत्पाद भेजता है। और तो और, जिस रूस से हम कच्चा तेल खरीदते हैं, उसी रूस को भी भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करता है। भारत अफ्रीकी देशों को भी पेट्रोलियम उत्पाद भेजता है और यूरोप के कई देशों तक इनकी आपूर्ति करता है। यानी जिस भारत को कभी कच्चा तेल खरीदने के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, आज वह दूसरे देशों को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की स्थिति में पहुँच चुका है।
दरअसल, कच्चे तेल के बाजार में सिर्फ तेल निकालने वाले देशों का ही दबदबा नहीं होता। तेल को रिफाइन करके उपयोगी उत्पादों में बदलने की क्षमता भी बहुत मायने रखती है। कच्चा तेल अपने आप में एक अलग उत्पाद है और उसे रिफाइन करके तैयार किया गया पेट्रोल, डीजल तथा अन्य उत्पाद अलग-अलग कीमतों पर बिकते हैं।
इसलिए जिन देशों के पास आधुनिक रिफाइनरियाँ हैं और जो बड़े पैमाने पर तेल को रिफाइन कर सकते हैं, उनकी भी वैश्विक तेल बाजार में अहम भूमिका होती है।
दुनिया में रूस, अमेरिका और खाड़ी क्षेत्र के देश कच्चे तेल के प्रमुख उत्पादकों में शामिल हैं। लेकिन इस पूरे कारोबार में रिफाइनिंग की क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत कच्चा तेल खरीदता है, उसे रिफाइन करता है, पेट्रोलियम उत्पाद तैयार करता है और फिर दुनिया के अलग-अलग देशों को निर्यात करता है। यह सच है कि भारत में कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन हमारी जरूरतों के मुकाबले कम है। लेकिन कच्चे तेल को रिफाइन करने की हमारी क्षमता बहुत बड़ी है। यही वजह है कि भारत पेट्रोलियम रिफाइनिंग के क्षेत्र में दुनिया की प्रमुख औद्योगिक शक्तियों में शामिल हो गया है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ी-बड़ी रिफाइनरियों और आधुनिक तकनीक से लैस तेल प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार हुआ है। आज भारत के पास विशाल रिफाइनिंग क्षमता है। इसी के दम पर हम श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से लेकर यूरोप के कई देशों तक पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं। भारत आज पेट्रोलियम उत्पादों के वैश्विक कारोबार में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करने वाले देशों में भारत भी शामिल है और इस कारोबार से देश को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा मिलती है।
आधुनिक तकनीक, विशाल रिफाइनरियों और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता का लाभ आज भारत को मिल रहा है।
रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इस क्षेत्र में अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बेल्जियम और चीन जैसे देश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कभी पेट्रोलियम की जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने वाला भारत आज दुनिया के प्रमुख पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक देशों में अपनी जगह बना चुका है।
भारत पड़ोसी देशों तक पाइपलाइन और परिवहन के दूसरे साधनों के जरिए भी ईंधन पहुँचाता है।
आज जब दुनिया के कई देश ईंधन की कमी और आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब एक सवाल उठना स्वाभाविक है— आखिर भारत ईंधन की अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ दूसरे देशों को उसका निर्यात कैसे कर पा रहा है?
यह सवाल दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियों के लिए भी दिलचस्प है
दलाल पत्रकार @abhisar_sharma के न्यूज पोर्टल को 86 करोड़ की विदेशी फंडिंग प्राप्त हुई है ।
तभी ये मोदी सरकार के खिलाफ इतना मौका है
पूरी खबर @grok बताएगा
हैलो @grok
भाजपा शासित राज्यों में पैट्रोल की कीमत कम है और कांग्रेस शासित राज्यों में ज्यादा है।
ये ज्यादा पैसा क्या गांधी खानदान के लिए एक्स्ट्रा फीस देनी पड़ती है कांग्रेस शासित राज्यों के लोगों को ?
जब से मुकेश अंबानी जी ने शायद इनके भैया को खरीद लिया है तब से समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं की पूरी भाषा बदल गई है 😃
कल तक ये कहते थे दो उद्योगपतियों ने देश को खरीद लिया 😜
अब सपा का प्रवक्ता मनोज काका यादव बोल रहा है "एक" उद्योगपति ने देश को खरीद लिया
@chitraaum ने तुरंत पकड़ लिया और बोला "अरे ओ मनोज कल तक तो तुम दो उद्योगपति बोलते थे अब आज एक ही उद्योगपति हो गए ? क्योंकि दूसरे उद्योगपति ने तुम्हारी राज्यसभा का टिकट ही खरीद लिया 😁
फिर ये व्यक्ति थेथरई करने लगा देखिए
ये दोगले कभी इस बात का जवाब नहीं देते कि मनमोहन सिंह ने हैदराबाद एयरपोर्ट और दिल्ली एयरपोर्ट GMR Group को क्यों दे दिया ?
क्योंकि GMR Group के मालिक कांग्रेस पार्टी का नेता थे 🙋
जो चोर है वो अखिलेश के साथ है , जो ईमानदार है वो योगी जी के साथ रहेगा।
यही कहना है उत्तर प्रदेश की जनता का , क्या आप सहमत हैं
आज नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित एक समारोह में भारत सरकार ने एक नई मशीन लॉन्च किया
ये चमचों और देशद्रोही लोगों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है
कांग्रेस को मोदी जाएगा के चक्कर में उलझाकर जम्मू-कश्मीर की अब्दुल्ला सरकार पर संकट के बादल खड़े कर दिए।
कांग्रेस समर्थित नेशनल कांफ्रेंस सरकार कभी भी गिर सकती है।
@grok बता एनसी के असंतुष्ट विधायकों की स्थिति
ये वीडियो तब का है, जब राहुल गांधी सत्ता में थे ..
गंगा जी की पूजा हो रही थी पत्रकार ने पूछा राहुल G क्या आप गंगा जी की पूजा करने आए हैं ..?
राहुल G ने लापरवाही से कहा पता नहीं इन लोगों ने बुलाया है, ये लोग जो-जो करने को कहा वह मैंने कर दिया मुझे नहीं पता यह पूजा है ..
आज सुबह वही राहुल G लिख रहा है सत्यम शिवम सुंदरम ..
10 साल और सत्ता से बाहर कर दो यह नागा साधु बनकर पूरे भारत में घूमेगा ..







