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एक कवि हृदय वाला व्यक्तित्व! प्रकृति प्रेमी! भक्ति संगीत में श्रद्धा! राष्ट्र प्रेमी| सर्व धर्म सम भाव में विश्वास! #राज_की_बातें मेरे ट्वीट लाइक्स में है|

Bengaluru, India
Joined June 2011
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सिक्कों की खनक के आगे ईमान कहाँ टिकता है, चंद टुकड़ों की ख़ातिर देखो इंसान यहाँ बिकता है..! #राज_की_बातें
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सफ़र जिंदगी का अनवरत चलता जा रहा है, रात प्रभात का क्रम नित्य चलता आ रहा है, लक्ष्य मंजिल तय हैं जिनके सफ़र तो बस उनका हैं, लक्ष्यविहीन तो हाथ अपना मलता जा रहा है। -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good morning
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हुआ विश्राम रात का पूरा समय प्रभात का आया है, उठ जाग और देख भोर हुई गीत कोयल ने सुनाया है। कब जागी है उनकी किस्मत जो सोते ही रहते हैं , समय संग चलने वालों ने मुकाम मनचाहा पाया है। -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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आदित्य की आहट से सुबह हुई अब गगन, विहग भी पर खोल रहे नभ में मन मगन। मंजिल की प्रशस्त राह आवाज दे रही है, कर्म पथ पर बढ़ जा आगे दिखा दे अपनी लगन..! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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दसों दिशाएँ चहक गई एक सूरज के आने से, कानों में मधुरस घुल रहा एक कोयल के गाने से। संभावनाएं भरी पड़ी हैं पुरुषार्थ भरे कदमों में, मत वंचित रह जाना तुम मनचाहा फल पाने से..! -जैन राजेंद्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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उदीयमान सूरज करे नव आशा संचार, सुबह हुई, होने लगा दैनिक कार्य विस्तार, सबके अंदर भरा पड़ा है क्षमता का भंडार, आगे बढ़ कर निभा ले तू भी अपना वो किरदार.! -जैन राजेंद्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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सुबह जगी और दुनिया लगी देखो दुनियादारी में, तल्लीन सब होने लगे मेहनत और रोज़गारी में, जो जीता ग़ैरो के सहारे वो जीते जी मरता है, जीना उसका जीना यारों जो जीता ख़ुद्दारी में.! -जैन राजेंद्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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दृश्य विहंगम हो उठते हैं जब भोर का उजास मंडराता है, नभ मंडल से रश्मियों का जादू चारों तरफ बिखराता है, धरा का हर एक कोना-कोना मानो धुला-सा लगता है, प्रकृति का यह सुंदर नजारा देखकर मन इतराता है.! -जैन राजेंद्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Morning
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सुबह यूँही बेवजह नहीं होती मक़सद है जग को जगाना, भागते जा रहे वक्त के संग-संग अब सबको हैं भगाना, निशा है एक जाल फरेब का बस निद्रा में उलझाता है, ख़्वाबों के मत झाँसे में आना मत उनसे दिल को लगाना.! -जैन राजेंद्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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सुबह खिलाती हैं फूलों को सुबह भुलाती हैं भूलों को, कदमों में न चुभ जाए, इसलिए सुबह दिखाती हैं शूलों को.! -जैन राजेंद्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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प्रतिपल बह रही है समय की अविरल धारा, रात बीती हुआ सवेरा पसर गया उजियारा। जो खोया हुआ है सपनों में वो अटका पड़ा मझधारा, संग समय के जो भी चला है उसको मिला है किनारा..! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘ राज ‘ Jain Rajendra Gulechha 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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हुआ शुरू सूरज का फेरा वसुधा पर जागा सवेरा, टूट चुका है तम का घेरा अब उजालों में बसेरा, नीड छोड़ उड़ चले हैं पंछी नाप रहे है नभ की सीमा, आइए हम भी कदम बढ़ायें मिटा कर मन का अंधेरा..! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌸सुप्रभात 🙏🏽जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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जगमग करती उज्ज्वल प्रभा भोर उषा की लाली है, मंद मंद बह रही समीर लगे अलबेली मतवाली है। प्रहर रात्रि के सिमटकर सारे लुप्त हो गए हैं, अब सुवर्ण किरणें दिनकर की सुमंगल करने वाली हैं.! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏🏽जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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बात जब सुबह की होती है तब जिक्र होता है रवि का, बात जब कविता की होती है तब जिक्र होता है कवि का। खूबसूरती के दृश्य यूँ तो भरे पड़े है सृष्टि में,पर बात सुंदरता की होती हैं तब जिक्र होता है उषा की छवि का.! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ बेंगलूरु 🌺सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र
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नवप्रभात ले आयी संग जैनों का पर्व पर्यूषण, तप जप से अब दूर करे आत्मा के सारे दूषण, द्वेष वैर मिटाकर सबको आओ बनाए मित्र, क्षमा वीरता का सूचक है क्षमा वीरों का भूषण.! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌸सुप्रभात 🙏जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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रविवार के रवि भी कहाँ करते हैं आराम, समय पर दिन उगाना इनका ही है काम। दिन समझ कर छुट्टी का जग सारा सोया पड़ा है, आलस निंद्रा में नहीं लेता वह उठने का नाम.! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ Jain Rajendra Gulechha 🌻सुप्रभात 🙏जय जिनेन्द्र 🌞Good morning
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कभी कभी अपने भीतर भी रम जाया करों, शक्तियाँ मिलेगी अपार नम जया करों, इच्छाएँ ही दुःख का मूल कारण हैं, मन को ये बात हमेशा समझाया करों.! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏🏽जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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अपने अंतर्मन के पथ को शुद्ध भावों से सजा दीजिए, सद्विचारों की मधुर धुन को मन में बजा लीजिए। सुबह हुई प्रस्तुत लेकर सुंदर दृश्यों का खजाना, दर्शन कर प्रभु के पहले फिर प्रभात का मजा लीजिए.! -जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’ 🌺सुप्रभात 🙏🏽जय जिनेंद्र 🌞Good Morning
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