अनंत अंबानीने ऐसा क्या कह दिया कि Jio IPO Listing पर मुकेश अंबानी की आंखों में आंसू क्यों आ गए?
आज Jio Platforms की ऐतिहासिक IPO listing हुई. इसके साथ ही 21.36% premium और Jio का market cap करीब ₹12.5 लाख करोड़ पहुंच गया.
लेकिन इस पूरे समारोह में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पल वो था, जब मुकेश अंबानी भावुक हो गए.
क्योंकि मंच पर सिर्फ Jio की कामयाबी की बात नहीं हो रही थी…
अनंत अंबानी ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी के सफर को याद किया. .... 1/2
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अनंत ने Jio को लेकर “Jio mere laal” और अपनी दादी के आशीर्वाद “Jug Jug Jio” का जिक्र किया.
एक पिता के लिए शायद इससे ज्यादा भावुक पल क्या होगा?
जिस बेटे ने अपने पिता की जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक को मंच पर याद किया हो… और साथ में पूरे परिवार की विरासत का जिक्र किया हो।
मुकेश अंबानी सिर्फ एक IPO की सफलता पर नहीं रो रहे थे..
कभी-कभी अरबों-खरबों रुपये भी इंसान को उतना भावुक नहीं करते…
जितना अपने बच्चों के मुंह से अपनी पूरी जिंदगी की कहानी सुनना कर देता है.
आज Jio की listing सिर्फ एक business event नहीं थी…
ये एक परिवार की दो पीढ़ियों के सपने के सामने तीसरी पीढ़ी के खड़े होने का पल था.
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न्यूटन भी सोच में पर गया...
ध्यान से देखिए इस चमत्कार को
ये कैसे संभव है इतनी छोटी
जगह से बिस्किट निकालना
@grok ये कैसे possible है?
कैंसर का इलाज महंगा है… या मरीज की मजबूरी को ही कमाई का जरिया बना दिया गया है?
सुप्रीम कोर्ट में सुनाया गया एक ऐसा मामला, जिसे सुनकर हर मरीज और उसके परिवार को सवाल जरूर पूछना चाहिए.
एक मेडिकल डिस्ट्रीब्यूटर की पत्नी का एक बड़े निजी अस्पताल में कैंसर का इलाज चल रहा था।
उस डीलर ने अस्पताल से कहा
“सर, मैं खुद इस दवा का डीलर हूं। मुझे कीमोथेरेपी का यह इंजेक्शन ₹11,000 में मिलता है।”
लेकिन अस्पताल ने बाहर से लाए गए इंजेक्शन को लगाने से इनकार कर दिया।
और उसी इंजेक्शन के लिए मरीज से ₹1,30,000 लिए गए... 1/2 👇
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यानी ₹11,000 से ₹1.30 लाख!
सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया—
“इस लूट का कोई औचित्य बता सकते हैं? इतना अंतर क्यों है? आखिर यह पैसा जाता कहां है?”
अदालत ने यह भी सवाल किया कि जब सामने मरीज की जिंदगी का सवाल हो, तो क्या अस्पताल दवाओं पर इतना भारी markup लगाकर अपना खर्च चलाएं?
निजी अस्पतालों की तरफ से infrastructure, 24×7 facilities और बाहर से लाई गई दवाओं की authenticity जैसी दलीलें दी गईं। लेकिन कोर्ट ने सवाल उठाया कि इन खर्चों की भरपाई के लिए दवाओं पर 100–200 गुना तक कीमत बढ़ाना कैसे उचित हो सकता है।
और सबसे डरावनी बात यही है—
जिस मरीज के पास bargain करने का समय नहीं है, क्योंकि सामने जिंदगी और मौत का सवाल है… क्या उसी मजबूरी को सबसे बड़ा business model बना देना चाहिए?
सवाल सिर्फ ₹11,000 और ₹1,30,000 का नहीं है।
सवाल है—इलाज एक सेवा है या मजबूरी से कमाई करने का कारोबार?
ट्रेन में आपका सामान चोरी हो गया? तो हर बार रेलवे यह नहीं कह सकती कि “अपना सामान खुद संभालिए.” ⚠️
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है.
Reserved Coach में unauthorized लोगों को घुसने से रोकना रेलवे की जिम्मेदारी है.
अगर रेलवे की लापरवाही के कारण ऐसे लोगों का प्रवेश होता है और यात्री का सामान चोरी हो जाता है, तो रेलवे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती.
इसी आधार पर आयोग ने Northern Railway की appeal खारिज कर दी.
एक यात्री के करीब ₹1.20 लाख के चोरी हुए...
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सामान की कीमत ब्याज सहित लौटाने और मानसिक परेशानी के लिए ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा गया.
आयोग की बेंच ने साफ कहा कि Reserved Coach में unauthorized लोगों के प्रवेश को रोकने में नाकामी “सेवा में कमी” और रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही को दर्शाती है.
मतलब अगली बार कोई कहे
“भाई, ट्रेन में सामान चोरी हुआ है तो इसमें रेलवे क्या कर सकती है?”
तो जवाब हैं
अगर चोरी रेलवे की लापरवाही से हुई है, तो रेलवे को जवाब देना पड़ेगा.
यह फैसला सिर्फ एक यात्री के ₹1.20 लाख का नहीं है…
यह हर Reserved Coach में सफर करने वाले यात्री के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है.
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जंगल किसी पर भी रहम नहीं करता, उसके नियम हर एक के लिए एक समान है..
ना कोई वीआईपी ट्रीटमेंट और ना कोई पक्षपात.
सोचा था कि तम्बू में तो सुरक्षित रहेंगे, लेकिन तभी जो हुआ वो बड़ा ही अप्रत्याशित और प्राण घातक..
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माननीय प्रधानमंत्री जी एवं संबंधित मंत्रालय (MeitY) को अनुरोध पत्र
विषय: RMG प्रतिबंध के बाद अवैध विदेशी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती व वास्तविक उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा हेतु अनुरोध
माननीय महोदय,
भारत सरकार द्वारा पारित Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 के तहत रियल मनी गेमिंग (RMG) पर प्रतिबंध लगाया गया, जिसका उद्देश्य नागरिकों को वित्तीय नुकसान और धोखाधड़ी से बचाना था। यह उद्देश्य सराहनीय है, परंतु प्रतिबंध लागू होने के बाद जमीनी स्थिति चिंताजनक है:
देश की वैध और नियमित (KYC, TDS, शिकायत निवारण युक्त) गेमिंग कंपनियाँ पूरी तरह बंद हो गई हैं, जिससे हज़ारों नौकरियाँ और निवेश समाप्त हो गए।
इसके विपरीत, come fantasywala, dafabet free2play ,web11, fantasy adda ,hero11 जैसे अवैध विदेशी प्लेटफॉर्म आज भी भारतीय उपयोगकर्ताओं को सेवा दे रहे हैं — बिना किसी KYC, बिना कर, और बिना भारतीय क्षेत्राधिकार के।
नतीजा यह हुआ कि आम उपयोगकर्ता वैध विकल्पों की जगह इन अनियंत्रित, असुरक्षित प्लेटफॉर्म्स की ओर मुड़ गए हैं — जो असल में सरकार के उद्देश्य के विपरीत है।
वहीं कई सामान्य उपयोगकर्ताओं के बैंक खाते "गेमिंग लिंक्ड ट्रांजैक्शन" के नाम पर गलत तरीके से फ्रीज़ हो रहे हैं, जबकि वास्तविक अवैध ऑपरेटर कानून के दायरे से बाहर बने हुए हैं।
हमारा विनम्र अनुरोध है कि सरकार:
अवैध विदेशी गेमिंग/बेटिंग प्लेटफॉर्म्स को ISP स्तर पर सख्ती से ब्लॉक करे, जिस तेज़ी से वैध भारतीय कंपनियों पर कार्रवाई हुई, उसी तेज़ी से।
गलत तरीके से फ्रीज़ हुए उपयोगकर्ताओं के खातों और धनराशि की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
कौशल-आधारित खेलों (skill-based games) को प्रतिबंधित करने के बजाय विनियमित (regulate) करने पर पुनर्विचार करे, ताकि वैध, पारदर्शी और जवाबदेह उद्योग बना रहे।
आम उपयोगकर्ताओं को कानूनी अस्पष्टता से बचाने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।
प्रतिबंध का उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा है, न कि उन्हें अनियंत्रित विदेशी प्लेटफॉर्म्स के हवाले करना। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस विसंगति पर ध्यान दिया जाए।
सधन्यवाद,
एक नागरिक
@narendramodi @GoI_MeitY @AshwiniVaishnaw @BCCI @FIFS_Official
@ianuragthakur @nsitharamanoffc @PMOIndia @cricketworldcup @cricket
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Phoenix Mall में अमीर बनने का नाटक भारी पड़ गया
एक चश्मे की वजह से
मेरी इज्जत का कचरा हो गया
पॉकेट में ₹10000 थे और बिल आ गया ₹17,000 का
Versace के शोरूम में जो तमाशा हुआ,
उसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे...1/2
दुनिया के टॉप Gamers में शामिल इस खिलाड़ी का Secret आखिरकार उसके दोस्त ने खोल दिया… और सुनकर आप भी Shock हो जाओगे.
लोग समझते हैं कि इतना Successful Gamer बनने के लिए घंटों Mobile पर चिपके रहना पड़ता है…
लेकिन इसका असली Formula कुछ और ही निकला.
Game खेलते वक्त दिमाग भी ठंडा… और Mobile भी ठंडा.
“भाई ये इंसान है या Refrigerator?”
आज का भारत–न्यूज़ीलैंड T20 मैच सभी को भारत की जबरदस्त बल्लेबाज़ी और अभिषेक शर्मा के तूफानी शतक के लिए याद रहेगा.
लेकिन इस मैच में एक ऐसा पल भी देखने को मिला, जो इतिहास में दर्ज होते-होते रह गया.
वह था अभिषेक शर्मा के लगाए एक छक्के पर Glenn Phillips का Superman की तरह छलांग लगाकर कैच पकड़ने का प्रयास.
ऐसी छलांग क्रिकेट इतिहास में शायद ही कभी देखने को मिली हो. उस समय अभिषेक 109 रन पर खेल रहे थे.
जिस तरह से Phillips ने हवा में छलांग लगाई, वह वाकई अविश्वसनीय और अद्भुत था.
भले ही वह कैच पूरा नहीं हो पाया, लेकिन Phillips ने fielding में एक नया benchmark जरूर स्थापित कर दिया है.
उनकी इस शानदार कोशिश को जितनी दाद दी जाए, कम है.
Abhishek Sharma did that pose so he can post that on his insta after the game and aura farm 🔥
#INDvsNZ
Shah Rukh Khan का अब तक का सबसे WORST look
‘King’ का poster आया और उम्मीद थी कि SRK का ऐसा look देखने को मिलेगा जो पहले कभी नहीं देखा…
लेकिन poster देखने के बाद पहला reaction है
“ये क्या बावसीर बनाया है?”
Dark background, bruised face, gun, familiar ये look इतना familiar क्यों लग रहा है?
सोशल मीडिया पर लोग इसकी तुलना Dhurandhar के posters और उसकी पूरी visual aesthetic से कर रहे हैं. और similarity साफ दिखाई देती है.
और यही सबसे बड़ा सवाल है—
जब आपके पास Shah Rukh Khan जैसा superstar हो, तो उसकी फिल्म का poster किसी दूसरी फिल्म की copy क्यों ?
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SRK को एक ऐसा ICONIC King look चाहिए था जिसे देखकर लोग कहें—
“ये सिर्फ Shah Rukh Khan कर सकता है।”
लेकिन फिलहाल reaction कुछ ऐसा है—
“Dhurandhar जैसा क्यों लग रहा है?” 👀
Copy है? Inspiration है? या सिर्फ coincidence?
ये फैसला audience करे।
लेकिन एक बात तय है—
King को किसी और फिल्म की visual identity के पीछे चलने की जरूरत नहीं थी। उसे अपनी खुद की identity बनाने की जरूरत थी।
"इसे इसकी सही position पे खिलाओ" -
R अश्विन
पहले T20I में भारत ने 226 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए Sanju Samson और Abhishek Sharma ने 93 रनों की opening partnership की Sanju ने 33 गेंदों पर 67 रनों की शानदार पारी खेली इसलिए टीम मैनेजमेंट ने इन दोनों की opening जोड़ी को बरकरार रखा.
लेकिन Ishan Kishan के groin/adductor injury के कारण दूसरे मैच में Vaibhav Sooryavanshi को टीम में शामिल किया गया. मगर उन्हें उसकी सामान्य opening position के बजाय No. 3 पर भेजा गया.
और नतीजा?
Vaibhav — 8 गेंदों पर सिर्फ 4 रन.
वह छठे ओवर में बल्लेबाजी करने आया और Ashwin के मुताबिक वह उस परिस्थिति में बिल्कुल comfortable नजर नहीं आए. उसने Vaibhav की स्थिति को “fish out of water” बताया।
Sanju को No. 3 पर क्यों भेजना चाहिए? .. 1/2 👇
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क्योंकि Vaibhav की असली ताकत opening में है.
Vaibhav मूल रूप से एक top-order attacking batter हैं।
सिर्फ टीम में जगह देने के लिए Vaibhav की batting position नहीं बदलनी चाहिए.
अगर उसे खिलाना है, तो उसे उसी position पर खिलाइए जहां उसका natural game सबसे अच्छी तरह सामने आता है.
No. 3 पर आने की स्थिति Vaibhav के लिए अलग है
Opening में Vaibhav को पता होता है—
शुरुआत से ही attack करना है।
लेकिन दूसरे T20 में वह छठे ओवर में बल्लेबाजी करने आए। Ashwin को लगा कि यह Vaibhav के लिए उनका natural entry point नहीं है.
Vaibhav लगातार बड़े shots खेलने की कोशिश कर रहे था, लेकिन उनकी timing नहीं आ रही थी.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Sanju Samson पहले भी No. 3 पर खेल चुके हैं. इसलिए Sanju की batting position बदलना, Vaibhav को उनकी natural position से हटाने की तुलना में कम disruptive है.
एक interesting contradiction भी है
इससे पहले Ashwin खुद कह चुके थे कि Vaibhav को जल्दबाजी में India XI में शामिल नहीं करना चाहिए.
Ireland series के दौरान उन्होंने Sanju–Abhishek की World Cup-winning opening pair को बरकरार रखने के टीम मैनेजमेंट के फैसले का समर्थन किया था.
लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं.
Ishan injured → Vaibhav को मौका मिला → लेकिन No. 3.
Olise at No. 9? That’s not underrated… that’s outrageous.
Honestly, I swear Michael Olise has been one of the most underrated players in this year’s Ballon d’Or race.
Personally, I’d have him 2nd.
But even if you don’t rate him that highly, outside the Top 5? Come on.
And this isn’t the first time we’ve seen it... 1/2 👇

















