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IDBI बैंक अपने ही पैसे से खुद को बेचेगा।
इशर देश वोट चोरी में उलझा है, उधर एक और बैंक लुट गया
लगातार फायदे में चलने वाला IDBI बैंक एक विदेशी कंपनी Fairfax को 52,878 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।
मजे की बात तो यह है कि Fairfax कंपनी IDBI बैंक के पैसे ही IDBI को खरीदेगी।
ऐसा कहां होता है कि आप कुछ खरीदने गए तो दुकान वाला पहले आपसे कुछ खरीदे, फिर उसी पैसे से आप वह खरीदें जो लेने गए हैं?
अपने बिकने का आधे से ज़्यादा पैसा खुद IDBI बैंक देगा। सौदा ये हुआ है कि IDBI बैंक Fairfax ग्रुप की कंपनियों में उसकी हिस्सेदारियाँ खरीद लेगा। जो कंपनी बैंक को खरीद रही है, वह बैंक को अपनी हिस्सेदारी बेच रही है।
दूसरा घोटाला ये है कि इस विदेशी कंपनी में कई ऐसे लोग ऊंचे पदों पर हैं जो यहां सरकार में भी ऊंचे पदों पर रहे हैं। इससे शक होता है कि यह कोई विनिवेश नहीं, बल्कि संगठित लूट है।
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आईडीबीआई बैंक के पैसे से ही आईडीबीआई बैंक को सरकार से विदेशी कंपनी खरीद रही है।
यह मोदी सरकार का एक और बड़ा घोटाला है, जिसकी जांच चाहिए।
हमारी मांग है कि
1. आईडीबीआई बैंक को विदेशी कंपनी को बेचने की प्रक्रिया को रोका जाए।
2. ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) से इस पूरी प्रक्रिया की और घोटाले की जांच हो।
3. दोनों वैल्युएशन रिपोर्ट जारी की जाएं।
इस घोटाले को लेकर आज मेरे सहयोगी पूर्व सांसद श्री शक्ति सिंह गोहिल जी ने कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता की :-
youtube.com/live/DK8JX2LMwE0…
IDBI की स्थापना 1 जुलाई 1964 को हुई थी। इसकी परिकल्पना तत्कालीन वित्त मंत्री टी. टी. कृष्णमाचारी (TTK) ने की थी। निजी क्षेत्र को वित्तीय सहायता देने और भारत के औद्योगिक विकास को गति देने में IDBI की ऐतिहासिक भूमिका रही है। इसके साथ-साथ IDBI ने SIDBI, EXIM Bank, NSE, SEBI और NSDL जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं के निर्माण में भी अहम योगदान दिया।
ऐसी ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले संस्थान, जो पिछले वित्तीय वर्ष में करीब दस हज़ार करोड़ मुनाफ़े में था, को कनाडा की कंपनी Fairfax को बेचने का औचित्य क्या है?
पिछले कुछ दिनों में इस मामले पर Businessworld ने पड़ताल करके बड़े खुलासे किए हैं जो मोदी सरकार के इस निर्णय पर गंभीर सवाल खड़ा करते हैं। LIC के स्वतंत्र निदेशक गुरुमूर्ति महालिंगम सात महीने तक LIC और Fairfax नियंत्रित Thomas Cook India, दोनों के बोर्ड में रहे। इस दौरान LIC ने IDBI में अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और Fairfax बैंक के लिए बोली लगाने वालों में शामिल थी। महालिंगम LIC की Investment Committee के सदस्य भी थे। यह हितों के टकराव की गंभीर आशंका का मामला है।
सरकार ने गोलमोल सफ़ाई देने की कोशिश की है, पर यह सफाई महालिंगम की दोहरी भूमिका, हितों के टकराव और IDBI कर्मचारियों के भविष्य पर उठे सवालों का जवाब नहीं देती। न ही यह बताती है कि मुनाफ़े में लौट चुके एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को बेचने की आख़िर जल्दबाज़ी ही क्या है।
सवाल सिर्फ IDBI का नहीं है। सवाल यह है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में होने वाले हर बड़े सरकारी सौदे पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल क्यों उठते हैं?
बड़े सरकारी सौदों में निर्णय कौन ले रहा है? किसके हित सुरक्षित रखे जा रहे हैं? क्या नियामकों और सार्वजनिक संस्थानों की स्वतंत्रता बरकरार है? क्या संभावित हितों के टकराव की जांच होती है? क्या मूल्यांकन, सलाहकारों की नियुक्ति और फैसलों की प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होता है या नहीं? और सबसे अहम: क्या संसद को केवल फैसले सुना दिए जाते हैं, या सरकार उसके प्रति अपनी जवाबदेही भी स्वीकार करती है?
मोदी सरकार को तीन सीधे सवालों का जवाब देना चाहिए:
1. IDBI के शेयर की न्यूनतम कीमत पहले ₹94.42 तय की गई थी। फिर इसे घटाकर ₹75.99 क्यों किया गया? सरकार के अपने तय न्यूनतम मूल्य से करीब ₹8,800 करोड़ कम में बैंक बेचने की नौबत क्यों आई? यह किसके कहने पर और क्यों हुआ?
2. Fairfax की बोली खुलने वाले दिन ही न्यूनतम कीमत क्यों और किन नियमों के तहत बदली गई? नई कीमत तय करने वालों को क्या पहले से पता था कि Fairfax ने कितनी बोली लगाई है?
3. जब LIC Fairfax को IDBI में अपनी हिस्सेदारी बेच रही थी, तब LIC का एक निदेशक Fairfax की ही एक कम्पनी के बोर्ड में भी बैठा था। क्या यह हितों का सीधा टकराव नहीं है? और IDBI की बिक्री प्रक्रिया शुरू होने के बाद Fairfax समूह की कम्पनियों में दस पूर्व सरकारी और नियामक अधिकारियों की नियुक्ति क्यों हुई? क्या इन नियुक्तियों की जांच हुई और किसने की?
न्याय होना ही नहीं चाहिए, होते हुए दिखना भी चाहिए। लेकिन जब गंभीर सवालों के जवाब न मिलें, हितों के टकराव की स्वतंत्र जांच न दिखे और फैसलों की प्रक्रिया पारदर्शी न हो, तो निष्पक्षता कहां है?
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Mr Modi, stop lying to this nation.
You became PM because of foreign help. You remain PM because of foreign help.
Your financial system is fully controlled and supported by foreigners. Foreign social media fully backs you.
I challenge you to an open debate about this. Any stage, any time. Come if you have the guts.
You won't dare, because you are terrified of what I know about you.
मोदी जी, इस देश से झूठ बोलना बंद कीजिए।
आप विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने। और विदेशी मदद से ही प्रधानमंत्री बने हुए हैं।
आपकी आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह विदेशियों के नियंत्रण में और समर्थन से है। विदेशी सोशल मीडिया पूरी तरह आपके साथ खड़ा है।
मैं आपको इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच, किसी भी समय। हिम्मत है तो आइए।
आप नहीं आएंगे, क्योंकि जो मैं आपके बारे में जानता हूं आप उससे डरते हैं।
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अख़बार में ख़बर है कि चार सरकारी अस्पताल निजी हाथों में सौंपे जाएँगे. क्या ऐसा करने से हिंदू खतरे से बाहर आ जाएगा? अखंड भारत के निर्माण के लिए अस्पतालों का निजीकरण क्यों जरूरी है?
अगर ये सरकार अस्पताल नहीं चला पा रही है तो फिर ये देश कैसे चल रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि ये देश भी निजी हाथों में सौंपा जा चुका है और हमें पता ही नहीं है? सरकार चलाने वाले निजी हाथ आख़िर किसके हैं?
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Plea regarding extremely high airfares mentioned before #SupremeCourt
Counsel: The airfares have increased to 700%. It is an essential service. Violation of Article 14.
J Vikram Nath: Don't travel by air. Next case.
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Counsel mentions a PIL concerning a 700% increase in airfares.
Justice Vikram Nath: Don’t travel by air.
Counsel: It is an essential service. This is a violation of Article 14.
Justice Vikram Nath: Alright, don’t travel. Next case.
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बीजेपी के चमत्कार अपरंपार हैं!
जो 4 एम्बुलेंस महीनों से एक ही जगह खड़ी थीं, वे ₹50 लाख का डीज़ल पी गईं। वो भी ऐसे वक्त में, जब वेस्ट एशिया में युद्ध के कारण फ्यूल क्राइसिस चल रहा है और देश में डीज़ल-पेट्रोल की कीमतों ने पहले ही हाहाकार मचा रखा है।
वाह मोदी बाबा, वाह! भ्रष्टाचार करना कोई आपसे सीखे! 😂
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आंध्र प्रदेश में केंचुआ स्थानीय चुनाव निष्पक्ष करवा रहा है
निष्पक्षता की एक झलक देख लीजिए 👇
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10,000 करोड़ के नुकसान की पहली तस्वीरें...
VIDEO | Delhi: Chamber of Trade and Industry chairman Brijesh Goyal says the Delhi traders' body estimates losses of over Rs 10,000 crore to businesses due to the Ramlila Maidan rally.
(Full video available on PTI Videos - ptivideos.com)
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हमने रैली में आने वालों से यहां शॉपिंग करने की अपील की थी, जिससे दुकानदारों का फायदा हो सके
लेकिन कनॉट प्लेस आते पता चला कि BJP ने जबरदस्ती सारी दुकानें बंद करवा दी हैं
BJP दुकानदारों का नुकसान क्यों कर रही है?
@RahulGandhi
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मोदी-शाह ने जिस तरह से जनता का वोट छीनने की कोशिश की, आज हम उसके खिलाफ यहाँ एकजुट हुए हैं।
ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा।
📍रामलीला मैदान, दिल्ली
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'मोदी कहीं नहीं जा सकते' - अगर वो जाना भी चाहें, तो हम उन्हें जाने नहीं देंगे
क्योंकि नरेंद्र मोदी ने 'वोट चोरी की' है, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और देश को न्याय मिलेगा
@RahulGandhi 🔥🔥🔥
📍 रामलीला मैदान, दिल्ली
'मोदी कहीं नहीं जा सकते' - अगर वो जाना भी चाहें, तो हम उन्हें जाने नहीं देंगे।
क्योंकि नरेंद्र मोदी ने 'वोट चोरी की' है, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और देश को न्याय मिलेगा।
: INDIA गठबंधन की महारैली में नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 रामलीला मैदान, दिल्ली
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इस देश में कई साल से 'वोट चोरी' हो रही है। पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक और 2024 का लोकसभा चुनाव - इन सारे चुनावों में 'वोट चोरी' हुई है। 2024 चुनाव के बाद 13.5 करोड़ वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। यह कुल वोटर्स का 15% है। हर 7 में से 1 वोटर को वोटर लिस्ट से निकाल दिया गया। लोकसभा चुनाव में NDA और हमारे बीच में 3% का फर्क था और अब वोटर लिस्ट से 15% वोटर निकाल दिए गए। इसका मतलब है कि 2024 का चुनाव illegal था।
~ राहुल गांधी जी, नेता विपक्ष
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2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सिर्फ
3 % वोटों का अंतर था।उसके बाद 15% वोट काट दिए गए।आज तक जो मैंने कहा है वो सच होता है।ज्ञानेश कुमार पद से हटेगा,ज्ञानेश कुमार जेल जाएगा - राहुल गांधी
























