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अब तक..
रिसोर्सेस की कमी में हम ने चुनाव भर पागलों की तरह काम किया...आर्थिक संसाधनों की कमी थी तो दोस्तों के सहारे-कभी किसी सस्ते होटल में रुके, मोटरसाइकिल से सैकड़ों किलोमीटर - गांव-गांव तपती गर्मी में घूमे...ग्राउंड रिपोर्ट्स की..फिर तय किया कि लौटेंगे तो कुछ रणनीति बनाएंगे और आगे काम करेंगे..
फिर..
चुनाव नतीजे आए, हम थके थे, बीमार थे..और ब्रेक ज़रूरी था कि आगे की रणनीति पर काम हो और कुछ आराम हो..सेहत ठीक हो और किसी तरह से संसाधनों की कमी में कुछ बेहतरी हो..
आगे क्या..
अब सेहत लौटी है, आराम लिया है..काफी कुछ सोचा है..आगे काम करेंगे, ये तो तय है कि लेकिन संसाधनों के अभाव कैसे काम होगा नहीं पता..पर काम करेंगे...आप सबका साथ चाहिए होगा..हर तरह से..
तो फिर?
चैनल जिन्होंने सब्सक्राइब न किया हो, कर लें...
वेबसाइट भी जल्दी ही आएगी..जहां आप सब के लिए लिखने का स्कोप होना चाहिए...
साथ ही, आप में से कोई अगर किसी तरह की ग्राउंड रिपोर्ट, मुद्दा सजेस्ट करना चाहता है या ख़ुद भी कर के भेजना चाहता है तो हमको [email protected] और [email protected] पर आईडिया-स्टोरी का सारांश भेजें...
आप अगर हमारे लिए वीडियोज़ करना चाहते हैं तो स्क्रिप्ट के साथ वीडियो का सैंपल भेजें..हम आपको अभी कोई आर्थिक मानदेय नहीं दे सकते हैं लेकिन रेवेन्यू आना शुरू होते ही आपके हर पब्लिश्ड वीडियो के रेवेन्यू का कम से कम 50 फ़ीसदी आपको देने का इरादा रखते हैं...
क्या हम आगे काम करते रह पाएंगे?
यह इस पर निर्भर करेगा कि हमको आप सबका कितना साथ मिलेगा। हमको न केवल आर्थिक-सामाजिक संसाधन चाहिए बल्कि हमारी रीच भी बढ़नी चाहिए, जिससे कि हम आने वाले समय में रेवेन्यू मॉडल विकसित कर सकें और पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सकें।
इसके लिए..
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और
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हम ये क्यों साझा कर रहे हैं?
सामाजिक और न्याय की लड़ाई का पुराना-अर्वाचीन और बुनियादी उसूल है कि समाज की लड़ाई में लड़ने वालों के जीवन का ध्यान समाज रखता है। हम सब ये लगातार देखते और करते रहे हैं..हम लगातार ख़तरे उठाकर, गांव-गांव, बस्ती-बस्ती घूम कर, बिना डरे अपना काम करते रहेंगे..ईमानदार पत्रकारिता और वो कंटेंट बनाते रहेंगे, जिस पर और काम बहुत कम या न के बराबर हो रहा है...इसके बदले हमको आप से सहयोग और साथ चाहिए क्योंकि लड़ाई लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों पर ख़त्म नहीं हुई है...वहां से शुरू हुई है..ये साथ आपकी ओर से सोशल इनवेस्टमेंट है...हम ने इस बार बड़ी जीत हासिल की है पर ये सिर्फ पहली लड़ाई में जीत है..अभी हमको भारत को सबके लिए, सबका और संवैधानिक सपनों को वेलफेयर स्टेट बनाना है...
आप हमारा साथ देंगे न?
आप मुझे और @Kashish__singh_ को DM भी कर सकते हैं, हम जल्दी से जल्दी आपको उत्तर देंगे...
डरो मत! बोलो @RahulGandhi @INCIndia
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मयंक Mayank میانک retweeted
"Mr Sinha" celebrated the looting & Vandalism of Muslim shop by Mob alleging cow slaughter.
Today, Uttar Pradesh Police investigation revealed it was not a cow but a Buffalo.
Will the Himachal Govt or UP police take action against "Mr Sinha" for disturbing Communal Harmony?
ये इसलिए रिपोर्ट करें कि ये सिर्फ @ajitanjum का कोई फ़ैन या समर्थक नहीं है बल्कि लगातार प्रिटेंड कर रहा है कि ये अजीत अंजुम ही है। कई रिप्लाइज़ में इस शख़्स ने ये प्रिटेंड किया है। रिपोर्ट करने के लिए प्रोफाइल में कोने के तीन बिंदुओं पर जाएं, Report पर टैप करें, कारण में नीचे स्क्रॉल करें तो Impersonation का विकल्प मिलेगा, उसे चुनें और अजीत अंजुम का सही हैंडल मेंशन कर के रिपोर्ट कर दें..
xitter.cf/AjitAnjumnews
एक देश है, जहां सारे चुटकुले सच हो गए हैं और सारे सच - चुटकुलों की तरह हंस के हवा में उड़ा दिए हैं...
आप गर्व से उसे विश्वगुरू कह सकते हैं...(गुरू में रू साइलेंट है)
VIDEO | #Delhi water crisis: BJP leader Ramesh Bidhuri leads a protest at Jal Board filling pump, Okhla. Police use water cannon on protesters.
(Full video available on PTI Videos - ptivideos.com)
जिस खेती के मॉडल की ये बात कर रहे हैं, उसने महाराष्ट्र के विदर्भ से लेकर अमेरिका और लैटिन अमेरिका तक खेती और किसानों को बर्बाद कर दिया है...
और ये मॉडल सिर्फ पूंजीपतियों को फ़ायदा पहुंचाता है...
पूछिए इनसे कि ज़रा अपने इस मॉडल को विस्तार से समझा दें..फिर सुनिए कि क्या कहेंगे..
हमारे यहां 86% किसान स्मॉल मार्जिनल फार्मर हैं। हमको खेती का मॉडल ऐसा बनाना पड़ेगा कि किसान एक हेक्टेयर तक की खेती में अपनी आजीविका ठीक से चला सकें।
- माननीय श्री @ChouhanShivraj जी
वो तो थोड़ा सोशल एन्क्शियस और शर्मीला है...वरना मैं @thepeeinghuman का सार्वजनिक सम्मान और अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित करवाता, वो भी गोरखपुर और वडनगर में...
youtube.com/watch?v=qQmFybkV…
मयंक Mayank میانک retweeted
शर्म करो गुजरात सरकार
यह लोग राजकोट अग्निकांड के मृतक के परिजन हैं। आपके निर्लज्ज नेतृत्व ने इन पीड़ितों को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया है।
आज पीड़ितो के परिजन हाथ जोड़कर लोगों से यह मांग कर रहे है कि 25 जून के राजकोट बंध के एलान को सफल बनाया जाए ताकि सत्ताधीशों की नींद खुले।
जिनके घर में हादसा हुआ हो उन्हें भी न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है।
गुजरात भाजपा का शासन इतिहास के काले पन्नों में लिखा जाएगा।
#RajkotDisaster
मुझे किसी भी और अनशन से ज़्यादा मेधा पाटकर के अनशन की फ़िक्र है..
(संस्मरण, साथ और संवाद)
मुंबई में वो 8 अगस्त 2022 की सुबह थी, जगह थी अगस्त क्रांति मैदान। हम (सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार, @TusharG , किसान नेता डॉ. सुनीलम, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और मैं...) हम गिरगांव चौपाटी से अगस्त क्रांति मैदान की ओर, भारत छोड़ो आंदोलन की सालगिरह पर - पैदल मार्च कर रहे थे। मुंबई नहीं देशभर के लोग, कार्यकर्ता, सिविल सोसायटी के लोग साथ चल रहे थे..मेधाताई हमेशा की तरह, तेज़ गति से चलती हुई, हम सबको पीछे छोड़कर आगे निकल गई और फिर उनको लगा कि उनको रुकना चाहिए और वे धीमे हुई..और बोली, 'अब पैदल मार्च करते नहीं हम लोग, तो आदत छूट गई सी लगती है..देश में पैदल यात्रा खूब होनी चाहिए..हम तो गांव-गांव ऐसे ही घूमे, अब लगता है कि इतना कोई सोच भी नहीं सकता कि पैदल चले..' हिमांशु जी ने कहा, 'गांधीजी ने तो पूरा देश पैदल छान मारा था..' मेधाताई बोली, 'गांधीजी होते तो शायद अभी भी पैदल मार्च कर रहे होते..'
अगस्त क्रांति मैदान में बने स्मारक पर फूल चढ़ाए गए, सबके भाषण हुए और फिर हम सब वहां से बाहर निकले। वहां से तय हुआ कि सब तुषार गांधी के साथ, मणि भवन जाएंगे। अंततः हम 7-8 लोग पैदल ही चल दिए। तुषार गांधी, मेधा पाटकर, हिमांशु कुमार और कुछ अन्य साथी आगे-पीछे होते हुए, बतियाते हुए...पुराने मुंबई की समंदर किनारे की ऊंची-नीची पतली व्यस्त सड़कों पर चलते जा रहे थे। इस बीच अचानक कोई आता, मेधाताई को या तुषार भाई को पहचानता और वे उनसे भी बात करते..अचानक हमारे एक साथी ने उनसे पूछा कि अगर वो उनके काम का हिस्सा बनना चाहें तो क्या करना होगा? मेधाताई ने कहा कि कोई भी काम, उनका काम नहीं है..ये तो लोगों का काम है। तो हिस्सा बनने के लिए लोगों के बीच जाएं..नर्मदा वाले से जुड़ना है, तो एक बार मध्य प्रदेश के उन गांवों का चक्कर लगाएं..नहीं तो जहां भी लोगों की जेनुइन लड़ाई है, वहां जाएं...सारा काम, देश का काम है..सारा काम लोगों का काम है..और सारा काम दुनिया का काम है..फिर मेधाताई ने उनका नंबर लिया और बोला, मैं काम बताऊंगी आपको..देखती हूं करते हैं कि नहीं..हम सब मुस्कुरा रहे थे..
इस बीच मैंने इतने सालों और इतनी मुलाक़ातों के बाद, पहली बार उनके बचपन, उनके स्वाधीनता सेनानी और मज़दूर नेता पिता, उनकी अधिकारी मां और TISS के उनके दिनों और अब के फ़र्क के बारे में बात की..उन आंखों में जो एक अलग चमक मैंने देखी, नॉस्टैल्जिया की..वो बताई नहीं जा सकती है..
मैं मेधाताई से कोई 2-3 साल बाद मिल रहा था। मैं उनकी सेहत को लेकर सवाल किया। उनके चेहरे पर हल्की सी शिकन आई। ये मणि भवन की ओर मुड़ने वाली गली थी..वे बोली, उम्र तो होगी ही न, जब नर्मदा (नर्मदा बचाओ आंदोलन) शुरू किया था, तो 32 साल की थी..अभी 62 हूं..पूरा जीवन तो निकल गया और वहां भी लड़ाई अभी जारी ही है..बस ये लगता है कि जीवन कम से कम किसी एक लड़ाई में गया है, बेकार नहीं गया..
मणिभवन आ गया था, हमारे अंदर घुसते समय तुषार गांधी हमको मणिभवन का इतिहास, वहां पर हो रहा काम, उसकी अहमियत बताते जा रहे थे और फिर सामने गांधी की प्रतिमा थी..उस पर फूल चढ़ाने के पहले, दौरान और बाद कई मिनट तक मेधाताई वहां खड़ी रही। फिर बोली, 'इस देश को बचाने की लड़ाई लंबी चलेगी लेकिन लोग लड़ेंगे..' मैंने मणिभवन से बाहर निकलते ही सवाल किया, 'आपको लगता है कि लोग लड़ेंगे?' मेधाताई ने कहा, 'मैं तो गांव-गांव घूमती हूं..लोग लड़ेंगे..ये शहर का सुविधाभोगी एक वर्ग तैयार हो गया है जो - उसे पता नहीं है क्योंकि उसे छोटी-छोटी चीज़ें पाने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता..लेकिन आप गांव-देहात जाओ न..देखो न..वो तो रोज़ लड़ ही रहे हैं..हां, समय लगेगा..'
हम मुंबई की पहचानों में से एक, लोकल काली-पीली टैक्सी में बैठ गए थे, थोड़ा रुक कर मेधाताई ने कहा - 'हम लोग कैसे लड़ रहे हैं अभी भी? हमारी जो भी औपचारिक फंड्स के तरीके थे, इस सरकार ने सब रुकवा दिए..हमारे तो आवागमन पर भी बंदिशें करवा दी हैं..पर हम लड़ रहे हैं इन लोगों की ताक़त पर..इन लोगों के दम पर..ये गांधी, आंबेडकर, सावित्री बाई फुले का देश है..ये बात नहीं भूलनी है हमको..लड़ेंगे हम लोग, हो सकता है बहुत वक़्त लग जाए पर क्या होगा..ज़्यादा से ज़्यादा हम नहीं होंगे न देखने के लिए..पर इसलिए तो हमने लड़ाई शुरू भी नहीं की थी कि हम अपने सामने सबकुछ बदलते देखेंगे..बहुत कुछ बदलते देखा, बाकी अगली पीढ़ी देखेगी..'
मैंने पूछा, अब मुंबई से कहां जाना है आपको। हंसकर बोली, कुछ नहीं पता..कहीं नहीं गई तो मध्य प्रदेश चली जाऊंगी..वो तो अपना घर है न..बाकी पूरा देश तो घर है। और मेरा नहीं, आप सबका घर है। गांव में हज़ार दिक्कतें हैं लेकिन आप वहां जाओ, उनके हक़ की बात करो, उनको आसान भाषा में ऐसे समझाओ कि उनको समझ में आए..फिर देखो, कैसे वो आपका घर बन जाता है और लोग लड़ते हैं..गांव में रीफॉर्म ज़्यादा आसान है, शहर में नहीं..प्रिविलेज और सुविधा बहुत आड़े आ जाते हैं..वरना हम लोग कैसे इतने साल, नर्मदा बचाओ आंदोलन सस्टेन कर पाते..
इस बात के साथ ही अचानक हम दोनों ने ही संगीतकार-गीतकार @indianoceanband के राहुल राम के उन दिनों पर बात की, जब वो नर्मदा बचाओ आंदोलन का हिस्सा थे और जेल भी गए थे..कुछ गीत जो राहुल ने हमको सुनाए थे, मैंने उनका ज़िक्र छेड़ा और आमंत्रण मिला कि आंदोलन स्थल पर आओ और ये गीत गाओ...हम तो अभी भी गाते हैं..
ये सारा किस्सा इसलिए नहीं लिखा गया है कि आपको ये पता हो कि मेधा पाटकर से बात करते हुए मैंने क्या महसूस किया..ये इसलिए लिखा गया है कि मेधा पाटकर की बातों में पसरी सच्चाई और उसमें फैले साहस के विस्तार को देखिए...
देखिए कि कैसे इस देश में कितने लोग हैं, जिनको दुनिया सराहती है। जिन्होंने अपना जीवन, इस देश के गरीब, आदिवासी, दलित, वंचितों के लिए पूरा का पूरा लगा दिया है..हम उनको, उनके बारे में क्या और कितना जानते हैं..
मेधा पाटकर, अपने जीवन के शुरुआती सालों में नर्मदा बचाओ आंदोलन के साथ डट कर खड़ी हो गई थी और तब केंद्र में कोई मोदी सरकार नहीं थी। न ही गुजरात और मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकारें थी..लेकिन क्या आश्चर्य है न कि तब से अब तक की सब सरकारें उनको अपना दुश्मन मानती रही..
करिए गूगल और पढ़िए नर्मदा बचाओ आंदोलन का इतिहास..पढ़िए मेधा का अब तक का जीवन, उनके संघर्ष और उनके बंधुआ मज़दूरी के ख़िलाफ़ से लेकर तमाम आंदोलनों की कहानी...
और फिर...
देखिए कि कैसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने दिल्ली में पानी को लेकर हो रही राजनैतिक नौटंकी और सड़क पर बिल्डरों के बीच गोलीबारी को तो ख़बर में पूरे वक़्त चला रखा है लेकिन मेधा पाटकर का अनशन...ख़बरों से गायब है..
ग़ौर कीजिए कि आपकी और हम सबकी आंखों के सामने से, मेधा पाटकर के अनशन, उसके कारण, उनकी ज़रूरत को अदृश्य कर देने की एक साज़िश है, जिसमें सिर्फ मेनस्ट्रीम मीडिया शामिल नहीं है...अब डिजिटल और तथाकथित पैरेलल मीडिया भी व्यूज़ और रेटिंग की उसी भीड़ में शामिल है और गिनेचुने प्लेटफॉर्म्स को छोड़कर, बाकी सब जगह आपसे ये ख़बर दूर कर दी गई है...
सबको सिर्फ रेवेन्यू, व्यूज़, रेटिंग्स चाहिए...
पर हमको मेधा पाटकर चाहिए...ढेर सारी मेधा पाटकर चाहिए..हमको इस पर ढेर सारी पोस्ट्स चाहिए...बातें चाहिए...आंदोलन स्थल पर देश भर से पहुंचने वाले लोग चाहिए...
इसलिए मुझे किसी भी दिन, मेधा पाटकर के अनशन की फ़िक्र ज़्यादा होगी..मैं उस पर लिखूंगा..बात करूंगा और तब तक करूंगा, जब तक कि कोई एक भी किसी मेधा पाटकर पर मेरा लिखा पढ़ने वाला और मेरा बोला सुनने वाला हो...
सभी तस्वीरें - चौथी तस्वीर, मध्य प्रदेश के धार में मेधा पाटकर के अनशन से , बाकी तीन तस्वीरों में दो तस्वीरें मुंबई के उस पैदल मार्च से और एक मणिभवन से...
इस वीडियो का आईडिया...
इस वीडियो की राइटिंग...
इस वीडियो का एडिट...
इस वीडियो की प्लानिंग...
इस वीडियो का एक्सीक्यूशन...
अरे देखिए जाकर न...
Lambi video hai YouTube pe bhi dekh sakte ho youtu.be/qQmFybkVp2s
अभी नहीं मानेंगे...इनके ही पुराने आर्टिकल मुंह पर मार दोगे, तो भी नहीं मानेंगे...जहां से जैसा पेमेंट मिलता है, उसके हिसाब से काम करते हैं...जब कहीं से पेड असाइनमेंट पर नहीं होते हैं, तब न्याय के साथ आ जाते हैं - फॉर हॉबी..
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ये वो सवाल है, जो @rajuparulekar जैसे कुछ लोगों के अलावा कोई पूछ ही नहीं रहा है...
इस पोस्ट को पढ़िए, ध्यान से पढ़िए...
और इन सवालों को लगातार पूछते रहिए, पूछते रहिए...वरना लोकतंत्र से नागरिक ही ख़ारिज हो जाएगा...
सोचिए, समझिए और सवाल करिए...!!!
Dear @CEO_Maharshtra, @ECISVEEP,
Would you mind explaining the following:
1) As per your counterpart from UP, @ceoup the reasons for less votes counted than that polled are stated to be - i) failure of the Presiding Officer (PRO) to clear mock poll data and ii) mismatch between Control Unit (CU) and Part-I of FORM 17 C issued by the PRO. Votes from such PS are counted only if the margin of victory is lower than the votes polled in these PS.
2) But then, how do you explain counting of ADDITIONAL VOTES than that polled ? Please refer to the worksheet attached (courtesy: @mahacpimspeak), it shows 2 ADDITIONAL VOTES counted in Mumbai North West PC. FROM WHERE DID YOU GET THESE 2 ADDITIONAL VOTES ?
This question has been repeatedly raised on with @ECISVEEP since 04-06-2024 but it has gone unanswered. WOULD YOU ENLIGHTEN US ?
3) One Polling Station (PS), USUALLY bears 700 to 1,500 ELECTORS. So, if votes of one PS were not counted, the difference should show some commensurate correlation. Eg. there should be 700-1,200 less votes counted.
4) But the difference of votes as low as 1; 3; 5; 7; 127; 229; 283; 325; as seen in the image attached, is difficult to comprehend.
Are these numbers from ONE Control Unit (CU) OF ONE PS ? If yes, were there only these many ELECTORS assigned to that PS ?
5) On the other hand, the difference of higher numbers like 4,904; 3,283; 3,255; 2,796; 2,502; 1,998; 1,767 and all the numbers above 1,000, may indicate EVM VOTES NOT COUNTED AT MORE THAN ONE PS.
6) To clear off these doubts, it would be worthwhile to PUBLISH the PS wise list of EVM Votes NOT COUNTED alongwith reasons for the same.
There maybe around 50 odd PS where such issues might have occurred during GE 2024, out of the total 85k odd PS of Maharashtra.
IS IT NOT WORTHWHILE TO PUBLISH THE LIST OF AROUND 50 POLLING STATIONS, @CEO_Maharashtra ?
Mind you, Maharashtra is going to polls in less than 20 weeks time and these questions aren’t dying out unanswered anytime soon.
@AgaAniket
वैष्णव जन - देखो परधान, तुम एक ग़लती कर रहे हो...
परधान - वो क्या वैष्णव जन जी?
वैष्णव जन - हर पेपर लीक के बाद, एक स्टाइलिश रील बनाया करो कि आरोपियों को पकड़ने जा रहे हो...
परधान - बस?
वैष्णव जन - कर के देखो...जवाब तो वैसे भी नहीं देना है, अपना मज़ा पूरा आएगा 😉
#अशनू_धरमू_संवाद
धरमू: क्यों भाई रेल हादसों के लिए कौन जिम्मेदार?🤔
अशनू: नेहरू...और कौन..!
अब तुम बताओ पेपर लीक के लिए कौन..?
धरमू: अरे वही नेहरू...और कौन..!🧐
दोनों एक साथ... ठठा कर हंस पड़े।😉😂
अंततः किसी भी जगह, तरह, वजह से अंध धार्मिकता और धार्मिक कट्टपंथ आपको दूसरी जगह, तरह और वजह वाले की तरह ही बनाता है..आप मनुष्य से लिंच मॉब में तब्दील होते चले जाते हैं...और फिर...और फिर...और फिर...


























