हे आशुतोष, हे भोलेनाथ,
सावन के इस पावन अंतिम सोमवार को आपके श्रीचरणों में मेरा कोटि-कोटि प्रणाम। आपकी भक्ति ने मुझे सिखाया है कि सच्चे प्रेम में किसी प्रकार की अपेक्षा नहीं होती, बल्कि केवल सर्वस्व का त्याग और संपूर्ण समर्पण होता है।
हर हर महादेव! 🌸🙏
- @chastemonk
ज़िंदगी का सफ़र जिस तरह चल रहा है। अब ज्यादा समय नहीं बचा है। यह एक दिन का पीड़ा नहीं है। अब इस जीवन का घड़ा भर गया है और उम्मीद करता हूं कि सबकुछ बहुत जल्दी ख़त्म हो जाएगा।
- @chastemonk
... “इंसान उसी के लिए लंबी उम्र की दुआ मांगता है जिससे वह प्यार करता है और जो उसकी खुशी का कारण हो।”
- @chastemonk
सिर में एक मीठा टीस उठता है और देखते ही देखते इस कदर हावी हो जाता है मानो यह शुक्रवार का रात ही आख़िरी हो। लेकिन अचरज तो देखो, उसी बदहवासी में न जाने कब नींद आ जाता है और अगली सुबह, मन दोबारा साँस लेने लगता है।
- @chastemonk
अब यह ज़िंदगी धीरे-धीरे खत्म होने की ओर बढ़ रही है। मैंने बहुत कुछ देखा, सुना, समझा और सहा है। फिर भी, सच तो यह है कि यह सब मेरे साथ ही चला जाएगा। हम इंसान सबसे बुरे होते जा रहे हैं; जबकि दुनिया तो सचमुच बहुत खूबसूरत है।
- @chastemonk
अब इतना स्थिर हो गया हूं कि मुझे अंदर से कुछ महसूस नहीं होता है। मैं जानता हूं कि यह एक दिन या तो किसी के कारण बहुत ज्यादा सवर जाएगा या तो पूरी तरह से किसी खंडर के तरह हो जाएगा।
- @chastemonk
ज़िंदगी के इस सफ़र में किसी को भी बेवजह दुख पहुँचाने से पहले, इंसान को अपनी ज़िंदगी पर एक बार ज़रूर नज़र डालनी चाहिए। हो सकता है कि आज तुम चालाकी दिखा रहे हो, लेकिन असल में तुम नादान हो। 1|2
- @chastemonk
दोस्त; एक दिन तुम्हारी ज़िंदगी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी और यह बर्बादी किसी ज्वालामुखी के फटने से होने वाली तबाही से भी कहीं ज़्यादा भयानक होगी। जब तक मौका है, अपनी ज़िंदगी जी लो... 2|2
- @chastemonk
मेरे हिस्से में असल में कुछ भी नहीं आया। यह ज़िंदगी ऐसी तकलीफ़ों के लिए नहीं थी, फिर भी वक़्त किसी तूफ़ान की तरह मेरा पीछा कर रहा है और मैं जानता हूँ कि ऐसे तूफ़ान अपने पीछे तबाही और बर्बादी छोड़ जाते हैं। मुझे भी ठीक ऐसा ही महसूस हो रहा है।
- @chastemonk
तरह-तरह के दुःख आलोचना और नाकामियों ने मुझे जकड़ लिया है। मुझे नहीं पता कि भविष्य में मेरे लिए क्या है। लेकिन मैं अब और इस तरह नहीं चल सकता... मैं हालात को मानता और समझता हूँ, फिर भी मैं इसे और ज़्यादा बर्दाश्त नहीं कर सकता... अब नहीं हो रहा।
- @chastemonk
मैं सोच रहा था काश कि हम साथ प्रतिदिन शिव मंदिर चलते। एक साथ मंत्र उच्चारण, जल अभिषेक और ध्यान करते। शिव शंकर और मां भगवती एवं बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर घर वापस लौटते।
तुम क्या सोच रही हो?
- @chastemonk











