भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
మాకు పిల్లలు పుట్టలేదని బాబును దత్తత తీసుకుని పెంచుకోవడం తప్పా?
హిందూ సంప్రదాయం ప్రకారమే దత్తత తీసుకుని మూడేళ్లుగా బాబును పెంచుకుంటున్నాం, ఎవరో ఫిర్యాదు చేశారని అధికారులు వచ్చి బాబును శిశు సంక్షేమ కేంద్రానికి తరలించారు
న్యాయవాది ద్వారా హైకోర్టును ఆశ్రయిస్తే, బాబును మాకు అప్పగించాలని ఉత్తర్వులు కూడా ఇచ్చింది
కానీ ఇప్పటివరకు అధికారులు బాబును మాకు అప్పగించలేదు
– చిన్నారిని పెంచుకున్న తల్లి
"నన్ను తీసుకెళ్లు అమ్మా.. భయమేస్తుంది"
చిన్నారిని తల్లిదండ్రులకు అప్పగించాలని కోర్టు ఆదేశాలు ఉన్నా అప్పగించని అధికారులు
జగిత్యాల జిల్లాలో హృదయవిదారక ఘటన
చట్టపరంగా దత్తత తీసుకోలేదని, మూడేళ్లుగా పెంచుకుంటున్న చిన్నారిని తల్లిదండ్రుల నుంచి వేరు చేసి శిశు సంక్షేమ కేంద్రానికి తరలించిన అధికారులు
ఈ క్రమంలో శిశు సంక్షేమ కేంద్రంలో ఉన్న చిన్నారిని చూసేందుకు వెళ్లగా, "నన్ను తీసుకెళ్లు అమ్మా.. భయమేస్తుంది" అంటూ గుండెలవిసేలా రోదించిన చిన్నారి
హిందూ సంప్రదాయం ప్రకారమే దత్తత తీసుకున్నామని హైకోర్టును ఆశ్రయించగా, చిన్నారిని తిరిగి తల్లిదండ్రులకు అప్పగించాలని అక్టోబర్ 16వ తేదీన ఉత్తర్వులు జారీ చేసిన హైకోర్టు
అయితే హైకోర్టు ఉత్తర్వులు ఉన్నా అధికారులు జాప్యం చేస్తున్నారని, తమ కొడుకు ఆరోగ్యం క్షీణిస్తోందని, వెంటనే తమ కొడుకును తమకు అప్పగించాలని డిమాండ్ చేస్తున్న తల్లిదండ్రులు
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
"నన్ను తీసుకెళ్లు అమ్మా.. భయమేస్తుంది"
చిన్నారిని తల్లిదండ్రులకు అప్పగించాలని కోర్టు ఆదేశాలు ఉన్నా అప్పగించని అధికారులు
జగిత్యాల జిల్లాలో హృదయవిదారక ఘటన
చట్టపరంగా దత్తత తీసుకోలేదని, మూడేళ్లుగా పెంచుకుంటున్న చిన్నారిని తల్లిదండ్రుల నుంచి వేరు చేసి శిశు సంక్షేమ కేంద్రానికి తరలించిన అధికారులు
ఈ క్రమంలో శిశు సంక్షేమ కేంద్రంలో ఉన్న చిన్నారిని చూసేందుకు వెళ్లగా, "నన్ను తీసుకెళ్లు అమ్మా.. భయమేస్తుంది" అంటూ గుండెలవిసేలా రోదించిన చిన్నారి
హిందూ సంప్రదాయం ప్రకారమే దత్తత తీసుకున్నామని హైకోర్టును ఆశ్రయించగా, చిన్నారిని తిరిగి తల్లిదండ్రులకు అప్పగించాలని అక్టోబర్ 16వ తేదీన ఉత్తర్వులు జారీ చేసిన హైకోర్టు
అయితే హైకోర్టు ఉత్తర్వులు ఉన్నా అధికారులు జాప్యం చేస్తున్నారని, తమ కొడుకు ఆరోగ్యం క్షీణిస్తోందని, వెంటనే తమ కొడుకును తమకు అప్పగించాలని డిమాండ్ చేస్తున్న తల్లిదండ్రులు
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
आज 26 के होगे मोर छत्तीसगढ़,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
नदिया म पानी बने रहय,
जंगल म रूख-राई बचे रहय,
खेत म धान के बाली लहराय,
बखरी म साग-भाजी उगते रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
भले शहर-शहर म मॉल खुलय,
किसिम-किसिम के ब्रांड मिलय,
अउ घर बइठे सब जिनिस मिल जाय,
मगर दुआरी के दुकान घलो खुले रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
गाँव-गाँव म मोबाइल के टावर लगय,
हर घर म सोलर के पावर रहय,
भले हर हाथ म मोबाइल दिखय,
मगर फुगड़ी-बिल्लस के खेल बचे रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
आज 26 के होगे मोर छत्तीसगढ़,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
हमर गुड़ी के गोठ बचे रहय,
हमर पुरखा के चिन्हारी बचे रहय,
छत्तीसगढ़ के माटी के महक बचे रहय,
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़िया बचे रहय,
करथौं बूढ़ा देव ले इही वंदना...
-अंश
छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के सब्बो झन ला गाड़ा-गाड़ा बधाई, जोहार 🙏
#chhattisgarh #sunona
🤖 Made with AI
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
भाटापारा शहर के नाका नंबर 1 स्थित पदमा रिसोर्ट में 24 अक्टूबर की रात 11 बजे से पोस्ट लिखने तक लगातार तेज आवाज में आर्केस्ट्रा का कार्यक्रम किया जा रहा है। जिसकी आवाज 1 किलोमीटर दूर तक साफ-साफ सुनाई दे रही है, तो पदमा रिसोर्ट के आसपास रहने को वाल लोगों को को इससे कितनी तकलीफ हो रही होगी? क्या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बनती कि रात के 2 बजे तक बज रहे DJ और आर्केस्ट्रा प्रोग्राम को बंद करायें। यह पदमा रिजॉर्ट में हमेशा तेज आवाज में DJ और गाने बजाये जाते हैं।
भाटापारा शहर के कई रिसोर्ट में रात के 2-3 बजे तक DJ बजाई जा रही है, जिससे रिसोर्ट के आस-पास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुलिस और प्रशासन द्वारा कार्रवाई न किये जाने के कारण रिसोर्ट ऑनर औए DJ वालों की हिम्मत सातवे आसमान पर है। @BalodaBazarDist और @BBZpoliceCGP से निवेदन है कि ध्वनि विस्तार यंत्रो केतेज आवाज में रात्रि में प्रयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाए।
@ChhattisgarhCMO @CGPoliceDept @BalodaBazarDist @BBZpoliceCGP @SHIVRATAN__BJP @IndraSao_MLA
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
छत्तीसगढ़ में कोयले की खदानें हैं और छत्तीसगढ़ के बिजली संयंत्रो को ही कोयला नहीं मिल रहा। ये कैसा लॉजिक है भाई?
अगर छत्तीसगढ़ के बिजली संयंत्रोमें कोयले की कमी है, तो फिर रोजाना कोयले से भरी सैकड़ो माल गाड़ियां कहां जा रही है? छत्तीसगढ़ के कोयले से जिन राज्यों में बिजली बन रही है, वहां तो कोई तकलीफ नहीं है? @secl_cil तो कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही है और @secrail माल ढुलाई में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही है, पर इसका फायदा छत्तीसगढ़ को क्यों नहीं मिल रहा है?
@vishnudsai @vijaysharmacg @ArunSao3 @GajendraYdvBJP @OPChoudhary_Ind @bhupeshbaghel @DeepakBaijINC @TS_SinghDeo @DrCharandas @INCChhattisgarh @brijmohan_ag
@vijaybaghelcg
कुई डंडा/डंडा गीता/सैला को बचाने का प्रयास किसी भी सामाजिक संगठन ने नहीं किया youtu.be/z4e88vjXbXY?si=D6qH…
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
नाम बदलने के लिए मशहूर भाजपा सरकार ने 600 सालों से चली आ रही ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में लगने वाले मुरिया दरबार का नाम बदल कर आम दरबार कर दिया है।
इस सरकार को नाम बदलने की इतनी बेचैनी रहती है कि छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की पहचान को बदलना शुरु कर दिया है।
@vishnudsai @vijaysharmacg @ArunSao3 @DPRChhattisgarh @bhupeshbaghel @DeepakBaijINC @TS_SinghDeo @DrCharandas @INCChhattisgarh @KedarKashyapBJP @KiranDeoBJP @alokshuklacg @thealokputul
नाम बदलने के लिए मशहूर सरकार ने जगदलपुर के " माड़िया चौक " का नाम बदलकर विकसित भारत चौक करने का निर्णय लिया है।
" माड़िया चौक " जगदलपुर शहर के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित है। इस चौक का मूल नाम बस्तर की स्थानीय 'माड़िया' (Madiya) जनजाति के सम्मान में रखा गया था। माड़िया जनजाति बस्तर की प्राचीन और समृद्ध जनजातियों में से एक है, जो अपनी विशिष्ट संस्कृति, " गौर नृत्य " (बाईसन हॉर्न डांस) और पारंपरिक जीवन शैली के लिए जानी जाती है। " माड़िया चौक " पर बस्तर की इसी जनजातीय कला और संस्कृति को भित्ति चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
यह सरकार नाम बदलने में इतनी आतुर है कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़ी जगहों के महत्व को भूल गई है।
मुख्यमंत्री @vishnudsai जी, क्या ये खबर सही या जनता को भ्रमित किया जा रहा है?
@vishnudsai @vijaysharmacg @ArunSao3 @DPRChhattisgarh @bhupeshbaghel @DeepakBaijINC @TS_SinghDeo @DrCharandas @INCChhattisgarh @KedarKashyapBJP @KiranDeoBJP @alokshuklacg @thealokputul
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
DJ तय सीमा से बहुत अधिक आवाज पर बजाया जाता है। DJ की वजह से आम नागरिकों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खासकर हार्ट पेशेंट को इससे बहुत ज्यादा परेशानी होती है। पूरे छत्तीसगढ़ में DJ बंद होना चाहिए।
@ChhattisgarhCMO @CGPoliceDept @bsppolicecg @BilaspurDist @CPRaipurPolice @RaipurDistrict @BalodaBazarDist @BBZpoliceCGP
छत्तीसगढ़ के गोंड योद्धा की मूर्ति भोपाल के संग्रहालय में,भाई रायपुर वालों को भी कुछ कलाकृतियाँ,शिलालेख दे दो youtube.com/shorts/ardqOODzq…
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
Dear Indians,
If there's one thing you do today, make it this.
Find the man in the brown shirt, who is beating a child in this video.
Make him famous. 😡
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
पोलावरम बांध परियोजना के कारण सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र कई गांवों को कई गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है। हालिया सर्वे और दावों के अनुसार, इस परियोजना से छत्तीसगढ़ के करीब 18 गांव और लगभग 15,000 की आबादी प्रभावित होने की आशंका है।
पोलावरम बांध में पानी का स्तर बढ़ने से गोदावरी नदी का बैकवाटर गोदावरी नदी की सहायक नदियों (जैसे शबरी और सीलेरू) में वापस आयेगा। इससे कोंटा नगर पंचायत समेत आस-पास के निचले इलाकों के गांवों में स्थायी रूप से या बाढ़ के दौरान डूबने का खतरा बढ़ जाएगा। छत्तीसगढ़ की सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि इस परियोजना के डूब क्षेत्र में आ सकती है। इससे किसानों की खेती योग्य उपजाऊ भूमि हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। यहां रहने वाले अधिकांश ग्रामीण खेती, पशुपालन और वनोपज (जैसे महुआ, तेन्दूपत्ता) पर निर्भर हैं। जलभराव के कारण जंगल और खेत नष्ट होने से उनकी आजीविका पूरी तरह ठप हो सकती है। पुश्तैनी जमीन और घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ेगा।
पोलावरम बांध परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में अधिकांश आबादी दोरला (Dorla) और अन्य आदिवासी समुदायों की है। आदिवासियों का जल, जंगल और जमीन से गहरा आध्यात्मिक व सांस्कृतिक जुड़ाव होता है। विस्थापन के कारण उनकी सदियों पुरानी परंपराएं, पवित्र देवस्थल (गोटुल और पूजा स्थल) और सामाजिक ताना-बाना बिखरने का गंभीर खतरा है। जिसके कारण प्रभावित क्षेत्र के आदिवासियों को सांस्कृतिक क्षति और पहचान का नुकसान होगा। उनके सामने अब अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाये रखने का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि क्या उन्हें भूमि के बदले सही मुआवजा और रहने के लिए घर मिलेंगे, क्योंकि पोलावरम के विस्थापितों के पुनर्वास का ट्रैक रिकॉर्ड पहले ही काफी धीमा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और छत्तीसगढ़ सरकार का यह भी मत रहा है कि परियोजना के प्रभाव का सही और नया आकलन (सटीक सर्वे) नहीं किया गया है, जिससे सही प्रभावितों को न्याय मिलने में दिक्कत आ सकती है।
जब दो-तीन राज्यों के सीमाओं के बीच ऐसी बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण होता है तो उन राज्यों के बीच गहन और प्रभावी चर्चा होती है।इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ सरकार को मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए, ताकि पोलावरम बांध के कारण प्रभावित होने वाले क्षेत्र के ग्रामीणों को उचित मुआवजा और पुनर्वास उपलब्ध किया जा सके।
#PolavaramDam #PolavaramProject #Sukma #Konta #bastar #chhattisgarhnews
@vishnudsai @ArunSao3 @vijaysharmacg @ChhattisgarhCMO @bhupeshbaghel @KedarKashyapBJP @KiranDeoBJP @TS_SinghDeo @DeepakBaijINC @Mahesh_ji_bjp @INCChhattisgarh @BJP4CGState
पोलावरम बांध परियोजना के कारण सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र कई गांवों को कई गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है। हालिया सर्वे और दावों के अनुसार, इस परियोजना से छत्तीसगढ़ के करीब 18 गांव और लगभग 15,000 की आबादी प्रभावित होने की आशंका है।
पोलावरम बांध में पानी का स्तर बढ़ने से गोदावरी नदी का बैकवाटर गोदावरी नदी की सहायक नदियों (जैसे शबरी और सीलेरू) में वापस आयेगा। इससे कोंटा नगर पंचायत समेत आस-पास के निचले इलाकों के गांवों में स्थायी रूप से या बाढ़ के दौरान डूबने का खतरा बढ़ जाएगा। छत्तीसगढ़ की सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि इस परियोजना के डूब क्षेत्र में आ सकती है। इससे किसानों की खेती योग्य उपजाऊ भूमि हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। यहां रहने वाले अधिकांश ग्रामीण खेती, पशुपालन और वनोपज (जैसे महुआ, तेन्दूपत्ता) पर निर्भर हैं। जलभराव के कारण जंगल और खेत नष्ट होने से उनकी आजीविका पूरी तरह ठप हो सकती है। पुश्तैनी जमीन और घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ेगा।
पोलावरम बांध परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में अधिकांश आबादी दोरला (Dorla) और अन्य आदिवासी समुदायों की है। आदिवासियों का जल, जंगल और जमीन से गहरा आध्यात्मिक व सांस्कृतिक जुड़ाव होता है। विस्थापन के कारण उनकी सदियों पुरानी परंपराएं, पवित्र देवस्थल (गोटुल और पूजा स्थल) और सामाजिक ताना-बाना बिखरने का गंभीर खतरा है। जिसके कारण प्रभावित क्षेत्र के आदिवासियों को सांस्कृतिक क्षति और पहचान का नुकसान होगा। उनके सामने अब अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाये रखने का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि क्या उन्हें भूमि के बदले सही मुआवजा और रहने के लिए घर मिलेंगे, क्योंकि पोलावरम के विस्थापितों के पुनर्वास का ट्रैक रिकॉर्ड पहले ही काफी धीमा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और छत्तीसगढ़ सरकार का यह भी मत रहा है कि परियोजना के प्रभाव का सही और नया आकलन (सटीक सर्वे) नहीं किया गया है, जिससे सही प्रभावितों को न्याय मिलने में दिक्कत आ सकती है।
जब दो-तीन राज्यों के सीमाओं के बीच ऐसी बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण होता है तो उन राज्यों के बीच गहन और प्रभावी चर्चा होती है।इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ सरकार को मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए, ताकि पोलावरम बांध के कारण प्रभावित होने वाले क्षेत्र के ग्रामीणों को उचित मुआवजा पुनर्वस्या उपलब्ध की जा सके। है।
#PolavaramDam #PolavaramProject #Sukma #Konta #bastar #chhattisgarhnews
@vishnudsai @ArunSao3 @vijaysharmacg @ChhattisgarhCMO @bhupeshbaghel @KedarKashyapBJP @KiranDeoBJP @TS_SinghDeo @DeepakBaijINC @Mahesh_ji_bjp @INCChhattisgarh @BJP4CGState
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
गरबा के नाम पर ये अश्लीलता बंद होनी चाहिए। माता के भक्ति के पर्व को ऐसे लोगों द्वारा अश्लीलता और नशा परोसने का मंच बनाया जा रहा है। मैं शुरु से इस बात का विरोध करता आया हूँ। ये सब नहीं छत्तीसगढ़ में नहीं चलेगा। इन सबके ऊपर FIR दर्ज होनी चाहिए।
अगर छत्तीसगढ़ में इस बार के नवरात्रि में किसी भी पंडाल में अश्लील आर्केस्टा और फूहड़ता भरे डांस का आयोजन होगा तो आयोजन करने वालों की तरीके से धुनाई होगी। माता की नवरात्रि और महादेव के कावड़ यात्रा में गंदे आर्केस्टा और फूहड़ता भरे नृत्य करवाना हमारे राज्य की संस्कृति नहीं है। ये दूसरे राज्यों में होता है, हमारे छत्तीसगढ़ में बिल्कुल नहीं, पर दूसरे राज्य के लोगों के प्रभाव के कारण ये गंदगी अब धीरे-धीरे हमारे राज्य में भी पाँव पसार रही है जो बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।
माता की भक्ति का पर्व है तो माता की भक्ति करिये, जसगीत,भजन, माता के भक्ति गानों का कार्यक्रम करवाइये, छत्तीसगढ़ में बेफजूल की अश्लील डांस और फूहड़ता परोसने कार्य न करें।
जो भी कार्यक्रम करवा रहे हैं कृपया छत्तीसगढ़ की मर्यादा और संस्कृति का ध्यान रखें।
बचपन में पूरा गांव इकट्ठा हो जाता था क्योंकि सुबह बलि होता था,हमारे गांव के देवी मंदिर में काले हिरण का सींग,सांभर सींग रखा हुआ है शायद गांव कभी घनघोर जंगल के बीच रहा होगा।
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
नाम बदलने के लिए मशहूर सरकार ने जगदलपुर के " माड़िया चौक " का नाम बदलकर विकसित भारत चौक करने का निर्णय लिया है।
" माड़िया चौक " जगदलपुर शहर के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित है। इस चौक का मूल नाम बस्तर की स्थानीय 'माड़िया' (Madiya) जनजाति के सम्मान में रखा गया था। माड़िया जनजाति बस्तर की प्राचीन और समृद्ध जनजातियों में से एक है, जो अपनी विशिष्ट संस्कृति, " गौर नृत्य " (बाईसन हॉर्न डांस) और पारंपरिक जीवन शैली के लिए जानी जाती है। " माड़िया चौक " पर बस्तर की इसी जनजातीय कला और संस्कृति को भित्ति चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
यह सरकार नाम बदलने में इतनी आतुर है कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़ी जगहों के महत्व को भूल गई है।
मुख्यमंत्री @vishnudsai जी, क्या ये खबर सही या जनता को भ्रमित किया जा रहा है?
@vishnudsai @vijaysharmacg @ArunSao3 @DPRChhattisgarh @bhupeshbaghel @DeepakBaijINC @TS_SinghDeo @DrCharandas @INCChhattisgarh @KedarKashyapBJP @KiranDeoBJP @alokshuklacg @thealokputul
तेलीबांधा चौक का नाम बदला जाना छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाने का प्रयास है। तेलीबांधा का नाम मरीन ड्राइव करके तेलीबांधा के इतिहास का मिटाने का षड्यंत्र पहले किया जा चुका है और अब तेलीबांधा चौक के नाम बदलने की बात करके वर्तमान सरकार क्या साबित करना चाहती है? साहू समाज की आस्था, पहचान और गौरव से जुड़े चीजों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या नामों में परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है।
मैं जानना चाहता हूँ कि साहू समाज से जुड़े तेलीबांधा चौंक का नाम बदलने का यह विचार किसके मन में आया? क्या उन्हें साहू समाज से जुड़े इतिहास का ज्ञान नहीं है आया या फिर जानबूझकर साहू समाज की भावनाओं को आहत करने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है। क्या चौंक का नाम बदलने से पहले जनता की राय ली गई?
सरकारी योजनाओं का नाम बदलते-बदलते यह सरकार नाम बदलने में इतनी मशगूल हो गई है कि इन्होंने राज्य कि ऐतिहासिक जगहों से जुड़े नामों में छेड़छाड़ करना शुरु कर दिया है।
#मोर_चिन्हारी_छत्तीसगढ़ी
ऐसे हंस रहा है जैसे बहुत ही बड़ा काम किया हो।
सूरजपुर
माँ-बेटी हत्याकांड मामले में स्पेशल कोर्ट ने आज मुख्य आरोपी कुलदीप समेत 3 को फाँसी और एक आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को मरते दम तक उम्र क़ैद की सजा सुनाई।
कोर्ट ने 29 सितंबर को मामले में 4 आरोपियों को हत्या, रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी माना था, तब मुख्य आरोपी कुलदीप कोर्ट परिसर से हंसते हुए बाहर निकल रहा था।
14 अक्टूबर 2024 को हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी और बेटी की आरोपियों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। वारदात से पहले पत्नी से रेप किया, इसके बाद चाकू से उसकी हत्या कर दी। आरोपियों ने बेटी के कपड़े उतारकर धारदार हथियार से उसकी भी हत्या कर दी। दोनों के शव नग्न हालत में घर से करीब 5 किलोमीटर दूर फेंक दिए थे।
#Surajpur #DoubleMurder #chhattisgarh
भानु प्रताप सिंह मरकाम retweeted
अगर छत्तीसगढ़ में इस बार के नवरात्रि में किसी भी पंडाल में अश्लील आर्केस्टा और फूहड़ता भरे डांस का आयोजन होगा तो आयोजन करने वालों की तरीके से धुनाई होगी। माता की नवरात्रि और महादेव के कावड़ यात्रा में गंदे आर्केस्टा और फूहड़ता भरे नृत्य करवाना हमारे राज्य की संस्कृति नहीं है। ये दूसरे राज्यों में होता है, हमारे छत्तीसगढ़ में बिल्कुल नहीं, पर दूसरे राज्य के लोगों के प्रभाव के कारण ये गंदगी अब धीरे-धीरे हमारे राज्य में भी पाँव पसार रही है जो बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।
माता की भक्ति का पर्व है तो माता की भक्ति करिये, जसगीत,भजन, माता के भक्ति गानों का कार्यक्रम करवाइये, छत्तीसगढ़ में बेफजूल की अश्लील डांस और फूहड़ता परोसने कार्य न करें।
जो भी कार्यक्रम करवा रहे हैं कृपया छत्तीसगढ़ की मर्यादा और संस्कृति का ध्यान रखें।


















