"मैं शून्य हूँ…"
राहुल गांधी से पहले भी कई बार मुलाक़ात हुई थी।
लेकिन इन 4 घंटे 30 मिनट में जाना —
राहुल गांधी वो नहीं हैं, जो हम अब तक समझते रहे हैं।
इस मुलाक़ात में
धर्म था…
योग था…
राजनीति थी…
अध्यात्म था…
और सबसे महत्वपूर्ण —
प्रेम था।
वो प्रेम, जो बिना बोले भी संवाद कर जाए।
वो दृष्टि, जो सामने वाले को भीतर तक देख ले।
उन्होंने पूछा —
"मैं कौन हूँ?"
"आप कौन हैं?"
"हम सब कौन हैं?"
और अब, सात दिन बाद…
मेरे भीतर से बस एक उत्तर निकलता है —
"मैं शून्य हूँ…"
न रूप, न आकार।
न संप्रदाय, न विरोध।
जो मेरे आगे जाए, वो विराट हो जाए।
जो पीछे चले, वो रास्ता बन जाए।
मैं सत्ता नहीं —
सत्य हूँ।
मैं धर्म नहीं —
ध्यान हूँ।
मैं सीमित नहीं —
अनंत हूँ।
मैं वही शून्य हूँ
जिसमें सब कुछ समाहित है —
और फिर भी जो निर्विकार है।
राहुल गांधी ने मुझे कुछ सिखाया नहीं,
मुझे मुझसे मिलवाया।
उन्होंने जो कहा नहीं,
वो मेरे भीतर गूंजता रहा।
मैं जान गया —
मैं न हिन्दू हूँ, न मुसलमान, न ईसाई।
मैं सिर्फ वही हूँ, जिसे शून्य कहते हैं।
तो जब उन्होंने पूछा —
"तुम कौन हो?"
मैं मुस्कराया और उत्तर आया —
"मैं राहुल हूँ…"
"मैं अपूर्व हूँ…"
"मैं शून्य हूँ…"
"हम सब शून्य हैं…"
@srivatsayb भाई धन्यवाद स्वयं से साक्षात्कार कराने के लिए 🙏
@RahulGandhi ♥️ ♥️
#घोरकलजुग #RahulGandhi
मैं रामलीला मैदान बोल रहा हूँ…
मैंने 1975 में जेपी को देखा है, 1993 में बीजेपी को देखा है। और अब कल 2026 में राहुल गांधी के 12 साल के संघर्ष, धैर्य और राजनीतिक सफर का गवाह बनने जा रहा हूँ।
कल का दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हो सकता है। कभी इस मैदान के नायक जेपी और अटल थे, इस बार मेरे नायक होंगे राहुल गांधी।
12 साल तक उनका मजाक उड़ाया गया। उनकी राजनीति को कितनी बार खत्म मान लिया गया। संसद की सदस्यता गई, सरकारी बंगला खाली करना पड़ा, मुकदमे हुए और हर कदम पर उन्हें रोकने की कोशिश हुई।
लेकिन राहुल गांधी न झुके, न रुके और न अपनी लड़ाई छोड़ी।
पिछले 12 सालों में उन्होंने देश के कोने-कोने की यात्रा की। कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चले, मणिपुर से मुंबई तक लोगों के बीच पहुँचे। किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम लोगों की आवाज उठाई। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया।
उनका संघर्ष सिर्फ बीजेपी से राजनीतिक मुकाबले का नहीं है। राहुल गांधी लगातार उस विचारधारा के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं, जिसे वे देश के लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए चुनौती मानते हैं।
आज संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, चुनाव की निष्पक्षता और संसद की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े हैं।
कल 5 लाख लोग आएँ, 10 लाख आएँ या उससे भी ज्यादा, संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण वह परिस्थिति है जिसमें यह जनसभा हो रही है।
1975 में जेपी ने सत्ता के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। 1993 में बीजेपी ने राम मंदिर आंदोलन के बाद इसी मैदान में अपनी ताकत दिखाई थी।
और अब 2026 में राहुल गांधी के नेतृत्व में एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई का नया अध्याय लिखा जाने जा रहा है।
राहुल गांधी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि तमाम आलोचनाओं और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी विचारधारा और संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा।
याद रखिए, इतिहास केवल भीड़ से नहीं बनता, इतिहास बनाने के लिए वर्षों का संघर्ष, धैर्य और हौसला चाहिए।
कल रामलीला मैदान में सिर्फ एक रैली नहीं होगी, 12 साल के संघर्ष की गूंज सुनाई देगी।
कल का दिन मेरे लिए ऐतिहासिक होगा और भारतीय राजनीति के इतिहास में भी दर्ज होगा।
मैं रामलीला मैदान हूँ… कल फिर इतिहास का एक नया पन्ना लिखे जाने का गवाह बनूँगा।
#RamleelaMaidan #RahulGandhi
सुनो ज्ञानेश गुप्ता.. आपका महाभियोग नहीं होगा, आप जेल की सलाखों के पीछे होंगे!" 🔥
तथ्यों की स्पष्टता, शब्दों की धार और बेबाक अंदाज़!
नेहा बोरा और ऐसी हर आवाज़ को सलाम!
#NehaBora
प्रधानमंत्री मोदी.. भारत की इस बेटी की इस स्पीच को सुनिये..एक एक शब्द जैसे दिल से बोला जा रहा है जब एक महिला अपने हक के लिए बोलती तो वो सिर्फ महिला नहीं होती वो पूरे समाज की आवाज होती है उसके हक को आप या ज्ञानेश क्या स्वयं ईश्वर भी नहीं छीन सकता
लोकतंत्र बचाओ, ज्ञानेश कुमार हटाओ✊
इंदौर से दिल्ली की ओर कूच…
#Indore #DelhiChalo
IDBI बैंक की डील नहीं, सबसे बड़ा स्कैम है हितों के टकराव की पूरी कहानी है!
LIC के डायरेक्टर जी. महालिंगम 7 महीने तक LIC और Fairfax नियंत्रित Thomas Cook—दोनों के बोर्ड में बैठे रहे!
नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत अब उसी Fairfax के Senior Adviser हैं, जो IDBI का खरीदार है!
नीलामी का रिजर्व प्राइस ₹94.42 से घटकर ₹81 प्रति शेयर कैसे पहुंचा?
बेचने वाले भी अपने, सलाहकार भी अपने और खरीदार भी अपने करीबियों का?
देश की संपत्ति के सौदों में ये संयोग हैं या सत्ता और कॉरपोरेट के गठजोड़ का प्रयोग?
हर चेहरे का हिसाब होना चाहिए!
#IDBISaleScam #IDBI
जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, यासिर अराफात फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा — "मेरी बहन चली गई।"
ग़ाज़ा पट्टी में कई घरों में उस दिन खाना नहीं बना।
ईरान, इराक, फिलिस्तीन — हर जगह मातम जैसा शोक था, जैसे कोई अपना चला गया हो।
ऐसा था भारत का स्थान पश्चिम एशिया में। ऐसी थी इंदिरा गांधी की विदेश नीति।
राहुल गांधी ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर जो सवाल उठाए हैं, वो सिर्फ आलोचना नहीं थी —
वो उस नीति की हत्या पर शोक था,
जिसने भारत को दुनिया में मज़हबी ध्रुवीकरण से ऊपर उठाकर न्याय और संतुलन की मिसाल बनाया था।
उन्होंने बिल्कुल सही कहा —
“भारत की दशकों पुरानी संतुलित और स्पष्ट विदेश नीति को धूल-धूसरित कर दिया गया है।”
इंदिरा गांधी न तो धर्म देखकर विदेश नीति तय करती थीं,
न ही वोटबैंक देखकर देश की दिशा तय करती थीं।
उन्होंने यासिर अराफात को सिर्फ एक मज़हबी नेता नहीं,
एक स्वतंत्रता सेनानी माना।
जब दुनिया उन्हें आतंकवादी मान रही थी,
भारत ने उन्हें आत्मनिर्णय का हक़ दिलाने की आवाज़ बुलंद की।
1974 में इंदिरा गांधी ईरान गईं।
शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी ने उनका ऐतिहासिक स्वागत किया।
तेहरान की सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी थी।
भारत और ईरान ने सिर्फ तेल या व्यापार की बात नहीं की —
बल्कि शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति में गहरी साझेदारी की नींव रखी।
भारत कभी ईरान के इस्लामिक चरित्र से डरता नहीं था,
और ईरान कभी भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर उंगली नहीं उठाता था।
और सद्दाम हुसैन?
इराक के इस शक्तिशाली और विवादास्पद नेता से भी भारत ने रिश्ते बनाए।
क्यों?
क्योंकि भारत को तेल चाहिए था, मज़दूरों को रोज़गार चाहिए था,
और पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिरता चाहिए थी।
इराक भारत को रियायती दरों पर तेल देता था।
हज़ारों भारतीय वहां काम करते थे —
सिर्फ पैसे के लिए नहीं, भारत के झंडे के भरोसे के कारण।
1971 में जब पाकिस्तान को भारत ने दो हिस्सों में बांट दिया,
तब दुनिया की महाशक्तियाँ भारत पर हमलावर थीं।
मगर ईरान, इराक, फिलिस्तीन ने भारत का विरोध नहीं किया।
बल्कि समझा —
भारत न्याय कर रहा है।
और जब अमेरिका का सातवाँ बेड़ा हिंद महासागर में घुसा भारत को डराने,
तब सिर्फ रूस नहीं खड़ा हुआ —
बल्कि पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों तक ने भारत के खिलाफ माहौल बनने नहीं दिया।
क्यों?
क्योंकि भारत की विदेश नीति में दोहरापन नहीं था।
वो मज़हबी तुष्टिकरण नहीं,
साफ़, राष्ट्रहित आधारित नीति थी।
और आज…
भारत ग़ज़ा पर चुप है।
इजरायल की गोद में बैठकर "वसुधैव कुटुम्बकम्" का जाप करता है।
शब्द हैं, आत्मा नहीं।
इंदिरा होतीं तो भारत दोनों से बात करता —
इजरायल से भी, ईरान से भी।
दुनिया को याद दिलाता कि
भारत न्याय का पक्ष चुनता है, धर्म का नहीं।
#घोरकलजुग #IndiraGandhi
IDBI बैंक बिक रहा है… लेकिन इन सबके बीच मोदी जी के ब्ल्यू आइज़ बॉय नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत इस डील में क्या कर रहे थे?
तो अब उनका कनेक्शन भी जान लीजिए!
अमिताभ कांत अब उसी कनाडाई कंपनी Fairfax के Senior Adviser हैं, जिसे IDBI बैंक का खरीदार चुना गया है!
सवाल है—IDBI की बिक्री में अमिताभ कांत की क्या भूमिका रही?
देश को जवाब चाहिए, पाई-पाई का हिसाब चाहिए!
#घोरकलजुग #IDBIBankIsNotForSale
MP अजब है, सरकारी लूट गजब है! 😂🔥 पार्ट-2
पान की दुकान ₹30 करोड़, बंद मोमोज़ की दुकान ₹50 करोड़, हेयर सैलून ₹3,000 करोड़ और ₹10,556 बैंक बैलेंस वाली कंपनी के नाम पर ₹3 लाख करोड़ के निवेश का दावा!
न निवेश आया, न MoU हुआ… ऊपर से ₹230 करोड़ खर्च!
मोहन यादव जी, ये ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट थी या सरकारी पैसों की समिट? पूछता है भारत
विचित्रा मैडम का सिस्टम बीजेपी से सेट है,
चांदनी चौक की रैली अराजक नहीं, रोमांटिक डेट है! 😍
बीजेपी से सेटिंग और डेटिंग ज़ोरों पर है,
क्योंकि दोस्ती भी उनकी वोट चोरों से है 😂
#घोरकलजुग
दुनिया राशन जमा कर रही है, भारत की सत्ता रैली रोकने में लगी है!
दुनिया के 33 देश युद्ध और आपातकाल के खतरे से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। नागरिकों से 3 से 10 दिन का राशन-पानी रखने को कहा जा रहा है।
लेकिन भारत के विश्वगुरु दुग्गल साहब को देश के संकट से ज्यादा चिंता राहुल गांधी की 1 नवंबर की रैली की है!
कल नितिन नवीन के चांदनी चौक दौरे से व्यापारी परेशान, बाजार बेहाल और दिल्ली जाम थी।
दुनिया आपातकाल से निपट रही है, BJP अपने राजनीतिक संकट से #घोरकलजुग #Geopolitics
85 साल के खड़गे जी दिख जाते हैं, लेकिन 75 साल के PM मोदी नहीं दिखते! 😂
कितनी गन्दी और गिरी हुई भाषा में बात करते हैं वो
पवन जी ने आज मेरे मन की बात कह दी।
ये राहुल गांधी की नई कांग्रेस है साहब…
जिस भाषा में बात करोगे, जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा!
ईंट का जवाब पत्थर से मिलेगा, वो भी करारा! 🔥
मोदी सरकार का नया खेल देखिए!
आप IDBI–Fairfax डील की क्रोनोलॉजी समझिए…
₹94.42 — पहली बेंचमार्क कीमत
₹75 — सबसे ऊँची बोली भी बेंचमार्क से नीचे!
₹75.99 — फिर बेंचमार्क ही घटा दिया!
₹81 — Fairfax की बोली मंजूर!
जब मनपसंद स्टूडेंट फेल हो गया, तो उसे पास कराने के लिए पेपर नहीं, पासिंग मार्क्स ही कम कर दिए 😀
अब इसे निजीकरण समझो या मनपसंद खरीदार के लिए नियम बदलने का खेल,मैं कम लिखा आप ज्यादा समझना
#IDBINotForSale
बैंक कर्मचारियों की मेहनत से बैंक मुनाफे में आया, अब मोदी सरकार उसे बेचने चली है!
जननायक राहुल गांधी IDBI बैंक कर्मचारियों के समर्थन में उतर आए हैं। कर्मचारियों को पत्र लिखकर मोदी सरकार की निजीकरण नीति पर सवाल उठाए हैं।
सालों तक सरकारी बैंकों का विलय करके सार्वजनिक बैंकिंग को कमजोर किया, अब IDBI बैंक को कनाडाई कंपनी को बेचने की तैयारी!
मेहनत कर्मचारियों की, संपत्ति जनता की और फैसला मोदी सरकार का! आखिर फायदा किसका?
सरकारी संपत्ति जनता की है, मोदी जी की निजी जागीर नहीं!
#घोरकलजुग @RahulGandhi #IDBINotForSale
नागपुर में कांग्रेस ने संघ का गढ़ ढहाया, तो काशी को क्योटो बनाने का सपना दिखाने वाले मोदी को जनता ने आईना दिखा दिया।
चुनाव आयोग और प्रशासन की पूरी ताकत झोंकने के बाद भी गोरखपुर में बीजेपी महज़ 307 वोटों से जीत पाई। ज़रा सोचिए, अपने ही गढ़ में क्या हालत हो गई!
नागपुर में कांग्रेस का परचम, काशी में सपा की जीत बम बमऔर गोरखपुर में योगी हो गए बेदम
बीजेपी के अभेद्य किले दरकने लगे हैं। अब तो व्हाट्सऐप अंकल भी सवाल पूछने लगे हैं! 😂
दिल्ली के व्यापारी संगठनों को मेरी मुफ्त सलाह है।
1 नवंबर को INDIA की रैली से पहले बाजारों में डिस्काउंट का ऐलान कर दीजिए।
लाखों की भीड़ आएगी, बाजारों में रौनक बढ़ेगी और कारोबार भी चमकेगा।
आम के आम, गुठलियों के भी दाम! 😎
#ChaloDilli
अंकिता भंडारी केस वाले गौतम को राज्यपाल बना दिया और एपस्टीन पूरी को राज्यसभा भेज रहे है जिस आदमी की जाँच होनी थी उसको ताज पहना रहे है अच्छे दिन तो नहीं लेकिन गंदे दिन जरूर आ रहे है #घोरकलजुग
The Modi government is so subservient to Washington that it is still shamelessly promoting a man whose links to convicted child sex offender and child trafficker Jeffrey Epstein warrant an independent investigation - not a Rajya Sabha seat or a ministerial berth.
Hardeep Puri has been missing in action as India grapples with an energy shock. No leadership, no reassurance - just one fuel price hike after another. He seemed prepared to fade into political oblivion.
But then his big brothers in America stepped in to prolong his career and his services to them, and Modi had to relent.
Epstein, energy crisis and economic pain. That is Hardeep Puri’s lasting legacy, irrespective of how many terms Modi gives him under American pressure.
A government that bows to America and a minister who fails to deliver for India. Modi’s double-engine failure in plain sight.
एक वक्त था, जब BJP वाले कहते थे कि देश का एजेंडा वो तय करते हैं।
आज राहुल गांधी ने देश का एजेंडा तय कर दिया है इसलिए शाह समेत सारे वोट चोर सड़क पर आ गए हैं!
राधिका खेड़ा जैसे लोग कभी हमारे साथ बैठकर BJP पर हंसते थे, आज खुद हंसी का पात्र बन गए हैं। 😂
वक्त-वक्त की बात है! 🎯
यूपी MLC चुनाव में बीजेपी योगी के गोरखपुर में और मोदी के बनारस में हार रही है
आगरा में जहाँ सारे विधायक BJP के हैं, वहाँ भी BJP हार चुकी है। अपने गढ़ लखनऊ में भी बीजेपी हार रही है प्रयागराज में सपा प्रत्याशी पिछड़ने के बाद अब आगे चल रहे हैं।
जनता वोट से हरा रही है, इसलिए अब बैरिकेडिंग लगाकर सीट चोरी के इंतज़ाम किए जा रहे हैं!
मौसम बदल रहा है सीट बेल्ट बांध कर रखिए
मोदी जाएगा..उसका तो... भी जाएगा #घोरकलजुग









