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Joined February 2022
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जिन स्त्रियों ने टपकती छत, आधे पेट भूख के बावजूद अपने पतियों को नहीं छोड़ा वो आज हमारी माताएँ हैं...!!!
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मैंने प्रकृति से ये भी सीखा कि नए पुष्पों को ईश्वर के चरणों में अर्पित होना चाहिए पर स्वयं के लिए गिरे पुष्प भी उतनी ही सुगंध देंगे जितने की नए, मैं टूटा एक पुष्प ही हूं जो न ईश्वर का हुआ न किसी व्यक्ति का, मैं अब समेट लेना चाहता हूं उन सभी गिरे पुष्पों को अपनेपन के लिए...!!!
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शाम होते ही कुछ अपरिचित लोग दस्तक देते हैं मेरे दरवाजे पर मैं थके हुए मन से दरवाजा खोलता हूँ, दरवाजा खुलते ही वे लोग मुझसे लिपट जाते हैं और मुस्कराने लगते हैं मैं उनको सहलाता हूँ बहलाता हूँ नाम पुछता हूँ हार, उदासी, दुःख, निराशा वे नाम बताते हैं...
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मेरे हिस्से कभी नहीं आए वो तमाम दरवाजे जिन्हें खोल कर मैं तुम्हारा स्वागत कर सकूँ.. मेरे हिस्से आई ये अधखुली खिड़कियाँ, जिनसे मैंने केवल तुम्हारा जाना देखा...
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मुझे मृत्यु पर चार कंधे नहीं लगेंगे,मैं अंतिम समय में भी किसी पर भार नहीं बनूँगा,सिवाय हृदय के कहीं भी मेरी क्रूरता के साक्ष्य नहीं होंगे,मैं राख होकर भी किसी के दुःखों का प्रमाण नहीं बनूँगा,यदि मेरा जीव होकर भी जीवित न होना मेरा अभिमान है तो मृत्यु बाद भी मैं अभिमानी रहूंगा...
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मृत्यु कैसी होनी चाहिए, अपने प्रेम की बाहों में सोते हुए प्राणों का त्याग सबसे सुखद तरीका मानूँगा.. बीते कुछ घंटों पहले भर पेट खाकर, जी भर प्रेम करने के बाद प्रेयसी की छाती पर सोते हुए मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है...!!!
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कुछ लोग हमें जीवन में यूँ भी मिलते हैं कि एक दिन अचानक से वे कहीं गुम हो जाते हैं, आपको जो उनसे सीखना था, समझना था उससे परिपक्व हो चुकते हो तो ब्रह्मांड स्वयं आपको उससे विरक्त कर देता है क्योंकि उसका आपके जीवन में काम ख़त्म हुआ वो साथ हो फिर भी उससे मिलना दोबारा नहीं होता...!!!
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पुरुष के लिए सबसे कठिन पल तब होता है, जब स्त्री कहती है मैं आगे बढ़ चुकी हूँ और अब किसी और की हूँ... तुम भी आगे बढ़ जाओ वो शायद नहीं जानती कुछ पुरुष नदी के किनारों जैसे होते हैं, जिन्हें छोड़कर नदी तो आगे बढ़ जाती है, पर पीछे छूटा किनारा उसी पानी की याद में उम्रभर सूखता रहता है..
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तुम्हारी स्मृतियाँ जो मेरे भीतर आज भी जीवित हैं, उनको अब मैं तुम्हें सौंप देना चाहता हूँ.. सौंप देना चाहता हूँ स्वयं के उन टुकड़ों को, जो हमेशा मुझसे मेरी हार का कारण पूछते हैं.. इस बोझ को अब किसी अनजान मोड़ पर रख कर "मुक्त" होना चाहता हूँ...
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मैं एक बार इतनी तेज जल लेना चाहता हूँ, कि मेरे घर में दोबारा कभी अँधेरा ना हो...
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तुम हार जाना.. लोग कहेंगे कि रुकना मत रुके तो हार जाओगे जीतना है तो दौड़ते रहो..पर जरुरत पड़ने पर तुम रुक जाना, साँस लेना, सँभालना खुद को, आस-पास देखना और मुस्कुराना अगर ये हार है तो तुम हार जाना...
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मुझे बांध सकती है दुनियां किसी भी दायरे में - कि मैं तुम्हें पुकार ना सकूँ तुमसे मिल ना सकूँ.. पर दुनियां ऐसा कोई भी दायरा नहीं बना सकती - कि मैं तुम्हें प्रेम ना कर सकूँ, तुम्हें स्मरण ना कर सकूँ...
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तुम मेरे सागर की इकलौती मछली हो, मेरे आकाश का इकलौता तारा हो, मेरे ब्रह्मांड का इकलौता ग्रह हो, मेरे लिए हमेशा तुम ही हो.. और हमेशा रहोगी भी...
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पता है कुछ प्रतिक्षाएं जन्मों तक चलती हैं, जैसे मेरी तुम्हारे लिए है.. इस जन्म ना सही पर कहीं किसी और जन्म में मैं मिलूंगा तुम्हें तुम्हारे कुल में जन्म लेकर, तुम्हारी जाति का होकर, मैं एक क्षीण सी भी कमी नहीं छोड़ूंगा तुम्हारा सदा के लिए हो जाने को...!!!
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मैं उस साथी को प्रेम मानता हूं जब वह आपके द्वारा भोगे गए दुःखों का सम्मान करे, आपको रो सकने की स्वतंत्रता दे उसके लिए अपना कंधा बढ़ाए, अपने आँचल से आपके आँसुओं को सोख ले, बिन कुछ कहे आपकी पीड़ा का सहायक हो जाए.. मुझे लगता है हमें दुःख बखान करने के लिए प्रेम की आवश्यकता होती है..
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प्रेम में पड़े मनुष्य की दो मानसिकता होती हैं... एक यह कि, यदि मेरे पास मेरा प्रेम है, तो मैं सारे ब्रह्मांड की खुशियाँ छोड़ दूँगा, और दूसरी यह कि, यदि मेरे पास मेरा प्रेम है, तो मैं उसके जीवन में पूरे ब्रह्मांड की खुशियाँ उलेड़ दूँगा..
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समय की त्रासदी ही कहा जा सकता है उस विफलता को जो जवानी निगल गई प्रयासों की गोद में....!!
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यदि इतिहास का स्वयं को दोहराना सत्य है तो ये मानव सभ्यता के लिए कितना शर्मनाक हैं कि उसने कभी इतिहास का विश्लेषण ही नहीं किया...!!
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जिस रात मुझे तुम्हारी गोद में सर रखकर सोने का अवसर मिल जाएगा, उस रात मैं एक असल नींद सोऊंगा क्योंकि मेरे मन से तुम्हें खो देने का भय विलुप्त हो जायेगा...!!!
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तुम्हारे साथ जो जीया वो समय सुंदर था पर अब एक उम्र बितानी है तुम बिन, पर यदि दो पुष्प भी एक डाल पर खिले देखता हूं तो तुम याद आती हो, सारा समय चक्र किसी पिक्चर रील की तरह आंखों में तैरने लगता है, फिर मन में शोक और आंखो के कोरो पर तुम्हारे लिए प्रतीक्षा के निशान बचते हैं...!!!
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अतीत सबका मायने रखता है, परंतु कब तक ? केवल तब तक, जब तक वह दोहराया जा रहा हो,जब तक वह तुमको किसी भी तरह से बदल न पा रहा हो.. तब तक, जब तक वह तुमको विश्वसनीय न बना रहा हो, तब तक, जब तक वह तुम्हें तुम्हारी आत्मा का विश्लेषण करने पर मजबूर न कर रहा हो...
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