मैंने प्रकृति से ये भी सीखा कि नए पुष्पों को ईश्वर के चरणों में अर्पित होना चाहिए पर स्वयं के लिए गिरे पुष्प भी उतनी ही सुगंध देंगे जितने की नए, मैं टूटा एक पुष्प ही हूं जो न ईश्वर का हुआ न किसी व्यक्ति का, मैं अब समेट लेना चाहता हूं उन सभी गिरे पुष्पों को अपनेपन के लिए...!!!
मुझे मृत्यु पर चार कंधे नहीं लगेंगे,मैं अंतिम समय में भी किसी पर भार नहीं बनूँगा,सिवाय हृदय के कहीं भी मेरी क्रूरता के साक्ष्य नहीं होंगे,मैं राख होकर भी किसी के दुःखों का प्रमाण नहीं बनूँगा,यदि मेरा जीव होकर भी जीवित न होना मेरा अभिमान है तो मृत्यु बाद भी मैं अभिमानी रहूंगा...
कुछ लोग हमें जीवन में यूँ भी मिलते हैं कि एक दिन अचानक से वे कहीं गुम हो जाते हैं, आपको जो उनसे सीखना था, समझना था उससे परिपक्व हो चुकते हो तो ब्रह्मांड स्वयं आपको उससे विरक्त कर देता है क्योंकि उसका आपके जीवन में काम ख़त्म हुआ वो साथ हो फिर भी उससे मिलना दोबारा नहीं होता...!!!
पुरुष के लिए सबसे कठिन पल तब होता है, जब स्त्री कहती है मैं आगे बढ़ चुकी हूँ और अब किसी और की हूँ... तुम भी आगे बढ़ जाओ
वो शायद नहीं जानती कुछ पुरुष नदी के किनारों जैसे होते हैं, जिन्हें छोड़कर नदी तो आगे बढ़ जाती है, पर पीछे छूटा किनारा उसी पानी की याद में उम्रभर सूखता रहता है..
मैं उस साथी को प्रेम मानता हूं जब वह आपके द्वारा भोगे गए दुःखों का सम्मान करे, आपको रो सकने की स्वतंत्रता दे उसके लिए अपना कंधा बढ़ाए, अपने आँचल से आपके आँसुओं को सोख ले, बिन कुछ कहे आपकी पीड़ा का सहायक हो जाए.. मुझे लगता है हमें दुःख बखान करने के लिए प्रेम की आवश्यकता होती है..
रेत retweeted
समय की त्रासदी ही कहा जा सकता है उस विफलता को जो जवानी निगल गई प्रयासों की गोद में....!!
रेत retweeted
यदि इतिहास का स्वयं को दोहराना सत्य है तो ये मानव सभ्यता के लिए कितना शर्मनाक हैं कि उसने कभी इतिहास का विश्लेषण ही नहीं किया...!!
तुम्हारे साथ जो जीया वो समय सुंदर था पर अब एक उम्र बितानी है तुम बिन, पर यदि दो पुष्प भी एक डाल पर खिले देखता हूं तो तुम याद आती हो, सारा समय चक्र किसी पिक्चर रील की तरह आंखों में तैरने लगता है, फिर मन में शोक और आंखो के कोरो पर तुम्हारे लिए प्रतीक्षा के निशान बचते हैं...!!!

