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मेरी ये पुस्तक "एक नौकरीपेशा की डायरी" अमेजन किंडल एप पर उपलब्ध है।
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यूपी के धरातल का माहौल समझना है तो केवल खाद देने वाली सोसायटी के एक चक्कर लगा लें।
बहुतों के बहुत से भरम दूर हो जायेंगे।
एक बात तो स्पष्ट है कि यूपी चुनाव को लेकर यूपी वाले भाजपाई भी उदासीन हैं ।
और मुखर कौन हैं , बिहार वाले, mp वाले, गुजरात वाले, महाराष्ट वाले , राजस्थान वाले ।
जानते हो क्यों ??
क्योंकि यूपी वाले माहौल की जमीनी हकीकत देख रहे हैं ,
यूपी वाले इस सरकार की भी धरातल पर सच्चाई देख रहे हैं ,
इसलिए वो खामोश हैं क्योंकि अंदर से दिल गवाही नहीं दे रहा जिससे उनके अंदर जोश आ सके और वो उसी तरह से पार्टी के लिए समर्पित हो जाएं जैसे 2014 से लेकर 2019 तक हुआ करते थे ।
2022 के चुनाव में अंत में जाकर अधूरे मन से समर्थन कर दिए थे ।
लेकिन अब तो एकदम से निराश हो चुके हैं ।
खैर अन्य राज्य वाले , इस बार यूपी में आकर भाजपा को चुनाव जिताएंगे ।
वैसे याद आया तो बताते चलें।
भाजपा ने न यूजीसी बिल वापस लिए न कभी वापस लेने की बात की।
कोर्ट की वजह से रुका है।
कौन से सरकारी चपरासी को 45000 प्लस टी ए डी ए मिलता है?
कोई नया नशा मार्केट में आया है क्या जो मुझे न पता चला अभी तक?
8वां बेतन आयोग की असलियत, इससे प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों को क्या लाभ?
एक प्राइवेट नौकरी वाला लड़का 5 साल घिसता है, 2 बार कंपनी बदलता है, रात 9 बजे तक लैपटॉप पर रहता है तब जाकर उसकी सैलरी ₹45,000 होती है। वहीं सरकारी में 10वीं पास चपरासी को पहले दिन से ₹45,000 + DA + HRA + मेडिकल + पेंशन मिल जाता है। तो टैलेंट कहाँ जाएगा? जाहिर है सरकारी की तरफ।
दूसरा गुस्सा इस बात का है कि ये ₹45,000 टैक्स पेयर के पैसे से आएगा। वही प्राइवेट वाला जो ₹45k कमाता है वो 30% टैक्स देता है और उसी टैक्स से सरकारी सैलरी बढ़ती है।
तीसरी बात काम की। प्राइवेट में काम नहीं किया तो बाहर। सरकारी में Pay Commission में सबका बराबर बढ़ेगा, काम करो या न करो।
लेकिन सच ये भी है 2016 में जो ₹18,000 था आज महंगाई में उसकी वैल्यू आधी रह गई है। सरकार को अपने 50 लाख कर्मचारियों को महंगाई से तो बचाना ही पड़ेगा। और वो चपरासी भी ऐसे नहीं बन जाता, 2 साल SSC की तैयारी करता है तब जाकर नंबर आता है।
हमारे देश में प्राइवेट सेक्टर को इतना कमजोर बना दिया गया है कि ₹45,000 भी लग्जरी लगता है। सरकार को सरकारी सैलरी घटाने पर नहीं, प्राइवेट की सैलरी और सिक्योरिटी बढ़ाने पर सोचना चाहिए।
उस लड़के का बिना कोई हिचक इनकाउंटर कर देना चाहिए बिना किसी सहानुभूति के।
और उसके बाप को किसी भी अर्जी फर्जी मामले में गिरफ्तार कर लेना चाहिए तुरंत।
दो मरी छिपकली बदबूदार
बिल्ली की पॉटी।
दरवाज़े का गोबर।
इन सबको साफ करना।
भंडरिया का पूरा सामान उठा के बाहर रखना।
भंडरिया में पोंछा लगाना और पूरा अगड़म बगड़म फिर वापस
भंडरिया में सही से रखना।
इस सब करने का क्या रेट चल रहा आजकल लेबर मार्केट में?
एक दोस्त ने पूँछा है।
Exx Cricketer retweeted
एक महिने मे भाग जाएगा। इतने भयंकर हालत है कि कर्मचारी या तो ड्यूटी पर होता है या आ कर सो जाता है। 80% कर्मचारी घर से दूर रहते हैं। ट्रांसफ़र तो जैसे होने ही बंद हो गए हैं। हर अधिकारी का ध्यान आते ही इस बात पर रहता है कि कर्मचारी रविवार या अपनी छुट्टी लेकर कुछ दिन चैन से ना रह ले
Exx Cricketer retweeted
के बुरे हालात है। अध्यापक की नौकरी भी नर्क जैसी बनतीं जा रही है। सरकारी नौकरियों के टार्गेट प्राइवेट एमएनसी को भी फेल कर रहे हैं। टार्गेट ऐसे मिलते हैं कि काम असंभव होता है। सरकारी बैक कर्मचारी, डाक कर्मचारी रात मे सो नहीं पा रहे हैं। सरकारी नौकरी कोई एमएनसी मे काम किए हुए आदमी
Exx Cricketer retweeted
अधिकतर सरकारी नौकरी ऐसी बनतीं जा रही है कि अधिकारी लोग सोचते हैं कि छोटे कर्मचारी अनाथ है। उनका कोई परिवार नहीं है। उन्हें तुम कभी भी, किसी भी दिन, किसी भी समय बुलाकर 24 घण्टे के दिन मे 25 घण्टे भी काम करा सकते हो। पुलिस, रेलवे, सरकारी डॉक्टर, प्राशासनिक सेवा के छोटे कर्मचारियों














