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Hello Guys Happy Republic day to all 🙂
So today I am going to present some data from census ,let's start from 2 pics ,one from post independence first census of 1951,and other from census 2011
मेरे प्लांट पर 54 लोग काम करते है
और सब जानते है कि मिश्रा जी
बहुत सीधे व सरल स्वभाव के बहुत अक्खड़ और दुर्जन व्यक्ति है
सुबह सुबह सबको जलेबी खिलाने का
मन हो गया मेरा
जिस लड़के को कहा जलेबी लाने को
वो लाया नहीं
अब आदत है मेरी सुवर बोलने की
࿗ Anभिज्ञ ࿗ retweeted
मुझे लगता था कि मैं अपने जीवन में लालू यादव से ज्यादा भ्रष्ट और बुरा सीएम कभी देख नहीं पाऊंगा फिर एक दिन मोहन यादव सीएम बन गया।
रामराज्य है। जय श्री मोदी तय श्री मोदी।
😅😀
सब बहुत गोलू मोलू से है
मजा आता है इनके साथ खेलने में
मुझे जिंदगी से हर दिन
बस इतना ही चाहिए है
😅
कभी कभी लगता है
जैसे मेरी जिंदगी गिटार के
उस न टूटे हुए तार जैसी है
जिसका एक ताल ऐसा है
इक तरंग है जिसमें
जो बाकी टूटे हुए तारो को
जुड़ने को वापिस ले आती है
हा वो तार ऐसा है
जिसे छू भर दो
तो वो अपने आप में
बजने लगता है
गिटार के टूटे हुए तारो
छूटे गए सुर तालों को
जोड़ने लगता है
😊
࿗ Anभिज्ञ ࿗ retweeted
ये जितनी भी महिलाएं,स्त्रियाँ या लड़कियां यहां है
ये भी है सोशल मीडिया पर
ये 90% वही है जिन्हें अटेंशन चाहिए
हा इनमें से कुछ को कुछ और भी चाहिए
जैसे कि ब्याहता को एक कथित मित्र
हा मतलब जिससे वो मन की वो बात कर सके,समझ जाओ
अनब्याही को बस अनुभव चाहिए
और कुछ तो बस इसलिए है कि
࿗ Anभिज्ञ ࿗ retweeted
वक्त हर ज़ख्म भर देता है, शायद इंसान को बदल भी देता है।
आज बाजार में पापा के एक पुराने दोस्त अचानक दिख गए। कभी दोनों परिवारों में बेहद करीबी थी। उनकी बेटियाँ मुझे राखी बाँधती थीं। फिर एक आर्थिक धोखे ने दो परिवारों के बीच ऐसी दूरी पैदा की कि पिछले 12-15 सालों से कोई बातचीत नहीं हुई।
आज अचानक नज़रें मिलीं तो सामने वही शख्स थे, लेकिन वक्त ने उन्हें कितना बदल दिया था। आधे बाल झड़ चुके थे, बाकी सफेद हो गए थे। चेहरे पर झुर्रियाँ थीं और आँखों में थकान। उन्हें देखकर बरसों पुराना गुस्सा न जाने कहाँ चला गया। मन में बस एक अजीब सी दया और अपनापन महसूस हुआ।
मैं आगे बढ़ा, उनके पैर छुए और हालचाल पूछ लिया। शायद उन्हें भी इस मुलाकात की उम्मीद नहीं थी। वे भावुक से हो गए।
उस पल मुझे अपने किए का कोई अफसोस नहीं, बल्कि एक अजीब सा सुकून मिला। जो हुआ, वह अपनी जगह था। शिकायतें भी अपनी जगह थीं। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर अब उस पुराने मनमुटाव को ढोने का क्या मतलब?
आखिर वक्त सबको बदल देता है। कुछ रिश्ते भले वापस पहले जैसे न हों, लेकिन मन की कड़वाहट हमेशा बनाए रखना भी जरूरी नहीं।
वक्त सचमुच हर ज़ख्म भर देता है। कभी-कभी इतना कि जिनसे मिलने का ख्याल भी नहीं आता था, उन्हें देखकर मन में गुस्से की जगह दुआ निकलती है।
हम आजकल हरदोई जिले के एक कस्बे में रहते है और काफी खुला इलाका है ये
सुबह और शाम को बढ़िया ठंड लगती है
तो ऑफिशियली अब ठंड का आगमन हो चुका है मेरे लिए
दिसंबर आने तक अब से अल्टरनेट डेज़ पर नहाया जाएगा
और आज वो अल्टरनेट डे है
अब से खुशबू का इस्तेमाल ज्यादा किया जाएगा
😒
आज की कमाई 😍
इतने गुलगुले इतने क्यूट
20 अंडे तो खा ही गए
पर मजा आया
शायद मैं बस इसी सब के
लिए ही कमाता हूं
😅
बंदर और गाय भी बहुत है
मेरे पास अब
बस फोटो नहीं डालता
मै जाले साफ करता हूँ
पर मकड़ियों को
बचा कर रखता हूँ
प्रकृति के साथ समन्वय बना कर रखना
बस वही कर रहा हूँ 🙂
मुझे अब किसी से भी
कोई शिकायत न रही
ऐसा कुछ बचा नहीं
जिसे पाने की चाहत रही
गिले शिकवे कुछ है नहीं
तो अब मेरी किसी से
कोई अदावत भी नहीं
हा अगर कोई मन में
अब भी बैर रख कर बैठा हो
तो वो जानने की चाहत भी नहीं
बस मिट्टी में मिल जाऊं इत्मीनान से
इससे ज्यादा अब
और कोई चाहत नहीं
🙂😊
ये जितनी भी महिलाएं,स्त्रियाँ या लड़कियां यहां है
ये भी है सोशल मीडिया पर
ये 90% वही है जिन्हें अटेंशन चाहिए
हा इनमें से कुछ को कुछ और भी चाहिए
जैसे कि ब्याहता को एक कथित मित्र
हा मतलब जिससे वो मन की वो बात कर सके,समझ जाओ
अनब्याही को बस अनुभव चाहिए
और कुछ तो बस इसलिए है कि
कि स्त्रियां स्वयं की मानसिक दासता और पूर्वाग्रहों से ही आज तक मुक्त न हो पाई है
तो जो स्वयं से मुक्त न हो पाया
उसे कोई मुक्त नहीं कर सकता
और हा
स्त्री का चरित्र पुरुष कभी निर्धारण नहीं कर सकता
वो स्वयं स्त्री का आचरण ही करता है
ऐसा सब @vijyant_khatri ने हमे लिख कर भेजा था 😒
और इस पोस्ट के लिए @vijyant_khatri ने हमे अभी 28 रुपये भेजे भी है 2 छोटी गोल्फलेक पीने के लिए 😑
मुझे अब ये जमाना रास नहीं आता
लोग जानते है एक दूसरे को
मगर अब पहचानना नहीं आता
खुद में कैद लोगो से
क्या ही बात की जाए
वो कभी सच नहीं बोलेंगे
तो किस्से बात की जाए
लोग अब खुद का सच भी
बोलने से डरते है
सब एक जिंदा मुर्दे की तरह
आगे चलते रहते है
किस दौड़ में है
ये उन्हें भी पता नहीं






