' महावीर स्वामी ' मुगतें पहोच्या , ' गौतम केवलज्ञान रे💞, "।
धन्य ' अमावस्या ' दिवाली म्हारे, वीर प्रभु निर्वाण रे😭' ।
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Replying to @TanviSolanki_
'गुरु-राग' (अति-आसक्ति) का अंतिम बंधन तोड़ने के लिए।
और
गौतम स्वामी को उसी क्षण उन्हें गहरा बोध हुआ की
"भगवान तो पूर्ण वीतराग और निष्काम हैं। उनका न किसी से राग है, न द्वेष। कमी भगवान में नहीं, मेरी अपनी आसक्ति (मोह) में है।" केवलज्ञान 💞
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🪔 *दिवाली प्रवचन* 🪔
*क्रमांक, 9*
*श्री वीर प्रभु का जीवन* और उनके अंतिम क्षण
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प्रभु वीर ने जब जान लिया कि अब,
*मेरा निर्वाण काल निकट है,*
तो श्री वीर प्रभु पुनः
अपापानगरी में पधारे,
उस समय वह नगरी मज्झिमपावा अर्थात
मध्यमपावा के नाम से प्रसिद्ध थी,
*वहां श्री प्रभु वीर ने*
*हस्तीपाल राजा की चुंगी (कर) शाला में अंतिम चातुर्मास किया,*
श्री प्रभु वीर ने पावापुरी में जिस स्थल पर धर्म शाशन की स्थापना की,थी,
उसी स्थल पर पुनः ,
*श्री प्रभु वीर की अंतिम देशना के लिए अंतिम समवसरण की रचना हुई थी,*
*जब पहली बार प्रभुवीर वहां पधारे थे,*
तब उनका चौविहार छट्ठ था,
*पारणा बाकी था,*
और अभी पधारे तब चौविहार छटठ का प्रथम उपवास था,
*श्री प्रभुवीर कि ये अंतिम देशना थी,*
*वह अविरत रूप से सोलह प्रहर,अर्थात अड़तालीस घंटे तक किसी भी प्रकार के विराम से चलने वाली थी,*
श्री प्रभुवीर की उम्र बहत्तर वर्ष थी,
*चौविहार छट्ठ का व्रत था,*
निरंतर एक योजन के समवसरण में देव, मनुष्य,
तिर्यंच आदि सभी को उनकी भाषा में समझ आये,
*इस प्रकार से प्रभु वीर देशना देने वाले थे,*
श्रोताओं को भी चौविहार छट्ठ होने वाला था,
*इसके बावजूद श्रोता छोटी बड़ी हर उम्र के थे,*
उन्हें मात्र सुनना था,
*उसमें भी सिर्फ प्रभुवीर के अतिशय का प्रभाव काम करने वाला था,*
जबकि श्री प्रभुवीर की उम्र बहत्तर वर्ष की थी,
*जीवन काल के अंतिम दो दिन थे,*
और प्रभुवीर को निरंतर अड़तालीस घंटे तक बोलना था,
*श्री प्रभुवीर बोलते गए,*
सभी के मन के संशय का निवारण एक साथ एक एक शब्द से ही मिटता गया,
*सभी के कानों में अमृत का संचार हो रहा था,*
पूरे शरीर में अमृत बह रहा हो, ऐसा अनुभव हो रहा था।
6 महीने की भूख प्यास मिट जाए, *ऐसी श्री प्रभु वीर की वह देशना थी।*
*प्रभु वीर की अंतिम देशना में पुण्य के फल विभाग का वर्णन करते हुए पचपन अध्ययन कहे गए,*
पाप के फल विभाग का वर्णन करते हुए पचपन अध्ययन कहे गए,
*नहीं पूछे गए प्रश्नों के अनुसंधान में उनके उत्तर के रूप में छत्तीस अध्ययन कहे गए,*
यह अध्ययन,
अपृष्ठ व्याकरण के रूप में पहचाने जाते है,
*जिस जिसने यह देशना सुनी,* वह सभी धन्य हो गए,
*जिस जिसने यह संसार तारक दृश्य देखा,*
वह सभी धन्य हो गए,
*जिन्हें भी भव्य निस्तारण इस अवसर का,साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ वे सभी धन्य हो गए।*
*इसमें श्री गौतम स्वामी और श्री सौभाग्यनिधि सुधर्मा स्वामी ये दो गणधर भगवंत भी उपस्थित थे,*
बाकी के नौ गणधर भगवंतों ने तो इस घटना से पूर्व ही,
*प्रभु वीर की आज्ञा प्राप्त करके,*
राजगृही नगरी के वैभारगिरी पर्वत पर जाकर एक माह का अनशन करके मोक्ष प्राप्त कर लिया था।
*श्रवण श्रेष्ठों में चरम केवली बनने का जिन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ था वे,* अभी अभी दीक्षित हुए श्रेष्ठि पुत्र जम्मू स्वामी थे,
*और साथ ही साथ उनकी पाट पर आकर,*
सिर्फ प्रभु वीर की तीसरी पाट की शोभा बढा़ने वाले,
*और जम्बूस्वामी के*
*शिष्यरत्न को समर्पित* *राजपुत्र प्रभवस्वामी भी थे,*
प्रभु वीर के बड़े भाई
नंदीवर्धन तथा बहन सुदर्शना भी यहाँ उपस्थित थे।
*जबकि अठारह गणतंत्र के हस्तिपाल आदि अठ्ठारह राजा भी उपस्थित थे,*
इनमें से एक राजा पुण्यपाल भी थे, *जिन्हें श्री प्रभु वीर के हाथों से,* अंतिम संयम का दान प्राप्त करने का सौभाग्य मिलने वाला था,
*वे सभी धन्य हुए थे इसमें दुर्भाग्य से हम कहीं नहीं थे।*
*वीर विजय जी महाराज* ने हमारे इस दुर्भाग्य को कोसते हुए लिखा है कि,
*सुलसादिक नव जण ने जिण पद दीधुं रे,*
*कर्म रे ते वेला वसियो वेगलो,*
(सुलसा आदि नौ व्यक्तियों को अपने तीर्थंकर पद का दान दिया लेकिन दुर्भाग्यवश मैं उस समय कहीं और जाकर बसा था)
*क्रमशः*
सपना सजाव्या ता तुज मिलन ना,
आजे आंसू वही रहया तुज विरह ना।
वचनो आप्या ता साथे रेहवा ना,
शब्दों रहया पण मलयो साथ ना।
केम..... चाल्या गुरुवर, अनाथ बनावी अमो ने😭
(दीपावली)
महावीर स्वामी का मोक्ष दिन💞
गौतम स्वामी का केवलज्ञान दिन💕
Happy Diwali💕💞
Wishing You & Your Family A Joyous & Prosperous Diwali. May This Diwali Brighten Your Life With Happiness Health & Wealth❤️❣️
अंश हुं बनुं तारो, सैयंम वंश बनुं जयकारो।
गुरु ' गौतम ' ना ध्याने गौतम बनवुं छे म्हारे।
गौतम स्वामी को केवलज्ञान: भगवान महावीर के मोक्ष जाने के बाद, उनके प्रथम गणधर गौतम स्वामी का मोह दूर हुआ और उसी शाम उन्हें पूर्ण ज्ञान यानी केवलज्ञान की प्राप्ति हुई।
'महावीर' का निर्वाण कल्याणक दिवस' और ' ज्ञान ' का दीप जलाने के पर्व✔️
महावीर स्वामी का मोक्ष: कार्तिक अमावस्या (दीपावली) के दिन प्रातः काल भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण (मोक्ष) हुआ और उन्हें अजर-अमर पद प्राप्त हुआ।
🙏
In PUT SIDE
In last 2 Days
#Heavy Loss Happen
Anyways, "KARARA JAWAB MILEGA"
I Will Back With 5x 7x After DIWALI 💕
Not Expecting This Kind Of Rise In #Market
Without Reason, RISE & FALL #Dangerous Market
Done Well In last 50 Days, Failure come in 2 Days
#BULLS ENJOYYYY #DIWALI ✔️
#BEARS COMINGGG SOOOOOOON ✔️
MID-NOV TO FEB 2027
#REDWATERFALL ✔️✔️✔️✔️❣️
#NIFTY TGT INTACT 20020---18888




