
( admin :- @dimahKousar 👈 ) Official account of Indian Muslim Unity. 🏛️ An initiative against the oppression of Muslims. Raise your voice for change! 🎙️
Lynchingstan
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#FreeSharjeelImam
जेल में बंद JNU के पूर्व छात्र शरजील इमाम ने भारत के लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर एक बार फिर देश में बहस छेड़ दी है।
भारत में लगभग 20 करोड़ मुसलमान रहते हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी आबादी को देश की सत्ता, संसद और नीतियां बनाने की प्रक्रिया में उसकी आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल रहा है?
The Quint को दिए इंटरव्यू में शरजील इमाम ने भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान और चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट चुनाव प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अभाव में मुस्लिम समुदाय स्थायी राजनीतिक हाशिये पर जा सकता है।
उन्होंने इकबाल और जिन्ना की उन आशंकाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें मुसलमानों के राजनीतिक हाशियाकरण की संभावना जताई गई थी। उनके अनुसार, विभाजन से पहले भी मुसलमानों को उभरते राष्ट्रवादी विमर्श में एक अलग और नापसंद अल्पसंख्यक के रूप में देखा जाता था।
शरजील इमाम और उमर खालिद समेत कई मुस्लिम छात्र एवं कार्यकर्ता 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े साजिश के आरोपों में लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में आरोपों का अंतिम फैसला अदालत को करना है। उनकी लंबी हिरासत ने न्याय, जमानत और मुकदमे से पहले कैद रखने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
वहीं, 2019 का नागरिकता संशोधन कानून (CAA) भी बहस का अहम विषय है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए छह गैर-मुस्लिम धार्मिक समुदायों के पात्र प्रवासियों को नागरिकता का विशेष प्रावधान देना और मुसलमानों को इससे बाहर रखना कानून की धर्मनिरपेक्षता पर सवालों का कारण बना है।
लेकिन इस पूरी बहस का सबसे बड़ा सवाल मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक हिस्सेदारी है।
क्या लोकतंत्र का मतलब सिर्फ चुनाव के दिन वोट डालना है? क्या किसी समुदाय की जिम्मेदारी सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए भीड़ जुटाना और चुनावी समर्थन देना है? या उसे संसद, विधानसभा और सत्ता के फैसलों में भी बराबर की जगह मिलनी चाहिए?
भारत के लोकतंत्र की मजबूती का आकलन केवल चुनाव कराने से नहीं, बल्कि यह देखने से भी होना चाहिए कि उसमें अल्पसंख्यकों को कितनी प्रभावी भागीदारी और प्रतिनिधित्व मिलता है।
💔 550 मुस्लिम परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए गए!
असम के धुबरी जिले में 1 नवंबर को प्रशासन ने 50 से अधिक बुलडोजरों के साथ करीब 550 बंगाली मुस्लिम परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई से लगभग 4,000 लोग प्रभावित हुए।
जरा सोचिए, जिन घरों में बच्चों की हँसी गूंजती थी, जहाँ परिवारों ने पूरी जिंदगी की यादें संजोई थीं, आज वहाँ सिर्फ मलबा बचा है। किसी के सिर से छत छिन गई, तो किसी के बच्चों का बचपन बेघर हो गया।
सवाल सिर्फ 550 घरों का नहीं, उन हजारों जिंदगियों का है जो इस कार्रवाई से प्रभावित हुई हैं।
विकास और कानून के नाम पर किसी भी इंसान की जिंदगी, उसके सम्मान और उसके आशियाने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर प्रभावित परिवार को न्याय और मानवीय गरिमा के साथ पुनर्वास मिलना चाहिए।
3 नवंबर | यौम-ए-विलादत 🤍
ग़ज़वा-ए-हिंद के राजा, शेर-ए-हिंद व सुल्तान-ए-अज़ीम, हज़रत मुहम्मद औरंगज़ेब आलमगीर रहमतुल्लाह अलैह।
अगर चीन को किसी ने औक़ात बताई थी, तो वो मुग़ल सल्तनत के बादशाह औरंगज़ेब आलमगीर थे।
कहते हैं, उन्होंने चीन में घुसकर मानसरोवर छीन लिया था... 🦁⚔️👑
औरंगज़ेब को यूँ ही 'आलमगीर' नहीं कहते! वो बादशाह जिसने कभी हार मानना सीखा ही नहीं, जिसका नाम फ़तह और बहादुरी की पहचान बन गया। 🤍
🚨 उत्तराखंड के देहरादून में बजरंग दल ने मस्जिद का निर्माण कार्य रुकवाया!
शिमला बाईपास स्थित सेवला कलां इलाके में मस्जिद की तीसरी मंज़िल पर निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान विकास वर्मा के नेतृत्व में बजरंग दल के सदस्य मौके पर पहुँचे और काम ज़बरदस्ती रुकवा दिया।
बजरंग दल ने मस्जिद के निर्माण को अवैध बताते हुए सड़क पर अतिक्रमण का आरोप लगाया। साथ ही एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई न होने पर खुद कदम उठाने की धमकी दी।
मौके पर MDDA, पुलिस और नगर निगम के अधिकारी पहुँचे, लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया।
सवाल है—कानून के राज में किसी संगठन को निर्माण कार्य जबरन रुकवाने और खुद कार्रवाई की धमकी देने का अधिकार कैसे मिल सकता है?
गुजरात से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। गोहत्या के आरोप में 3 मुस्लिम युवकों को अदालत ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। इस फैसले में अदालत ने हिंदू धार्मिक ग्रंथों का भी हवाला दिया।
आखिर न्याय के फैसलों में धार्मिक ग्रंथों का हवाला देने की जरूरत क्यों पड़ रही है? भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां न्याय का आधार संविधान, कानून और सबूत होने चाहिए।
क्या किसी भी मामले में सज़ा सुनाते समय धार्मिक मान्यताओं को आधार बनाना उचित है? यह सवाल सिर्फ इन तीन युवकों का नहीं, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों का भी है।
muslimmirror.com/gujarat-cou…
जब ग़ाज़ा में नरसंहार शुरू हुआ था, तब लाखों इंडोनेशियाई लोग फ़िलिस्तीन के समर्थन में सड़कों पर उतरे थे।
आज वही इंडोनेशियाई जनता भ्रष्टाचार, बढ़ती महँगाई, जंगलों में लगी आग और सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ सड़कों पर है।
इंडोनेशिया के इन प्रदर्शनों को दुनिया तक पहुँचाइए। जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जाना चाहिए
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। ऐसे वक्त में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को ऐसा अध्यक्ष चुनना चाहिए, जो छात्रों के मुद्दों को मजबूती से उठाए, सरकार की आँखों में आँखें डालकर अपने हक़ की बात करे।
जो देश और दुनिया में सताए जा रहे मुसलमानों की आवाज़ बने, उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ा रहे।
ऐसा नेतृत्व, जो ज़ुल्म के खिलाफ़ आवाज़ उठाने और इंक़लाब लाने का हौसला रखता हो!
🤍 नौमान अशरफ — AMUSU अध्यक्ष पद के उम्मीदवार
जब कोई पूछे AIMIM भारत के हर स्टेट में क्यों जरूरी है..!!
तब उनके मुहं पर ये फोटो मरना, जब जामिया मिलिया इस्लामिया के बच्चे दिल्ली पुलिस के गुंडों से लड़ रहे थे तब उनके बीच AIMIM के दिल्ली से प्रदेश अध्यक्ष @shoaibJamei साहब बैठे थे ना की कांग्रेस या किसी अन्य सेक्युलर दल का कोई नेता उन बच्चों से मिलने तक नहीं पहुंच पाया..!!
रेस कोर्स की मस्जिद के गेट पर भी हुदा जरीवाल के साथ शोएब जमेई ही नजर आए थे, कोई सेक्युलर दल का नेता वहाँ भी नहीं पंहुचा था..!!
इसलिए मुसलमानो को समझना चाहिए AIMIM हर जगह क्यों जरूरी है, मुसलमानो को उत्तरप्रदेश इलेक्शन मे समाजवादी या कांग्रेस को छोड़कर AIMIM को मजबूत करना चाहिए इंशाअल्लाह हालात बेहतर होंगे..!!
@asadowaisi, @aimim_national, @AadilHasanAdv1
उत्तराखंड | देहरादून
8 परिवारों के मकान ध्वस्त, करीब एक दर्जन परिवारों को नोटिस। आखिर इन परिवारों के रहने और पुनर्वास की जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रशासन को निष्पक्ष जांच, कानूनी सहायता और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
indiatomorrow.net/2026/10/26…
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में 20 अक्टूबर की आधी रात को 25 से 30 अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर एक मदरसे और कई मुस्लिम परिवारों के घरों में तोड़फोड़ की।
मदरसे की शिकायत के मुताबिक, हमलावरों ने लाठियों और लोहे की छड़ों से मदरसे की किताबों, दस्तावेज़ों और सामान को नुकसान पहुंचाया।
आरोप है कि मदरसे की दीवारों पर "जय श्री राम" और "जय मां भवानी" जैसे नारे लिखे गए। मदरसे के शिक्षकों और छात्रों को धमकियां भी दी गईं।
आसपास रहने वाले मुस्लिम परिवारों ने भी अपने घरों में तोड़फोड़ और धमकियां मिलने की शिकायत की है।
#BengalMuslims
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का वीडियो साझा करते हुए ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की बात कही।
लेकिन सवाल यह है कि क्या नवरात्रि और गणेश विसर्जन के दौरान बजने वाले डीजे पर भी इसी तरह कार्रवाई हो रही है?
ध्वनि प्रदूषण रोकना है तो नियम सबके लिए समान होने चाहिए, न कि सिर्फ मुसलमानों के लिए!
ध्वनि प्रदूषण के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाना और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना बंद होना चाहिए। उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को देखते हुए ऐसी राजनीति के जरिए हिंदू मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
अफसोस कि धर्म के नाम पर होने वाली इस राजनीति में लोग उलझते जा रहे हैं, जबकि असली मुद्दे पीछे छूट रहे हैं!
मस्जिद को शहीद करने का नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन हम ये होने नहीं देंगे सभी भाई अपनी मस्जिद बचाने के लिए ट्विटर के ट्रेंड #SaveRaceCourseMasjid से जुड़ेंगे और ट्वीट करेंगे
🕌 दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद का इतिहास जानिए!
🔹 1934 के ब्रिटिशकालीन रिकॉर्ड में इस मस्जिद का ज़िक्र मिलता है। 🔹 1977 के दिल्ली गजट में मस्जिद का नाम दर्ज होने का दावा जमीयत उलमा-ए-हिंद ने किया है। 🔹 NDMC की हेरिटेज सूची में भी मस्जिद दर्ज होने की बात कही गई है। 🔹 2001 के संसदीय रिकॉर्ड में भी रेस कोर्स मस्जिद का उल्लेख मिलता है। 🔹 अब मस्जिद को खाली करने का नोटिस दिए जाने और बिजली-पानी काटे जाने की खबर सामने आई है।
मस्जिद के निर्माण का सही साल जानने के लिए अभी और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों की ज़रूरत है।
इतिहास और दस्तावेज़ों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
👉 #SaveRaceCourseMasjid 👈
👉 @Ind_MuslimUnity 👈
Location: Chandpara, North 24 Parganas, West Bengal
On October 8, members of the Hindu Jagaran Manch visited a biryani shop formerly known as “Haji Biryani,” which is now called “Kolkata Bhai Bhai Biryani.”
They demanded that the shop restore its former name and provide details about the source and quality of the meat used in the biryani.
They also demanded that the owner's name and contact details be displayed prominently and that the name match the one on their Aadhaar card to make the owner's religious identity clear.
Additionally, they demanded that the shop purchase meat from locally owned Hindu shops that sell jhatka meat.
असम मे एक और मदरसे को अवैध बता कर गिरा दिया गया..!
भारत में मदरसों को जिस तरह से शहीद किया जा रहा है ये बेहद शर्मनाक बात है..!
आखिर मुस्लिम समाज को इस तरह क्षती-ग्रस्त करना कहाँ तक सही है, क्या मुसलमानो को कमजोर करने से भारत कमजोर नहीं हो रहा है, क्यूंकि मुसलमान भी इस देश का एक अंग है और शरीर का एक अंग अगर कमजोर रहेगा तो पूरा शरीर कमजोर रहेगा..!!
फिलिस्तीन की खिलाड़ी मरियम बशारत ने पोलैंड में आयोजित विश्व कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। 🥇🇵🇸
मरियम ने फाइनल मुकाबले में स्पेन की नोआ लोपेज गोंजालेज को 3-1 से हराया।
मरियम फिलहाल जूनियर महिला अंडर-66 किलोग्राम कैटेगरी में दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी हैं।
Congratulations Mariyam Basharat ❤️
पिंकी चौधरी को आम आदमी के पैसे से सुरक्षा दी जा रही है....
क्या ये नफरत मंत्री है भाजपा पार्टी से इसलिए उनको सुरक्षा मिल रही है..?
देश का दुर्भाग्य है की नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री है.!!
जहां एक चोर को बचाने के लिए, महिलाओ की इज़्ज़त के साथ खेला जा रहा है
#WhereIsNajeeb?
10 साल से अपने बेटे नजीब अहमद का इंतजार कर रही हैं फातिमा नफीस,
JNU में छात्रों ने निकाला मार्च..!!
उत्तर प्रदेश के बदायूं की रहने वाली फातिमा नफीस पिछले 10 साल से अपने बेटे नजीब अहमद के लौटने का इंतजार कर रही हैं। उनके पिता ने घर पर तीनों बेटों के नाम की नेमप्लेट लगाने की योजना बनाई थी, ताकि जब नजीब वापस आए तो वह अपने घर को पहचान सके।
फातिमा ने 2023 में मकतूब से कहा था, “जब भी वह वापस आएगा, उसे अपना घर पहचानने में एक सेकंड भी नहीं लगेगा। वह बच्चा नहीं है, उसे अपने घर से बहुत लगाव है।”
बुधवार को नजीब के लापता होने के 10 साल पूरे होने के करीब छात्रों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में मार्च निकाला। छात्रों ने सवाल उठाया कि आखिर नजीब कहां है और इतने साल बाद भी उसका कोई पता क्यों नहीं चला?
बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA), फ्रेटरनिटी मूवमेंट और मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) के छात्रों ने यह मार्च निकाला। उन्होंने नजीब के लापता होने के मामले में जवाबदेही तय करने और न्याय की मांग की।
नजीब JNU में MSc बायोटेक्नोलॉजी के पहले साल के छात्र थे। 15 अक्टूबर 2016 को वह अचानक लापता हो गए थे। इससे एक रात पहले माही-मांडवी हॉस्टल में ABVP से जुड़े कुछ छात्रों द्वारा उनके साथ कथित मारपीट किए जाने की बात सामने आई थी।
इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT), क्राइम ब्रांच और बाद में CBI ने की, लेकिन कोई भी नजीब का पता नहीं लगा सका।
करीब 10 साल बीत जाने के बाद भी नजीब कहां हैं, यह सवाल आज तक अनुत्तरित है।
यह मार्च बराक हॉस्टल से शुरू होकर विश्वविद्यालय के मुख्य गेट तक पहुंचा। इस दौरान छात्रों ने दिल्ली पुलिस, RSS, ABVP, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और CBI के खिलाफ नारे लगाए। छात्रों ने इस्लामोफोबिया यानी इस्लाम और मुसलमानों के प्रति नफरत के खिलाफ भी आवाज उठाई।
10 साल से एक मां अपने बेटे की राह देख रही है, लेकिन आज तक उसे यह जवाब नहीं मिला कि उसका बेटा आखिर कहां है।





