राहुल का राजनीतिक अर्थशास्त्र।
अर्थव्यवस्था की शब्दावली में यदि NSUI को कांग्रेस स्वामित्व वाली एक कंपनी माने तो राहुल ने उसे अक्षम बताकर बंद कर दिया और बाहरी प्रोडक्ट नेहा बोरा,योगेंद्र यादव आयात करने लगे।एक और पारिवारिक कंपनी पीवी के विस्तार पर रोक लगा दी।
आत्मनिर्भर कांग्रेस।
रामलीला ग्राउंड रैली के फलादेश।
नेहा बोरा को वायनाड जैसी सीट से लड़ायेंगे।
वियतनाम यात्रा के दौरान रेहान की लॉन्चिंग नागवार गुजरी। मॉक पार्लियामेंट और रैली में प्रियंका पूरी तरह दरकिनार
कांग्रेस यूपी में सीटों के बंटवारे पर बैकफुट पर रहेगी।एक विधान सभा सीट जितने वोट भी नहीं जुटे
सिर्फ नौ लाख पचास हजार की कमी रह गई तपस्या में।
जहां तक देख रहा हूं रैली आए लोग वोट दे तो एक विधान सभा सीट भी न निकले!
खड़गे सीनियर नेता हैं या कम से कम योगेंद्र यादव को, अगर उनकी याददाश्त साथ दे,तो राहुल गांधी को बताना चाहिए कि रैली बोले तो जे पी,बाबा टिकैत,वीपी सिंह या वी एच पी की रैलियां दिल्ली की रैली गिनी जाती है।
ये रैली तो ड्रोन के कैमरे ऑन होते होते ही फ्रेम से बाहर भी हो गई।
भाई साहब ने एक्सपोर्ट क्वालिटी का टूलकिट लॉन्च किया है।
ग्रेटा थनबर्ग को नोबेल लेने के बाद और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को धरना आंदोलन में जिंदगी खपाने बाद भी यह नहीं सूझा कि पर्यावरण के लिए कार्बन उत्सर्जन नहीं वोट चोरी जिम्मेदार है।
कांग्रेस और राहुल गांधी को उनके वोट बैंक की टर्मिनोलॉजी में जवाब।
#JantaKaShehzada
खड़गे - मोदी का बाप भी जायेगा
राहुल गांधी - नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे।हम उन्हें जाने नहीं देंगे।
लगभग हर माता पिता अपने बच्चे की,कार दिलाने, हेलीकॉप्टर दिलाने जिद से गुजरते हैं और बच्चे का मन रखने मेले में खरीद भी देते हैं।
मॉक पार्लियामेंट भी एक मेला है।
मॉक पार्लियामेंट की चकल्लस को दरकिनार कर यदि राहुल गांधी के आज के बयान में छिपे की वार्ड्स को देखें तो कल के लिए विशेष रूप से चिंतित होना चाहिए।
दिल्ली कल कुछ बड़ा देखेगी?
मॉक पार्लियामेंट जैसे हांगकांग सिक्सेस टूर्नामेंट।
हांगकांग सिक्सेस पर शाहबाज़ शरीफ़ और इस फ़ार्सिकल मॉक पार्लियामेंट पर राहुल गांधी ही खुश हो सकते हैं।
राजनीति में यो या की हैसियत सब्जी में तेजपत्ता जैसी है।
राहुल गांधी ने मॉक पार्लियामेंट में यो या को बतौर सांसद चुन कर इनकी पिच बनाने की असफल योग्यता को सम्मानित किया है।
योगेंद्र यादव, नेहा बोरा राहुल गांधी के खोजे नए कन्हैया कुमार है।
राहुल गांधी ने युवा नेता के नाम पर कन्हैया कुमार आयात किया।
संसद नहीं भेज पाये।
नेहा बोरा भाग्यशाली है कि इस फ़ार्सिकल संसद मॉकड्रिल में मॉक सांसद बन कर बैठ पाईं।
राहुल गांधी इससे ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकते हैं।
कम से कम मीरा कुमार, चूंकि वो सच में लोकसभा अध्यक्ष रही हैं, को इस मॉकड्रिल के Farce का हिस्सा बनने से खुद को अलग रखना चाहिए था।
संवैधानिक पद की गरिमा और स्वयं के आत्मसम्मान को दलगत हित से वरीयता देने पर देश की संवैधानिक परंपरा की वाहक के रूप में उनकी इतिहास में अलग ख्याति होती।
मल्लिकार्जुन खरगे के घर 'मॉक संसद' में जन महाभियोग शुरु, Mock Parliament में खरगे पेश कर रहे हैं प्रस्ताव
#INDIAAlliance #MockParliament #MallikarjunKharge
अब तक सहा अब न सहूंगा
किस रामकथा में किस राम के भाव ये रहे हैं? क्या सह लिया और क्या सहना नहीं चाहते? दशरथ का निर्णय?
कैकेयी का वचन? अपने राज्यसिंहासन पर भरत का डाका?
बेनेगल की फिल्म में जमींदार की खिड़की का कांच पत्थर मार कर तोड़ता बच्चा और बैकग्राउंड में ये गाना, फिट है?
श्याम सुरैया की एक बहुत ही बड़ी म्यूजिकल हिट फिल्म थी दिल्लगी।
गीत शकील बदायूँनी ने लिखे थे और संगीत लीजेंड नौशाद साहब का था।
उस फिल्म का गाना,तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी,इस साँस आस बांसुरी रागिनी की टटपुंजियाँ भाव हीन तुकबंदी से लाख गुना बेहतर था।
गुनगुनाइए, पता चल जाएगा।
जब मेरे दोस्त ने 10 वी क्लास में अपनी गर्लफ्रेंड को लेटर लिखा था, उसके लिरिक्स भी इससे बेहतर थे।😅
@niteshtiwari22 इतने बेहतरीन डायरेक्टर हो आप, दंगल जैसी मास्टरपीस बनाई है आपने। आपको ये बात समझ नहीं आई, किसी विदूषक के मसखरी करने और पौराणिक कथाओं के संवाद लिखने में फ़र्क़ होता है। ये आपने भी पढ़े होंगे, इसमें कुछ भी रामायण के स्तर का लग रहा है ? Chat GPT से मैं अगर अभी बोलूँ, राम सीता के धनुष यज्ञ और प्रथम मिलन पर इससे बहुत अच्छा लिख कर दे देगा। 😇 👇👇
हल्दी की रस्म देख ली,अब आगे
- राम,आज करवा चौथ है।
- सीते,इस वन में क्या उपहार दूं?
- प्रिय,वो देखो,स्वर्ण मृग। कितना अनोखा है(इठला कर बुंदेली टच में जिद)मुझे ये ही चेइए।
- सीते,काये जिद्द कर्री।
- नहीं नाथ,करवा चौथ का व्रत इसी स्वर्ण मृग के साथ मनाऊंगी।
और हां, छलनी भी लानी है।
बहुत जल्द देखने मिलेगा।
जिस हिसाब से रामायण पर फिल्में बन रही है और हनुमान का बिना मूंछ के दाढ़ी के साथ वाला गेट अप हिंदुओं के गले उतार चुके हैं।
तो क्यों नजर नहीं आएंगे हनुमान पेड़ नीचे बैठे किसी चबूतरे पर, तू ही मौला तू ही अली, तुझे पुकारे बजरंग बली की खंजडी बजाते?
ए आर रहमान जैसे खुले आम के हिंदू हेटर को रामायण जैसे धार्मिक ग्रन्थ पर बनी कहानी का हिस्सा बनाओगे तो वो अपनी उस दीनी मानसिकता का प्रदर्शन दिखाएगा ही, जिसमें हिंदुओं के कुएं में थूंक के पूरे गांव के गांव को भ्रष्ट कर के कन्वर्ट करने की मानसिकता रहती।
कव्वाली पर ही रुक गया।।
वरना रामायण में अल्ला ही मौला अली अली भी डाल सकता था संगीत के नाम पर ये।
तीन बार कहा खड़गे जी ने, मोदी का बाप भी जायेगा मोदी का बाप भी जायेगा मोदी का बाप भी जायेगा।
शाप की मुद्रा में,भृकुटियां चढ़ा कोप के साथ।
सौभाग्य से उनके आस पास जल नहीं था और उनके जटा भी नहीं थी नहीं तो जटा का एक केश उखाड़ कर वहीं एक कृत्या प्रगट कर तत्क्षण प्रलय का आदेश दे देते।



















