
National Secretary, @BJP4India MP, Rajya Sabha | Former IIT Delhi Professor | Alumni at Uni of Cambridge (UK), Uni of Oxford (UK), & MIT (USA)
New Delhi, India
Joined June 2011
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ग्रामीण भारत के सशक्तीकरण की दिशा में मोदी सरकार का एक और ऐतिहासिक कदम!
आज केंद्रीय कैबिनेट ने ₹7,395.55 करोड़ लागत की 'प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना' (PM VGSY) को स्वीकृति दी। यह योजना ग्रामीण शासन व्यवस्था को नेक्स्ट-जेनरेशन गवर्नेंस की ओर ले जाएगी।
इसके तहत ई-ग्रामस्वराज और AI-संचालित 'पंचम' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से 2.55 लाख से अधिक पंचायतों को जोड़कर पारदर्शी स्थानीय योजना निर्माण होगा। ग्राम पंचायत को गाँव के समग्र विकास का केंद्र बनाने वाली यह योजना 32 लाख जनप्रतिनिधियों को सशक्त बनाकर 'विकसित भारत' की यात्रा को और गति देगी।
कांग्रेस की एक वरिष्ठ प्रवक्ता से थोड़ी गंभीरता, समझ और राजनीतिक सूझबूझ की उम्मीद तो की ही जाती है। लेकिन “निपट जाएंगे, वाराणसी आ जाना चुनाव लड़ने” जैसी बातें सुनकर लगता है कि गंभीरता और समझ से ज़्यादा ज़ोर सिर्फ़ आक्रामकता दिखाने पर है।
ख़ैर, कांग्रेस को अब एक किताब ज़रूर लिखनी चाहिए:
“चुनाव हारने के 10 मंत्र”
@JaipurDialogues @INCIndia @BJP4India @rishibagree
Congratulations to the Central Government employees and pensioners on the Union Cabinet’s decision to increase Dearness Allowance and Relief by 3%, benefiting around 1.17 crore people. The ₹10,016.10 crore move is a testament to the Modi government’s commitment to their welfare.
Dr. Sandeep Pathak retweeted
जितना भी जोर लगा लो, Bro…
गूंज भी वही रहेगी, नाम भी वही गूंजेगा! 😎
#ModiKahinNahiJayega
Rahul Ghandhi’s rise Vs. Congress’s decline. @indianmatrix
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I thought Naseeruddin Shah was just an ordinary actor. I used to respect & like him.. I never knew that he was a dangerous urban Dimagi Naxal !
मुझे उसके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला।। भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है।
Dr. Sandeep Pathak retweeted
Heartiest congratulations to Captain Smit Machchhar on being conferred the prestigious Order of Zayed II (First Class) by the UAE.
His extraordinary bravery in averting a mid-air tragedy stands as a resounding testament to the valour, skill and calm professionalism of Indian aviation. A true hero and an inspiration to us all!
Dr. Sandeep Pathak retweeted
BJP/Jan Sangh stayed in Opposition for 60+ years but
✅Never supported Naxalites
✅Never celebrated India's defeat
✅Never gave moral backing to terrorists
✅Never sided with hostile nations & the Deep State against their own country.
That's the Difference
Dr. Sandeep Pathak retweeted
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਜੀ, ਕੀ ਤੁਹਾਡੀ ਆਤਮਾ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਮਰ ਚੁੱਕੀ ਹੈ। ਮਾਨਸਾ ਵਿਚ ਇਕ ਨੌਜਵਾਨ ਦੀ ਨਸ਼ੇ ਕਾਰਨ ਮੌਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰ ਰੋਸ ਵੀ ਨਾ ਕਰ ਸਕੇ ?
ਤੁਹਾਡੀ ਜਾਲਮ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਪਰਿਵਾਰ ਤੋਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪੁੱਤ ਦੀ ਲਾਸ਼ ਵੀ ਖੋਹ ਲਈ ਹੈ। ਇਸਤੋਂ ਵੱਡਾ ਸਿਤਮ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ। ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਇਕ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਜੀਅ ਦਾ ਤੁਹਾਡੀ ਪੁਲਿਸ ਧੱਕੇ ਨਾਲ ਸਸਕਾਰ ਕਰ ਚੁੱਕੀ ਹੈ।
ਪੰਜਾਬੀ ਤਹਿਜੀਬ ਵਿਚ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੇਹ ਦੀ ਬੇਹੁਰਮਤੀ ਤਾਂ ਦੁਸ਼ਮਣ ਦੀ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ, ਤੇ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਹੀ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ ਇਹ ਵਿਹਾਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ।
ਕੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵਿਚ ਅਬਦਾਲੀ ਦੀ ਆਤਮਾ ਆ ਗਈ ਹੈ। ਯਾਦ ਰੱਖਿਓ, ਐਨੀ ਅੱਤ ਚੰਗੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ।
@BhagwantMann
@BJP4Punjab
Dr. Sandeep Pathak retweeted
वोटर लिस्ट की जांच हो या चुनावी प्रक्रिया में सुधार, कांग्रेस को हर बात से परेशानी है। जब जमीन पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका है, तो टीवी पर हंगामा करने की जिद क्यों?
लगता है, कांग्रेस को व्यवस्था से ज्यादा परेशानी हर बदलाव से है! 🤦🏻♂️
अदम्य साहस एवं वीरता के प्रतीक बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन!
उन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करते हुए धर्म, स्वाभिमान एवं सामाजिक समानता की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
उनका अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प एवं मातृभूमि के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
Dr. Sandeep Pathak retweeted
जयराम जी फिर बग़ैर किसी आधिकारिक दस्तावेज़ के कहानियों के आधार पर ‘निर्देशित होकर’ ज्ञान बाँटना शुरू मत कीजिये।
अगर कहानियों की ही बात करनी है तो दिल्ली के गलियारे में यह बहुत चर्चित कहानियाँ थी की आपके ही शासनकाल में न्यायाधीशों की नियुक्ति कैसे हुआ करती थी, उन कहानियों पर अपनी याददाश्त ताज़ा कर लीजिये।
कहा जाता है कि उस दौर मैं चुनिंदा नामों की सूची पहले अहमद पटेल के पास जाती थी। वहाँ कथित तौर पर न्यायिक योग्यता से अधिक विचार इस सवाल पर होता था कि *“ये हमारे लिए क्या करेंगे?”*
कहानियों की माने इसके बाद कुछ नामों पर सहमति बनती थी। ये नाम तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास पहुँचते थे। वहाँ से सोनिया गांधी की राय ली जाती थी और फिर नामों को अंतिम रूप दिया जाता था।
अब कुछ सीधे सवाल हैं, जिनका जवाब शायद आपकी याददाश्त से गायब हो गया है पर देश की याददाश्त में है।
*आप बतायें कि अहमद पटेल और सोनिया गांधी किस संवैधानिक पद पर बैठी थीं।कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका हो।
क्या न्यायाधीशों के नामों जैसे गंभीर विषय पर उनकी स्वीकृति में उनकी कोई भी भूमिका थी या नहीं ?
क्या इस कहानी को सच माना जाए।
बड़ी विचित्र बात है कि तीन न्यायाधीशों की वरिष्ठता को दरकिनार कर मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने वाले व Committed Judiciary की बात करने वाले आज न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर लंबे-लंबे प्रवचन दिए जा रहे हैं, लेकिन अपने शासनकाल की नियुक्तियों को लेकर उठने वाले इन सवालों पर चर्चा तक नहीं होती।
आपने तो कहानी बताई जिसका कोई आधिकारिक दस्तावेज़ न्यायालय में या सरकारी अभिलेखों में नहीं है।
में आपको याद दिलाना हूँ जो सरकारी अभिलेख और न्यायालय के दस्तावेज़ में है आपने एक ऐसे व्यक्ति को भारत का मुख्य न्यायाधीश बना था जिसके पास कानून की डिग्री ही नहीं थी यह 1967-68 मे। भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस कैलाशनाथ वांचू।
क्या आप देश को बता सकते हैं की है कौन से योग्यता थी जिससे उस समय तमाम बेहतरीन कानूनी डिग्री रखने वाले जजों को हटकर करके एक ऐसे व्यक्ति को भारत के मुख्य न्यायाधीश बना गया जिस के पास कानून की डिग्री ही नहीं थी।
यह कोई किताब या अख़बार में छपी हुई कहानी नहीं बल्कि भारत के आधिकारिक दस्तावेज़ और सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति की औपचारिक कहानी है।
*दूसरों को संवैधानिक मर्यादा का पाठ पढ़ाने से पहले इन गंभीर आरोपों का जवाब भी दीजिए।*
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस संजय किशन कौल की किताब ने मोदी सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सरकार की दखलंदाज़ी, कॉलेजियम की बैठक से पहले ही सरकार की मंज़ूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय के एक न्यायाधीश के नाम पर उनकी जाति को लेकर सरकार के बेतुके सवाल - जस्टिस कौल ने इन घटनाओं का ज़िक्र किया है। जिन बातों को लोग खुलकर कहने से कतराते थे, जस्टिस कौल ने वो सब बड़े सयंत शब्दों में दर्ज किया है।
हैरानी की बात यह है कि पूर्व चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने नियुक्तियों से पहले सरकार के साथ चर्चा किए जाने की बात से इनकार नहीं किया है। जब पूर्व CJI जस्टिस चंद्रचूड़ कहते हैं कि सरकार की CJI से बातचीत और नियुक्तियों में भूमिका तो होती ही है, तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल और गंभीर हो जाता है।
जस्टिस कौल का यह ख़ुलासा कि PMLA मामले में उनकी अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा कोर्ट के फ़ैसले के कुछ पहलुओं पर पुनर्विचार का सवाल उठाए जाने के बाद मामला बिना उनसे चर्चा किए दूसरी बेंच के सामने पहुँचा दिया गया, बेहद गंभीर है। इससे सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में दैनिक दख़लअंदाज़ी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
अगर न्यायाधीशों की नियुक्तियों पर सरकार की मंज़ूरी का दबाव हो और संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली बेंच भी बदल दी जाए, तो लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए पूछना ज़रूरी है: अगर यह न्यायपालिका पर दबाव और उसकी स्वतंत्रता को कमज़ोर करना नहीं है, तो फिर क्या है?
संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को सत्ता के दबाव से मुक्त होना चाहिए। लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता कोई विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
सेवा, समर्पण एवं मानवता के प्रतीक, सिख धर्म के चतुर्थ गुरु श्री गुरु रामदास जी के पावन प्रकाश पर्व पर उन्हें शत-शत नमन!
उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं, विनम्रता और सेवाभाव से मानवता को प्रेम एवं परोपकार का मार्ग दिखाया। उनका जीवन हमें अहंकार से दूर रहकर सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।
Dr. Sandeep Pathak retweeted
The Congress party’s blatant attempts to sabotage India’s national security for cheap political mileage are nothing short of dangerous. Pawan Khera and the Congress ecosystem are masquerading vital strategic defense as "repression," directly playing into the hands of external adversaries. Let’s look at the harsh reality: China is constructing a massive 60,000 MW Medog Dam right on our doorstep. This gives Beijing complete control over the water flow, turning the river into a potential geopolitical weapon. They could open the floodgates at any given moment, creating an engineered catastrophe capable of sweeping entire regions into the Bay of Bengal.
The Siang Project is not a choice; it is India’s non-negotiable strategic shield and an absolute necessity for regional survival. By funding, instigating, and glorifying these protests, Congress is actively trying to strip away our defense mechanisms. Are you standing with India's sovereignty, or are you acting as the PR machinery for foreign interests? Real patriotism means protecting our borders and our citizens from existential threats, not kneeling to blackmail. We will not compromise on national security. India will build its defenses, secure its borders, and protect its people, whether the Congress party likes it or not.
Gen Z across the country is taking to the streets.
In Delhi, it is for education. In Arunachal Pradesh, it is to protect the forests, rivers and ecosystems that the Adi people have depended on for centuries.
From Delhi to Arunachal, the response has been the same: repression. In a chilling reminder of student protests in Delhi, tear gas has been fired at peaceful protesters in Arunachal Pradesh.
The Adi people are a religious and cultural minority whose beliefs and traditions are deeply rooted in the Siang River and adjoining forests they are protesting to protect against the proposed 11,000 MW dam in the Upper Siang region.
Since @AmitShah is busy on thank you calls to Delhi Police, will Minister of Minority Affairs @KirenRijiju kindly explain what he is doing to protect the minority rights of the Adi people in his home state?
Dr. Sandeep Pathak retweeted
Article 370: History
Naxals: Eliminated
Next Target: Drug Mafia
Get Ready!
पवित्र रामायण महाकाव्य के रचयिता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
उनके विचार और शिक्षाएँ न केवल हमारे समाज को सही दिशा देते हैं, बल्कि हमें सच्चाई और न्याय के पथ पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं।
#ValmikiJayanti2026




























