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The pump says E20. The lab found E31.
Karnataka government tests have found ethanol blending of up to 31.2% in petrol samples from major oil companies.
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Top 10 polluted cities of India right now.
6 from Haryana
3 from Punjab
1 from Uttar Pradesh
I spoke to a few of our volunteers in Punjab, and they don’t sound very confident. They believe anything can happen.
The contest has shifted from AAP vs INC to AAP vs BJP, and Punjab seems to be heading towards a hung assembly.
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Passing through punjab....parali burning every where !!! May be lesser than before but it is crazy
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पंजाब में अदानी पोर्ट के रास्ते नशा फैलाने वाले आप लोग!
पंजाब में गंगैस्टर फैलाने वाले को साबरमती जेल में संरक्षण देने वाले आप लोग
2007-2017 में चिट्टा पार्टी के साथ मिल कर पंजाब में नशा फैलने वाले आप लोग
और अब उसी पार्टी के साथ मिलकर पंजाब में नशा बेचकर फिर से अरबों रुपए कमाने के सपने देख रहे हो?
आज सबसे ज़्यादा नशा उन राज्यों में है जहाँ कई कई सालों से आपकी सरकारें हैं।उन राज्यों में नशा बेचकर पेट नहीं भरा? अब फिर से अपनी चिट्टा पार्टी के साथ मिलके पंजाब को बर्बाद करने आ गए?
जनता जानती है कि आपकी गंदी नज़र पंजाब के पानियों पर है, पंजाब यूनिवर्सिटी पर है, चंडीगढ़ पर है। आप फिर से तीनों काले क़ानून लाना चाहते हो?
पंजाब ये कभी नहीं होने देगा।
पंजाब आज नशे, गैंगस्टरवाद व संगठित अपराध के बढ़ते खतरे से जूझ रहा है। भगवंत मान सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर पंजाब की जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
दिरबा में एक पिता का दबाव में जहर खा लेना और मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परविंदर के पिता ने AAP सरकार और उनके विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गृह मंत्रालय भी इन दोनों घटनाओं पर पंजाब सरकार से जवाब माँगेगा।
पंजाब में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है, संगठित अपराध का खतरा बढ़ रहा है और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भगवंत मान जी, पंजाब की जनता को प्रचार नहीं, जवाब, घोषणाएँ नहीं, परिणाम, नशे के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार और अपराधियों को मिलने वाले किसी भी राजनीतिक संरक्षण की निष्पक्ष जाँच चाहिए।
मैं आज पंजाब की जनता के सामने अपना संकल्प दोहराता हूँ कि पंजाब में हमारी सरकार बनने पर हम नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित पंजाब बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है - नशे के कारोबार पर प्रहार, युवाओं के भविष्य की रक्षा, अपराधियों पर कठोर कार्रवाई और कानून का ऐसा राज, जिसमें कोई भी नागरिक भय के साये में जीने को मजबूर न हो।
2017 and 2022 were filled with energy, enthusiasm, and belief in our journey. We were shaping the narrative and inspiring hope.
This year feels different. I miss that energy and hope we can reconnect with people and rebuild the momentum.
We still have time to reflect, improve, and move forward.
Still hopeful, still believing. Fingers crossed.
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BIG BREAKING | यूपी में SIR पर बड़ा विवाद, मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सफाई भी सवालों के घेरे में
85,854 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए सॉफ्टवेयर से फॉर्म-7 जनरेट होने की पुष्टि, लेकिन बिना कारण दर्ज आवेदन, डिजिटल हस्ताक्षर और समयसीमा के बाद आए 1.10 लाख अनुरोधों पर गंभीर सवाल।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण
(SIR) को लेकर सामने आई खोजी रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की सफाई के बाद विवाद और गहरा गया है। निर्वाचन कार्यालय ने आरोपों को भ्रामक और निराधार बताया है, लेकिन अपनी प्रेस विज्ञप्ति में यह स्वीकार किया है कि 85,854 मतदाताओं को अपात्र घोषित किए जाने के बाद उनके नाम हटाने के लिए सॉफ्टवेयर में फॉर्म-7 जनरेट करने की व्यवस्था थी।
मामला सिर्फ फॉर्म-7 जनरेट होने का नहीं, बल्कि बिना कारण दर्ज किए मतदाताओं के नाम हटाने, अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर, आवेदन की कानूनी समयसीमा और एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश से जुड़ा है।
खोजी पत्रकारिता संस्थान द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध 4.3 लाख से अधिक फॉर्म-7 का विश्लेषण कर दावा किया कि निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की ओर से दर्ज 87,127 विलोपन अनुरोधों में से 85,854 में नाम हटाने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था। यानी अधिकारियों से जुड़े करीब 98.5 प्रतिशत अनुरोधों में कारण का विवरण नहीं मिला।
रिपोर्ट में एक और गंभीर आरोप है कि चुनाव आयोग के ERONET सॉफ्टवेयर से ये फॉर्म अपने आप जनरेट हुए और उन पर संबंधित अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर भी मौजूद थे। रिपोर्ट के अनुसार, चार निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि सुनवाई के दौरान किसी मतदाता को अपात्र घोषित करते ही सॉफ्टवेयर उनके नाम से फॉर्म-7 तैयार कर देता था।
इससे एक बुनियादी सवाल उठता है कि जब अधिकारी ही किसी मतदाता की पात्रता का फैसला कर रहा था, तो उसी अधिकारी के नाम से मतदाता को हटाने का आवेदन भी क्यों तैयार हो रहा था? क्या निर्णय लेने वाला अधिकारी ही आपत्ति दर्ज करने वाला भी बन गया था?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस प्रक्रिया को कानूनी बताते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारियों ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच की, नोटिस जारी किए और सुनवाई के बाद अपात्रता का निर्णय लिया। इसके बाद फॉर्म-7 केवल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जनरेट किया गया, ताकि भविष्य में पता चल सके कि मतदाता का नाम कब और क्यों हटाया गया।
लेकिन इसी सफाई से एक महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आता है। यदि फॉर्म-7 बनाने का उद्देश्य नाम हटाने का कारण सुरक्षित रखना था, तो खोजी रिपोर्ट में सामने आए 85,854 फॉर्म में कारण दर्ज क्यों नहीं था? क्या अपात्रता के कारण अलग आदेशों में दर्ज हैं और क्या वे आदेश सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे?
विवाद यहीं समाप्त नहीं होता। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी व्यक्तियों द्वारा दाखिल 1,10,476 मतदाता विलोपन अनुरोध स्वीकार किए गए। इसके अतिरिक्त अधिकारियों से जुड़े 87,127 अनुरोध 15 मार्च से 2 अप्रैल के बीच दर्ज होने की बात सामने आई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पक्ष है कि आवेदन दाखिल करने की समयसीमा और पहले से लंबित मामलों की सुनवाई तथा निस्तारण की समयसीमा अलग-अलग हैं। लेकिन व्यक्तिगत आवेदकों के 1,10,476 अनुरोधों में से कितने समयसीमा से पहले दाखिल हुए थे और कितने बाद में, इसका स्पष्ट विवरण सामने आना आवश्यक है।
सबसे संवेदनशील आरोप समुदाय विशेष के मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का है।
खोजी रिपोर्ट के मुताबिक तरबगंज और पीलीभीत विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म-7 के जरिए नाम हटवाने के अनुरोधों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित था। तरबगंज में 'रेशमा' नाम से एक ही दिन, एक ही बूथ के 188 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दाखिल किए जाने का दावा किया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में रिपोर्ट में उल्लिखित सभी संबंधित फॉर्म-7 निरस्त कर दिए गए थे। यह महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण है, लेकिन सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में एक ही नाम से आवेदन किसने और किस आधार पर दाखिल किए? क्या आवेदकों की पहचान की जांच हुई और गलत या दुर्भावनापूर्ण आवेदन पाए जाने पर क्या कार्रवाई की गई?
रिपोर्ट में 198 ऐसे मामलों का उल्लेख है जिनमें एक व्यक्ति के नाम से 10 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल हुए और कुल 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास हुआ। निर्वाचन कार्यालय ने इन आंकड़ों को सीमित बताते हुए तर्क दिया है कि प्रदेश में लाखों आवेदनों के मुकाबले ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है।
लेकिन सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ऐसे मामले कितने थे। सवाल यह है कि जिन 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश हुई, उन आवेदनों की प्रामाणिकता और उनके पीछे की मंशा की क्या जांच हुई?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अपनी सफाई में खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पत्रकारों ने 8 अक्टूबर को दोपहर 3:32 बजे सवाल भेजकर शाम 7 बजे तक जवाब मांगा और अगले दिन सुबह खबर प्रकाशित कर दी। निर्वाचन कार्यालय ने इसे आयोग की छवि खराब करने की कोशिश बताया है।
लेकिन पत्रकारों को जवाब देने के लिए पर्याप्त समय न मिलने का मुद्दा और मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया की वैधता दो अलग प्रश्न हैं। पत्रकारों की मंशा पर सवाल उठाने से रिपोर्ट में सामने आए डिजिटल रिकॉर्ड, आवेदन की तारीखों और फॉर्म में दर्ज कारणों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता समाप्त नहीं होती।
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि निर्वाचन कार्यालय ने फॉर्म-7 जनरेट करने की प्रक्रिया स्वीकार की है, जबकि खोजी रिपोर्ट उस प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और दुरुपयोग की आशंका पर सवाल उठा रही है।
उत्तर प्रदेश में 3.26 करोड़ मतदाताओं को नो-मैपिंग और तार्किक विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए थे। इतने व्यापक पुनरीक्षण के दौरान प्रत्येक मतदाता को सुनवाई का अवसर मिलना, अपात्रता के कारणों का रिकॉर्ड उपलब्ध होना और विलोपन संबंधी निर्णयों का सत्यापन संभव होना बेहद महत्वपूर्ण है।
अब आवश्यक है कि चुनाव आयोग 85,854 मामलों के अपात्रता आदेश, संबंधित फॉर्म-7, सॉफ्टवेयर लॉग, डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया और समयसीमा के बाद दर्ज बताए गए अनुरोधों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया को कानूनसम्मत बताया है। हालांकि उपलब्ध खोजी रिपोर्ट और निर्वाचन कार्यालय की सफाई के बीच मौजूद तथ्यात्मक विवादों का अंतिम समाधान मूल रिकॉर्ड और स्वतंत्र सत्यापन से ही संभव होगा।
सवाल है कि जब मामला लाखों मतदाताओं के संवैधानिक मतदान अधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता का है, तो क्या चुनाव आयोग प्रत्येक विवादित विलोपन का कारण और संबंधित आदेश सार्वजनिक करेगा?
#UttarPradesh #SIRControversy #ElectionCommission @ECISVEEP @ceoup @samajwadiparty @INCIndia @INCUttarPradesh @BJP4UP @AamAadmiParty @SanjayAzadSln
Did anyone said “Videshon mein Danka” 🙈
#India: We are concerned by reports of mass detentions of demonstrators, protest leaders, members of civil society organisations, lawyers and journalists, before and during today’s large-scale demonstrations in Delhi.
We call on the authorities to ensure that the right to peaceful assembly is fully respected and fulfilled.
ohchr.org/en/press-releases/…
Abhijeet Dipke, Ashutosh Ranka & Saurav Das have been arrested by Delhi Police.
The police arrested them right on the flight itself, before they could even get off!
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Breaking story: You Tuber Dhruv Rathee Detained By Delhi Police With Assistance From Gurugram Police. Remember if you swat a few cockroaches, even more tend to creep out. 🙏
Vikash Kedia retweeted
Dear ex CEO Bengal Manoj Agarwal - 300 MPs stood in Vijay Chowk today & told your Big Daddy he’s a Chor who’ll be in jail. We told @rashtrapatibhvn too. So you can take your defamation notice & put it where the sun don’t shine :-)
Those going to protest, there are reports Internet has been blocked. Donot download and use Bridgefy (Android/ios) or Briar (Android) to communicate. They work through Bluetooth networks. Don’t use it in your group to communicate. Will defeat purpose of Internet blockade
SHOCKING 😳
BJP’s Staunch supporter Vivek Agnihotri is questioning Bhajan Clubbing & Kumbh Mela.
He says “If only government could tax religion, India would become the richest country. Why just stop with Bhajan Clubbing, start Charanamrit Clubbing.”
Abhijeet Dipke’s video about tomorrow’s protest has been taken down by Meta at the request of the Modi government.
Don’t RT this. 🤣🤣
Protest and dissent are integral parts of a democracy.
But the BJP is hell-bent on crushing democratic voices by doing everything in its power to stop tomorrow’s protest.
You can suppress a protest, but you cannot silence a democracy forever.
Internet services suspended within a 4-km radius in New Delhi. The Ministry of Home Affairs has approved the temporary suspension of internet services. Internet services will remain suspended within a 4-kilometer radius around the Janpath–Kartavya Path crossing. Services will remain suspended from 10 PM on October 9 to 10 PM on October 10. Instructions have been issued to suspend all forms of mobile internet technology.
Remember, the inconvenience faced by commuters across the nation is NOT because of CJP or the protesters in Delhi. It’s because of Modi.
The protesters called for a peaceful demonstration at Jantar Mantar. It’s the government that is closing roads, shutting down Metro stations, and cancelling trains.
Nothing will work. People will stand up for their rights.
Enough of your intimidation. You cannot silence people by creating fear!
🤖 Made with AI





















