Pinned Tweet
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम् 🌸
Ankita Sharma retweeted
Hello, Rajnandgaon! 👋🏻🚦
How many traffic violations can you spot in this video? 👀
Comment your count below! ⬇️
नमस्कार राजनांदगांव! 🚦
इस वीडियो में आपको कितनी यातायात संबंधी गलतियाँ दिखाई दीं?
कमेंट करके अपनी गिनती बताइए! ⬇️
Be safe. Someone is waiting for you. ❤️
Ankita Sharma retweeted
राजनांदगांव पुलिस द्वारा विभिन्न स्कूल, कॉलेज एवं सर्वजनिक स्थानों में चलाया
“साइबर जागृति अभियान”
विद्यार्थियों एवं शिक्षकों व आमजनो ने लिया साइबर सुरक्षा का संकल्प
साइबर जागरूकता के साथ सेल्फी लेकर दिया सुरक्षा का संदेश
Ankita Sharma retweeted
Rajnandgaon, Chhattisgarh: SP Ankita Sharma says, "Today, the police launched a new initiative called 'Pahal'. Under this initiative, a reading room has been opened in the name of Pahal, along with a coaching center. In the coming days, a Pahal Mentorship Program will also be introduced. As part of this program, newly appointed Sub-Inspectors will mentor children and young people from nearby areas, under the guidance of the administration..."
(15/06)
“Pahal” - An initiative by Rajnandgaon Police.
Replying to @ANI
#WATCH | Rajnandgaon, Chhattisgarh: SP, Rajnandgaon, Ankita Sharma says, “Rajnandgaon Police has launched a 3-pronged initiative as part of its first program, which includes the Pehl reading room, coaching centre, and mentorship program. The primary objective is to help children who are struggling to prepare for their exams under adverse circumstances, but are in areas plagued by crime…the sub-inspectors posted at various police stations will also run mentorship programs…people can come here and study for free. This concept is also very popular in the metropolis…we have already received over 100 registrations today for the coaching and programs here…” (15.06)
#WATCH | Rajnandgaon, Chhattisgarh: SP, Rajnandgaon, Ankita Sharma says, “Rajnandgaon Police has launched a 3-pronged initiative as part of its first program, which includes the Pehl reading room, coaching centre, and mentorship program. The primary objective is to help children who are struggling to prepare for their exams under adverse circumstances, but are in areas plagued by crime…the sub-inspectors posted at various police stations will also run mentorship programs…people can come here and study for free. This concept is also very popular in the metropolis…we have already received over 100 registrations today for the coaching and programs here…” (15.06)
#WATCH | Rajnandgaon, Chhattisgarh: State Assembly Speaker, Dr Raman Singh says, “…the Pehl reading room was inaugurated and free coaching was also arranged. Along with the book distribution program, our inspectors, who have been appointed, will conduct a mentorship program in this campaign and will help the children in preparing for exams.” (15.06)
Ankita Sharma retweeted
वैदिक मंत्रदृष्टा ऋषिकाओं से लेकर आधुनिक भारत की सामर्थ्यवान मातृसत्ता तक परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में नारी का योगदान अतुलनीय, अविस्मरणीय और सनातन संस्कृति का जीवनाधार रहा है। भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को केवल जैविक जननी के रूप में नहीं देखा गया, अपितु उसे सृष्टि की आधारशक्ति, धर्म की संरक्षिका, संस्कारों की जननी तथा लोकमंगल की अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। वेदों में जहाँ घोषा, लोपामुद्रा, गार्गी, मैत्रेयी जैसी ऋषिकाएँ ब्रह्मविद्या की परम साधिका बनकर ज्ञान की दिव्य परम्परा को आलोकित करती हैं, वहीं आधुनिक भारत में भी मातृशक्ति अपने धैर्य, तप, त्याग, करुणा और अदम्य संकल्प से राष्ट्रजीवन को दिशा प्रदान कर रही है।
भारतीय दर्शन में परमात्मा के विविध पारमार्थिक-अनुप्रयोग करुणा, कोमलता, वात्सल्य, पवित्रता, क्षमा और औदार्य मातृसत्ता में ही सर्वाधिक मूर्तिमान होकर अभिव्यक्त होते हैं। माँ केवल एक सम्बन्ध नहीं,अपितु वह अनन्त प्रेम का ऐसा दिव्य स्रोत है जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि के लिए स्थान है। वह अपने अस्तित्व का प्रत्येक अंश अपने संतानों के कल्याण में अर्पित कर देती है। इसी कारण भारतीय मनीषा ने माता को देवताओं से भी उच्च स्थान प्रदान करते हुए कहा- “मातृदेवो भव” !
नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः।
नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया॥
अर्थात् माता के समान कोई छाया नहीं, माता के समान कोई आश्रय नहीं, माता के समान कोई रक्षक नहीं और माता के समान कोई प्रिय भी नहीं। यह श्लोक केवल भावनात्मक स्तुति नहीं, बल्कि मानव जीवन के शाश्वत सत्य का उद्घोष है। माँ का वात्सल्य जीवन की प्रथम पाठशाला है। उसके स्नेह में सुरक्षा है, उसकी वाणी में संस्कार हैं और उसके तप में सम्पूर्ण परिवार की मंगलकामना निहित रहती है।
‘माँ’ शब्द स्वयं परमात्मा की भाँति विराट, व्यापक और अनन्त संवेदना का प्रतीक है। जिस प्रकार परमात्मा समस्त जगत् का पालन करते हुए निरन्तर लोकमंगल में रत रहता है, उसी प्रकार माता भी अपने जीवन का प्रत्येक क्षण दूसरों के सुख, संरक्षण और उत्थान के लिए समर्पित कर देती है। वह स्वयं कष्ट सहकर भी परिवार को सुख देती है, स्वयं तपकर भी संतानों के जीवन में प्रकाश भरती है। इसीलिए भारतीय संस्कृति में पृथ्वी को भी “धरणी माता”, गंगा को “गंगा माता”, गौ को “गौ माता” और वेदभूमि भारत 🇮🇳 को “भारत माता” कहकर संबोधित किया गया है। मातृत्व यहाँ केवल सम्बन्ध नहीं, अपितु सम्पूर्ण अस्तित्व का आध्यात्मिक अनुभव है।
वैदिक ऋषियों ने नारी को सृष्टि की मूल चेतना माना है। देवीसूक्त में ऋषिका कहती हैं- “अहं राष्ट्री संगमनी वसूनाम्” अर्थात् मैं राष्ट्र को धारण करने वाली शक्ति हूँ। यह उद्घोष दर्शाता है कि राष्ट्र निर्माण का मूल आधार मातृशक्ति ही है। किसी भी समाज की संस्कृति, नैतिकता, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना का निर्माण माँ की गोद में ही होता है। यदि मातृशक्ति संस्कारित, जागृत और सशक्त है, तो राष्ट्र स्वतः समृद्ध, सभ्य और प्रकाशमान बन जाता है।
आज के युग में जब भौतिकता, प्रतिस्पर्धा और आत्मकेन्द्रित प्रवृत्तियाँ जीवन-मूल्यों को चुनौती दे रही हैं, तब मातृत्व की करुणा, त्याग और सहिष्णुता सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। माँ केवल अपने परिवार का पालन नहीं करती, वह समाज में संवेदना, संयम और सहअस्तित्व के संस्कार भी स्थापित करती है। उसका मौन तप ही सभ्यता की निरन्तरता का आधार है।
अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, अपितु समस्त मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और वंदन का पावन अवसर है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि हमारे जीवन की प्रत्येक उपलब्धि, प्रत्येक संस्कार और प्रत्येक सफलता के मूल में किसी माँ का मौन त्याग, निस्वार्थ प्रेम और अनन्त आशीर्वाद निहित है। विधाता को अपने उदर में पोषित करने वाली, प्राणी मात्र के कल्याण हेतु अपना सर्वस्व आहूत कर देने वाली समस्त मातृसत्ता को कोटिशः नमन। मातृत्व मानवता की वह दिव्य धारा है जो इस सृष्टि को करुणा, प्रेम और जीवन से सिंचित करती रहती है।अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
Motherhood is the purest manifestation of unconditional love, compassion, sacrifice and divine grace. A mother nurtures life with boundless affection, strength and selflessness, and her presence illuminates the path of humanity with tenderness and wisdom. May this sacred occasion inspire all to honour, respect and cherish the eternal greatness of motherhood.
Heartiest greetings and best wishes on the occasion of International Mother’s Day.
#Mothers_Day
#मातृ_दिवस #AvdheshanandG_Quotes
Ankita Sharma retweeted
राजनांदगांव पुलिस की मुस्तैदी से महिला सुरक्षित 🙏
सजगता और त्वरित कार्रवाई से बची बड़ी घटना 💪
#RajnandgaonPolice #PoliceAction #AlertPolice #CrimeAlert #CGPolice #PublicSafety
#WATCH | Chhattisgarh | Rajnandgaon Police, deployed on Navratri duty, performed Aarti and offered prayers at the Maa Bamleshwari Temple after completing their duty on the ninth day of the Chaitra Navratri. (27.03)
(Visuals Source: SP Rajnandgaon Ankita Sharma)
Ankita Sharma retweeted
ना नाम की चाह, ना आराम की फ़िक्र,
फर्ज़ निभाते रहे वो हर हाल में बेफिक्र।
कुछ पलों में वर्दी सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, इंसानियत बन जाती है। 🙏🚓-
राजनंदगांव पुलिस /छत्तीसगढ़ पुलिस
#RajnandgaonPolice #ChhattisgarhPolice #CGPolice #PoliceSeva #MaaBamleshwari #BamleshwariDham #Dongargarh #NavratriSpecial #JaiMataDi
Ankita Sharma retweeted
घोषा गोधा विश्ववारा, अपालोपनिषन्निषत।
ब्रह्मजाया जुहूर्नाम अगस्त्यस्य स्वसादितिः ॥
इन्द्राणी चेन्द्रमाता च सरमा रोमशोर्वशी।
लोपामुद्रा च नद्यश्च यमी नारी च शश्वती ॥
श्रीर्लाक्षा सार्पराज्ञी वाक्श्रद्धा मेधा च दक्षिणा।
रात्री सूर्या च सावित्री ब्रह्मवादिन्य ईरिताः ॥
कीट से लेकर परम्-पुरुष “ब्रह्म” तक को अपने उदर में धारण करने वाली नारी सृष्टि की प्रथम समर्थ-कृति, ईश्वरीय करुणा-कोमलता, पवित्रता-वात्सल्य व औदार्य की साकार अभिव्यक्ति है।
नारी केवल एक जैविक सत्ता नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन की आधारशिला है। वह जीवन की उत्पत्ति, संवर्धन और संरक्षण की दिव्य शक्ति है। भारतीय दर्शन में नारी को शक्ति, प्रकृति और सृजन की अधिष्ठात्री माना गया है। यही कारण है कि हमारे शास्त्रों में नारी को केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और बौद्धिक श्रेष्ठता के प्रतिमान के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
वैदिक युग में नारी ज्ञान और साधना की ऊँचाइयों पर प्रतिष्ठित थी । ऋग्वेद में घोषा, गोधा, विश्ववारा, अपाला, लोपामुद्रा, रोमशा, सरमा, सावित्री आदि अनेक ऋषिकाओं का उल्लेख मिलता है, वे “मंत्र दृष्टा” जिन्होंने वेदों के मंत्रों का दर्शन किया और ब्रह्मविद्या की परंपरा को समृद्ध किया। उन्हें “ब्रह्मवादिनी” कहा गया अर्थात् वे स्त्रियाँ जो ब्रह्म के सत्य का चिंतन, मनन और प्रतिपादन करती थीं। यह भारतीय संस्कृति की उदात्त दृष्टि को प्रकट करता है कि यहाँ नारी को ज्ञान, साधना और नेतृत्व के क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त था।
भारत में नारी केवल परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक ,धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्यों की प्रखर संवाहिका भी है। वह माँ के रूप में जीवन को संस्कारित करती है, गुरु के रूप में ज्ञान देती है और शक्ति के रूप में समाज को दिशा प्रदान करती है। सीता की धैर्यशीलता, गार्गी और मैत्रेयी की दार्शनिक प्रतिभा, अनसूया की तपश्चर्या और सावित्री की अटूट निष्ठा ये सभी उदाहरण भारतीय नारी के बहुआयामी व्यक्तित्व को उजागर करते हैं।
वर्तमान समय में नारी सम्मान, स्वाभिमान, सशक्तिकरण और उसकी अस्मिता की रक्षा के लिए स्त्री-विमर्श के विविध विषयों को भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखने और समझने की आवश्यकता है। आधुनिक विमर्श प्रायः अधिकारों की दृष्टि से नारी को देखता है, परंतु भारतीय चिंतन में नारी केवल अधिकारों की पात्र नहीं, बल्कि सृष्टि की सह-निर्मात्री और संस्कृति की संवाहिका है। अतः आवश्यक है कि हम नारी को केवल पारिवारिक सामाजिक या आर्थिक इकाई के रूप में न देखें, बल्कि उसके आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक आयामों को भी समझें।
आज आधुनिक भारत में भी नारी अपनी प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प के द्वारा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। विज्ञान, शिक्षा, राजनीति, साहित्य, आध्यात्मिकता और सामाजिक सेवा सभी क्षेत्रों में महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि भारतीय नारी की शक्ति और क्षमता अनंत है।
वैदिक मंत्रदृष्टा ऋषिकाओं से लेकर आधुनिक भारत की सामर्थ्यवान मातृसत्ता तक, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में नारी का योगदान अतुलनीय रहा है। वह केवल जीवन की जननी ही नहीं, बल्कि संस्कृति की संरक्षिका और भविष्य की निर्माता भी है।
अतः यह हमारा दायित्व है कि हम नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान को सुनिश्चित करें तथा उसके ज्ञान, प्रतिभा और नेतृत्व को समाज के विकास में पूर्ण रूप से प्रतिष्ठित करें।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !
@rashtrapatibhvn
#InternationalWomensDay #Womenempowerment
#नारी_सशक्तिकरण
#AvdheshanandG_Quotes
How the Mobile Dialogue by #Police (चलित थाना संवाद) in Rajnandgaon (Chhattisgarh) restores faith in khakhi uniform, as trust is gained with impressive results on law & order, curbing crime in rural/suburbs area! A report.. @mygovindia @HMOIndia @santwana99 @ChhattisgarhCMO @jayanthjacob
Ankita Sharma retweeted
How the Mobile Dialogue by #Police (चलित थाना संवाद) in Rajnandgaon (Chhattisgarh) restores faith in khakhi uniform, as trust is gained with impressive results on law & order, curbing crime in rural/suburbs area! A report.. @mygovindia @HMOIndia @santwana99 @ChhattisgarhCMO @jayanthjacob
To the service and principles we belong to.
#ips
#lestweforget
Ankita Sharma retweeted
ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन इंडिया को सक्ती पुलिस ने जारी किया नोटिस, पूछा- ''क्यों न आपको सह-आरोपी बनाया जाए''
#sakti #Police #AmazonIndia #notice
lalluram.com/sakti-police-is…
Ankita Sharma retweeted
एशियन वर्ल्ड स्कूल बाराद्वार के बच्चो द्वारा रक्षाबंधन के पूर्व थाना बाराद्वार के अधिकारी एवं कर्मचारियों से मुलाकात कर बांधी गयी राखी ।

























