आज की बिक्री से मिलने वाली रकम एक बार मिलती है, लेकिन किसी मजबूत बैंक से मिलने वाली सेवाएं और आर्थिक योगदान लंबे समय तक चल सकते हैं। फैसले में तत्काल राजस्व के साथ दीर्घकालिक जनहित भी देखिए।
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बैंक कोई साधारण कारोबार नहीं, जनता के भरोसे से जुड़ी संस्था है!
IDBI Bank को बेचने के बजाय उसकी क्षमता बढ़ाइए, सेवाएं सुधारिए और देश के विकास में उसकी भूमिका मजबूत कीजिए।
हमारी मांग स्पष्ट है—जनहित पहले!
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IDBI Bank को बेचने से पहले सरकार को बताना चाहिए—इस फैसले से देश, ग्राहकों और कर्मचारियों को क्या ठोस लाभ मिलेगा? सार्वजनिक संपत्तियों का भविष्य केवल बिक्री के नजरिए से नहीं, जनहित के नजरिए से तय होना चाहिए।
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बैंक बनाना वर्षों की मेहनत है, लेकिन बेचने का फैसला एक दिन में हो सकता है! IDBI Bank के भविष्य पर कोई भी निर्णय पारदर्शिता और जनहित के आधार पर हो। निजीकरण ही एकमात्र रास्ता नहीं है।
जनहित सर्वोपरि!
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देश को मजबूत बैंक चाहिए, सिर्फ बिक्री के आंकड़े नहीं। IDBI Bank की क्षमता का उपयोग देश के विकास, रोजगार और बेहतर बैंकिंग सेवाओं के लिए कीजिए।
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IDBI Bank के विनिवेश से देश को क्या लाभ होगा? आम जनता, कर्मचारियों और बैंकिंग व्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा? सरकार को इन सवालों का स्पष्ट और पारदर्शी जवाब देना चाहिए।
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एक मजबूत बैंकिंग व्यवस्था वही है जो बड़े कारोबारियों के साथ छोटे व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों की जरूरतों को भी समझे। IDBI Bank के भविष्य पर फैसला जनहित को ध्यान में रखकर हो।
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अगर IDBI Bank में सुधार की जरूरत है, तो पेशेवर प्रबंधन, बेहतर तकनीक और जवाबदेही बढ़ाइए। हर समस्या का समाधान निजीकरण नहीं होता!
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सरकारी संपत्तियां जनता के संसाधनों से बनी हैं। किसी भी रणनीतिक विनिवेश से पहले पारदर्शिता, जवाबदेही और दीर्घकालिक जनहित सुनिश्चित होना चाहिए।
IDBI Bank को बचाइए, सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दीजिए!
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बैंकिंग सिर्फ मुनाफा कमाने का कारोबार नहीं, बल्कि आर्थिक समावेशन और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सार्वजनिक बैंकिंग की ताकत को कमजोर नहीं, और मजबूत किया जाना चाहिए।
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IDBI Bank के कर्मचारियों की मेहनत, समर्पण और वर्षों का योगदान किसी भी बैंक की असली ताकत है। निजीकरण के फैसले में उनके भविष्य और हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
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सरकार से सीधा सवाल-
जब सरकारी बैंक देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की सेवा में अहम भूमिका निभाते हैं, तो IDBI Bank को बेचने की जरूरत क्यों? विनिवेश नहीं, बेहतर प्रबंधन और विकास चाहिए!
#IDBINotForSale
जनहित का सवाल @IDBI_Bank सिर्फ एक बैंक नहीं, बल्कि करोड़ों ग्राहकों और कर्मचारियों के भरोसे का नाम है। इसे बेचने के बजाय मजबूत बनाइए। सार्वजनिक संस्थानों की जिम्मेदारी जनता के प्रति होनी चाहिए, निजी मुनाफे के प्रति नहीं।
#IDBINotForSale #SaveIDBIBank
निजी बैंक कारोबार बढ़ाने पर ध्यान दें और सरकारी बैंक पूरे साल RBIA, Statutory Audit, Concurrent Audit और Inspection के चक्रव्यूह में उलझे रहें—आखिर क्यों?
🔴 ऑडिट जरूरी है, लेकिन अनावश्यक ऑडिट और अनुपालन का बोझ बैंकिंग कारोबार को पंगु नहीं बनाना चाहिए।
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@RBI
@DFS_India @iba
सरकारी बैंकों को भी अनावश्यक निरीक्षणों से मुक्त करिए,ताकि कर्मचारी कागजी अनुपालन नहीं,बल्कि ग्राहक सेवा,ऋण वितरण और कारोबार बढ़ाने पर ध्यान दे सके।
सवाल ऑडिट बंद करने का नहीं,ऑडिट के नाम कार्यक्षमता बाधित करने वाली व्यवस्था बदलने का है!
#PublicSectorBanks #BankingReforms #PSBs
सरकार देश चलाएगी या जनता की संपत्ति बेचकर खर्च चलाएगी?
मुनाफा कमाने वाली कंपनियाँ बेचने के बजाय उनका प्रबंधन सुधारिए!
सरकारी संपत्ति जनता की अमानत है, सरकार की जागीर नहीं!
📢 विनिवेश बंद करो, जनता की संपत्ति बचाओ!
#StopDisinvestment #IDBIBank
@RahulGandhi @narendramodi @BBC
भैयाजी @jpsin1
FACT CHECK: इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना बंद कीजिए!
ICICI Bank,HDFC Bank और Axis Bank को मनमोहन सिंह द्वारा सरकारी बैंकों से बेचकर निजी बनाने का दावा गलत है।
ICICI Bank की स्थापना 1994 में निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में हुई। 1/n
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
ओ अंकिल
आज जो निजी क्षेत्र के 3 सबसे बड़े बैंक हैं यानी ICICI बैंक एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक यह तीनों कभी सरकारी हुआ करते थे लेकिन पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने इन्हें बेच दिया
आई सी आई सी का पूरा नाम इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया था ..यह भारत सरकार की ऐसी संस्था थी जो बड़े उद्योगों को लोन देती थी लेकिन एक झटके में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने इसका डिसइनवेस्टमेंट करके इसे प्राइवेट बना दिया और इसका नाम और आईसीआईसीआई बैंक हो गया
आज जो एचडीएफसी बैंक है उसका पूरा नाम हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया था यह भारत सरकार की एक ऐसी संस्था हुआ करती थी जो मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ते ब्याज पर होम लोन देने का काम करती थी
नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने कहा सरकार का काम सिर्फ गवर्नेंस करना है होम लोन बेचना नही है
मनमोहन सिंह इसे जरूरी कदम बताते हैं और कहते हैं सरकार का काम सिर्फ सरकार चलाना है बैंक चलाना लोन देना नहीं
और एक झटके में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने एचडीएफसी बैंक को बेच दिया और यह निजी क्षेत्र का बैंक बन गया
इसी तरह की बेहद दिलचस्प कहानी एक्सिस बैंक की है
भारत सरकार की एक संस्था हुआ करती थी उसका नाम था यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया यह संस्था लघु बचत को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी यानी आप इसमें छोटे-छोटे रकम जमा कर सकते थे मनमोहन सरकार नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा की सरकार का काम चिटफंड की स्कीम चलाना नहीं है और एक झटके में इसे बेच दिया गया पहले इसका नाम यूटीआई बैंक हुआ और बाद में इसका नाम एक्सिस बैंक हो गया
इसी तरह आज आईडीबीआई बैंक है जो एक प्राइवेट बैंक है एक समय में यह भारत सरकार की संस्था हुआ करती थी जिसका नाम था इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया इसका भी काम उद्योगों को लोन देना था लेकिन मनमोहन सिंह ने इसे भी 60% बेच दिया था
अपनी यादाश्त को कमजोर न होने दो कभी
डिसइनवेस्टमेंट पॉलिसी को भारत में कौन लाया था जरा सर्च कर लो जब *नरसिंगा राव के समय में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे जब मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था मैक्सिमम गवर्नमेंट लेस गवर्नेंस उन्होंने कहा था कि सरकार का काम धंधा करना नहीं सरकार का काम गवर्नेंस देना है* ऐसा माहौल देना है कि लोग यह सब काम करें.
मनमोहन सिंह ने ही *सबसे पहले टोल टैक्स पॉलिसी लाई थी* यानी निजी कंपनियों द्वारा सड़क बनाओ और उन कंपनियों को टोल टैक्स वसूलने का परमिशन दो.
मनमोहन सिंह ने *सबसे पहले एयरपोर्ट की निजी करण* की शुरुआत की थी और सबसे पहला दिल्ली का *इंदिरा गांधी एयरपोर्ट को जीएमआर ग्रुप को* दिया गया.
आज चम्पक उछल उछल कर नाच नाच कर बेसुर रागा गाता फिर रहा है, "मोदी ने दोस्तो को बेच दिया..
मनमोहन सिंह करें तो - विनिवेश
मोदी करें तो - देश को बेचा .. !!!
2009-10 में मनमोहन सिंह ने 5 कंपनियां बेचीं
NHPC Ltd.-
OIL - ऑयल इंडिया लिमिटेड
एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
आरईसी - ग्रामीण विद्युतीकरण निगम
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
2010-11 में, मनमोहन सिंह ने 6 कंपनियाँ बेचीं!
एसजेवीएन - सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड
ईआईएल - इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड
CIL - कोल इंडिया लिमिटेड
पीजीसीआईएल - पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
MOIL - मैंगनीज अयस्क इंडिया लिमिटेड
एससीआई - शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया।
2011-12 में मनमोहन सिंह ने 2 कंपनियाँ बेचीं
पीएफसी - पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन।
ओएनजीसी - तेल और प्राकृतिक गैस निगम
2012-13 में, मनमोहन सिंह ने बेचीं 8 कंपनियां-
सेल - भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड
नाल्को - नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड
आरसीएफ - राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक
एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
OIL - ऑयल इंडिया लिमिटेड
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
HCL - हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड
एनबीसीसी
👉 2013-14 में मनमोहन सिंह ने 12 कंपनियां बेचीं
एनएचपीसी - नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन
भेल - भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
ईआईएल - इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
सीपीएसई - सीपीएसई-एक्सचेंज ट्रेडेड फंड
PGCI - पावर ग्रिड कॉर्पोफ़ इंडिया लि।
एनएफएल - राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड
MMTC - धातु और खनिज व्यापार निगम
HCL - हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड
आईटीडीसी - भारतीय पर्यटन विकास निगम
एसटीसी - स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन
एनएलसी - नेयली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन लिमिटेड
सबसे पहले शुरू किया गया बताने के लिए पोस्ट में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है। यह दावा ऐतिहासिक दस्तावेजों से अलग से सत्यापित किए बिना नहीं करना चाहिए।
दिल्ली एयरपोर्ट का निजीकरण: 2006 में UPA सरकार के दौरान दिल्ली एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और संचालन के लिए GMR समूह के नेतृत्व
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