कुछ पुष्प मिले है बीहड़ से ! @_harihardas

दंडकारण्य
Joined January 2025
1/ एकात्मा नमस्तुभ्यं हरये च हराय च। एक बार पूज्य मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेंद्र दास जी महाराज एक कथा में बता रहे थे कि जब सेतु तट पर भगवान राम ने भगवान शिव को लिंग रूप में स्थापित किया तो उसको "रामेश्वर - राम के ईश्वर" के रूप में प्रतिपादित किया, परंतु भगवान महादेव ने उसका अर्थ
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तत्रातिशुशुभे ताभिर्भगवान् देवकीसुतः । मध्ये मणीनां हैमानां महामरकतो यथा ॥ #शरदपूर्णिमा
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बंदऊँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ ।
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तत्रातिशुशुभे ताभिर्भगवान् देवकीसुतः । मध्ये मणीनां हैमानां महामरकतो यथा ॥ #शरदपूर्णिमा
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प्राप्ति वो ही सफल है जिसकी प्राप्ति के बाद कुछ प्राप्त करना शेष न रहे....
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न स्वैरी स्वैरिणी कुतः उपनिषद में महाराज अश्वपति अपने राज्य का वर्णन करते हुए कहते है " मेरे राज्य में स्वेच्छाचारी पुरुष नहीं है तो स्वेच्छाचारी नारी कहाँ से होंगी ! " सत्य भी यहीं है की जब पुरुष स्वयं पर से धर्म का नियंत्रण खो देता है तभी महिलाएं अधर्म में रत होती है। आज के समय की अठारह से बीस साल की उम्र की सोशल मीडिया निगरानी कमेटी को ये समझना होगा की केवल महिलाओं के शास्त्रोक्त धर्म को ढूंढ ढूंढ कर लिखना और उनको पतित सिद्ध कर देने से धर्म की रक्षा नहीं होगी। स्वयं की ओर भी झांकना होगा की क्या हम हमारे निमित्त जो विधि निषेध बनाये गए है उनका पालन कर रहे है ? स्मृतियों के संदर्भो को ला कर नारी को तो पुरुष के द्वारा अनुशासित कर दिए जाने को प्रोत्साहन दिया जाता है, समाज के पतन का एक मात्र कारण नारी को सिद्ध कर दिया जाता है पर क्या उन पुरुषों का जीवन उन्ही स्मृतियों के आधार पर धर्म द्वारा अनुशासित है ? क्या उनका पतन नहीं हुआ है ? उनका पतन महिलाओं के पतन से कम क्यों माना गया? लड़कियां नाच रही है क्योंकि उन्हें नाचते देखने को पुरुष आतुर है ? स्त्रियां व्याभिचारिणी हुए क्योंकि उन्हें वैसे पुरुष उपलब्ध है। अगर पुरुष स्वयं को अनुशासित कर लेगा तो महिलाओं का सतीत्व भंग उनके चाहने पर भी नहीं हो पायेगा कैसे होगा। मेरा उद्देश्य किसी एक जेंडर के व्यवाहरिक पतन को सही ठहरना नहीं परन्तु दोनों के ही पतन को गलत बताना है
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उमा-शम्भू चरण रति मोरे !
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कार्तिके मासि यो दद्याद् घृतदीपं शिवाग्रतः । सम्पूज्यमानं वा पश्येद्विधिना परमेश्वरम् ॥
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होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन! कह महाशक्ति राम के वदन में हुईं लीन🌸
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शुभ शुभ✨
आप सभी को नवमी की शुभकामनाएं , देवी आप सभी की इच्छाएं पूरी करे
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शुभ अष्टमी🙏🏻
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तुम सकल सृष्टि की शक्ति पुंज!
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मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि!
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शिवे भक्तिः शिवे भक्तिः शिवे भक्तिर्भवे भवे।
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श्यामे त्वमेव यदि किञ्चन मय्यनाथे । धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव॥
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जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ !
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मोहि कपट छल छिद्र न भावा !
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जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ !
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निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम् !
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राम तो दया के सागर है परंतु किसी दिन तुम्हारे अपने ही कुलदेवता इस अभद्रता पर क्रोधित हो गए ना तो नाकों चने चबवा देंगे। कुलदेवता का तो पता होगा ना? खैर छोड़ो तुम कैरोल गाओ दीपोत्सव मनाओ। भारत कुछ बुद्धुओं का भी तो देश है। 5)
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मूल अधर में सुप्त भुजंगी योगी आज जगाने को चक्षु ओटकर बैठा वन में भूधर सुता मनाने को तृप्त ध्यान में देख रहा वृषभ कटि बड़ भागी जो शूल धारी प्रत्यक्ष शिवा हो हस्त जलज हर्षाती वो। #शैलपुत्री #नवरात्र
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